स्क्रीन प्रोटेक्टर पर BIS अनिवार्य मानक 1 अप्रैल 2027 से लागू, 60,000 नौकरियाँ और ₹16,000 करोड़ उद्योग का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को अनिवार्य पंजीकरण आदेश (CRO) के दायरे में लाने का फैसला किया है, जिसका उद्योग संगठन इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने 22 सितंबर 2026 को स्वागत किया। यह नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा और भारत में बिकने वाले हर स्क्रीन प्रोटेक्टर — चाहे घरेलू हो या आयातित — के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का पंजीकरण अनिवार्य कर देगा। ICEA के अनुसार इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 60,000 नई नौकरियाँ सृजित होने की संभावना है।
नया मानक क्या है और कब से लागू होगा
सरकार ने IS 19348:2025 'ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर — स्पेसिफिकेशन' मानक के तहत स्क्रीन प्रोटेक्टर को CRO में शामिल किया है। 1 अप्रैल 2027 से पहले घरेलू निर्माताओं को अपनी उत्पादन इकाइयाँ तैयार करने, प्रक्रियाएँ अनुकूलित करने और BIS प्रमाणन हासिल करने का समय दिया गया है। यह समयसीमा उद्योग को नए ढाँचे के अनुरूप सुव्यवस्थित होने का अवसर देती है।
घरेलू उद्योग और रोज़गार पर संभावित असर
ICEA के अनुमान के अनुसार, इस मानक के लागू होने से भारत में ₹12,000 करोड़ से ₹16,000 करोड़ का गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण उद्योग विकसित हो सकता है, जो घरेलू माँग के साथ-साथ निर्यात को भी गति देगा। संगठन का यह भी अनुमान है कि सरकार को लगभग ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त जीएसटी राजस्व प्राप्त हो सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में हर वर्ष लगभग 50 करोड़ स्क्रीन प्रोटेक्टर की खपत होती है, जिनमें से 90% से अधिक आयातित हैं। अनिवार्य मानक लागू होने के बाद आयात पर यह भारी निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
उपभोक्ता संरक्षण: गुणवत्ता की गारंटी
ICEA ने बताया कि अब तक बाज़ार में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ थीं — कई उत्पादों को 'टेम्पर्ड ग्लास' बताकर बेचा जाता था, जबकि वे निर्धारित गुणवत्ता और टेम्परिंग मानकों को पूरा नहीं करते थे। वर्तमान में स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमतें ₹50 से ₹2,500 तक हैं, लेकिन कीमत और वास्तविक गुणवत्ता के बीच प्रायः कोई स्पष्ट संबंध नहीं है।
संगठन के अनुसार, अंडर-इनवॉइसिंग और गलत घोषणा जैसी अनुचित व्यापारिक प्रथाएँ बड़े पैमाने पर मौजूद हैं, जिससे सरकार को जीएसटी राजस्व का नुकसान होता है और घरेलू रोज़गार के अवसर प्रभावित होते हैं। BIS पंजीकरण अनिवार्य होने से उपभोक्ताओं को यह भरोसा मिलेगा कि वे जो उत्पाद खरीद रहे हैं, वह निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की संभावना
ICEA का मानना है कि अनिवार्य गुणवत्ता मानकों के लागू होने से यह कारोबार अधिक संगठित होगा और नियमों का पालन करने वाले घरेलू निर्माताओं के लिए समान प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार होगा। संगठन ने यह भी कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्क्रीन प्रोटेक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है। गौरतलब है कि यह कदम केंद्र सरकार की व्यापक 'मेक इन इंडिया' और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति के अनुरूप है, जो आयात प्रतिस्थापन और घरेलू मूल्यवर्धन को प्राथमिकता देती है।
अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि घरेलू निर्माता अप्रैल 2027 की समयसीमा से पहले कितनी तेज़ी से अपनी क्षमताएँ विकसित करते हैं और सरकार BIS प्रमाणन प्रक्रिया को कितना सुगम बनाती है।