सेंसेक्स 782 अंक टूटा, 73,867 पर; IT शेयरों में 3.9% गिरावट, TCS 6.6% लुढ़का
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 3 जून को शुरुआती कारोबार में 782.10 अंक यानी 1.05% टूटकर 73,867.74 पर पहुँच गया, जबकि NSE निफ्टी 50 205.05 अंक (0.87%) की गिरावट के साथ 23,278.50 पर कारोबार करता दिखा। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता और कमज़ोर वैश्विक संकेतों ने सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन घरेलू बाज़ार की धारणा पर असर डाला।
कैसी रही ओपनिंग
30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,649.84 से 142.11 अंक गिरकर 74,507.73 पर खुला, वहीं निफ्टी 50 पिछले बंद 23,483.55 से 67.6 अंक फिसलकर 23,415.95 पर खुला। सुबह करीब 9:32 बजे IST तक बिकवाली तेज़ हो गई और दोनों सूचकांक दिन के निचले स्तरों के पास कारोबार करते नज़र आए।
सेक्टरों का हाल: IT पर सबसे भारी मार
निफ्टी IT सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 3.9% की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी में 1.91%, निफ्टी मीडिया में 1.20%, निफ्टी FMCG और निफ्टी PSU बैंक दोनों में 0.98%, तथा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ में 0.97% की कमज़ोरी रही। तुलनात्मक रूप से, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल ने सबसे कम नुकसान के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। व्यापक बाज़ार में निफ्टी मिडकैप 0.85% और निफ्टी स्मॉलकैप 0.58% कमज़ोर रहे।
टॉप लूज़र्स और गेनर्स
निफ्टी पैक में TCS के शेयर 6.6% तक टूटकर सबसे बड़े लूज़र रहे। टेक महिंद्रा, इंफोसिस और HCL टेक में 3.1% से 4.3% तक की गिरावट दर्ज की गई। ITC और इटरनल भी कमज़ोर रहे। दूसरी ओर, ONGC, अपोलो हॉस्पिटल, बजाज ऑटो, मारुति, नेस्ले इंडिया और टाटा कंज्यूमर के शेयरों में तेज़ी देखी गई।
रुपये पर भी दबाव
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमज़ोर होकर 95.47 पर खुला। मंगलवार को यह 95.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी ने 23,262 के स्तर को छूने के बाद हल्की मज़बूती दिखाई और 23,153 तथा 23,106 के अहम सपोर्ट के ऊपर बना रहा। अब 23,229 को महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, और तेज़ी की पुष्टि तभी होगी जब निफ्टी 23,800 के ऊपर बंद होने में सफल रहे।
आगे क्या: RBI की MPC बैठक पर नज़र
घरेलू मोर्चे पर निवेशकों का ध्यान अब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक पर रहेगा, जो बुधवार से शुरू होकर शुक्रवार तक चलेगी। ब्याज दरों पर रुख और वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजे आने वाले सत्रों में बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।