वित्त मंत्री सीतारमण ने शिकागो में मोंडेलेज COO लुका जारामेला से की मुलाकात, भारत में विनिर्माण विस्तार पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका के शिकागो में मोंडेलेज इंटरनेशनल के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एवं चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर लुका जारामेला से मुलाकात की। 29 अगस्त को हुई इस बैठक में भारत में कंपनी के उत्पादन, सोर्सिंग, सेवाओं और निर्यात विस्तार के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। वित्त मंत्रालय ने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
बैठक में क्या हुई चर्चा
बैठक के दौरान मोंडेलेज इंटरनेशनल की भारत में मौजूदा और बढ़ती उपस्थिति, विनिर्माण एवं बुनियादी ढाँचे में उसके निरंतर निवेश, तथा देश में परिचालन विस्तार की संभावनाओं पर गहन विमर्श हुआ। वित्त मंत्री सीतारमण ने कंपनी के भारत पर भरोसे का स्वागत किया और देश की कुशल प्रतिभा, बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं तथा विकसित होते सप्लाई-चेन इकोसिस्टम को रेखांकित किया।
सरकार का निवेश-अनुकूल संदेश
वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण ने नियामकीय सरलीकरण, डिजिटलीकरण और बेहतर बुनियादी ढाँचे के ज़रिये कारोबारी सुगमता और लागत में सुधार पर सरकार के निरंतर फोकस को भी उजागर किया। मंत्रालय ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य वैश्विक कंपनियों को भारत में दीर्घकालिक निवेश को और गहरा करने में सक्षम बनाना है।
व्यापक संदर्भ: भारत की वैश्विक हब की महत्वाकांक्षा
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक विनिर्माण और सप्लाई-चेन हब के रूप में अपनी स्थिति सुदृढ़ करने तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों से अधिक निवेश आकर्षित करने की दिशा में सक्रिय है। मोंडेलेज इंटरनेशनल — जो ओरियो, कैडबरी और टोबलरोन जैसे वैश्विक ब्रांडों की मूल कंपनी है — भारत में पहले से ही विनिर्माण संयंत्र संचालित करती है और देश को एक प्रमुख उत्पादन आधार के रूप में देखती है।
शील्ड AI से भी हुई मुलाकात
इसी दौरे के तहत वित्त मंत्री सीतारमण ने शील्ड एआई के सह-संस्थापक एवं अध्यक्ष ब्रैंडन त्सेंग से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत के साथ कंपनी के जुड़ाव और एआई-सक्षम स्वायत्तता, मानव रहित प्रणालियों तथा अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गहरा करने के अवसरों पर चर्चा हुई।
आगे क्या
इन बैठकों के नतीजे निकट भविष्य में ठोस निवेश प्रतिबद्धताओं के रूप में सामने आ सकते हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, नियामकीय सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास पर सरकार का जोर वैश्विक कंपनियों को भारत में अपनी उपस्थिति को और मज़बूत करने में सहायक होगा।