सेंसेक्स 407 अंक टूटा, 77,772 पर खुला; अमेरिका-ईरान तनाव से ऑयल-ऑटो शेयरों में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार बुधवार, 8 जुलाई को भारी दबाव में खुला, जब अमेरिका द्वारा ईरान पर ताजा सैन्य हमलों और ईरान के तेल निर्यात लाइसेंस रद्द किए जाने की खबरों ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को झटका दिया। सुबह 9 बजकर 22 मिनट पर BSE सेंसेक्स 407 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,772 पर और NSE निफ्टी 50 134 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 24,264 पर कारोबार कर रहा था।
मुख्य घटनाक्रम
गिरावट केवल लार्जकैप तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 169 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 62,116 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 55 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,164 पर था। सूचकांकों में सर्वाधिक दबाव ऑयल एवं गैस और ऑटो सेक्टर पर देखा गया, जो शुरुआती कारोबार में टॉप लूज़र रहे।
निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी एफएमसीजी भी लाल निशान में थे। दूसरी ओर, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी आईटी और निफ्टी इंडिया डिफेंस हरे निशान में बने रहे।
शेयरों का हाल
सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टीसीएस, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा बढ़त में रहे। वहीं इंडिगो, एशियन पेंट्स, मारुति सुज़ुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, इटरनल, HUL, अल्ट्राटेक सीमेंट, SBI, BEL, L&T, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, ट्रेंट और भारती एयरटेल गिरावट में रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव: गिरावट की असली वजह
अमेरिकी सेना के अनुसार, यह ताजा हमले हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन तेल-वाहक जहाजों पर ईरान के कथित हमले के जवाब में किए गए। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात लाइसेंस भी रद्द कर दिए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर तेज़ हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही आपूर्ति को लेकर सतर्क था।
इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड 2.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 76.13 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 2.64 प्रतिशत की मज़बूती के साथ 72.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।
वैश्विक बाज़ारों का रुख
वैश्विक स्तर पर मिलाजुला कारोबार देखा गया। टोक्यो और सोल के बाज़ार लाल निशान में थे, जबकि शंघाई और हांगकांग हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी शेयर बाज़ार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर बुधवार की भारतीय बाज़ार की शुरुआत पर साफ़ दिखा।
आगे क्या
गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, और इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ता है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि अमेरिका-ईरान संघर्ष और गहराया तो कच्चे तेल की कीमतें और चढ़ सकती हैं, जिससे भारत के चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ेगा। बाज़ार की दिशा अब काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।