प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड और एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस में समझौता, स्वदेशी टाइप-IV सीएनजी सिलेंडरों के व्यावसायीकरण को मिलेगी रफ्तार

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प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड और एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस में समझौता, स्वदेशी टाइप-IV सीएनजी सिलेंडरों के व्यावसायीकरण को मिलेगी रफ्तार

सारांश

TDB और एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस के बीच हुए इस समझौते से भारत में पहली बार स्वदेशी टाइप-IV सीएनजी सिलेंडरों का व्यावसायिक उत्पादन संभव होगा — जो स्टील सिलेंडरों से 75% हल्के हैं और 600 बार से अधिक दबाव सह सकते हैं। यह कदम आयात निर्भरता घटाने और स्वच्छ परिवहन को घरेलू तकनीक से सशक्त करने की दिशा में अहम है।

मुख्य बातें

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने 7 मई 2025 को एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ टाइप-IV सीएनजी सिलेंडर व्यावसायीकरण के लिए समझौता किया।
टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडरों से 75 प्रतिशत तक हल्के हैं, जिससे वाहन दक्षता और पर्यावरणीय लाभ दोनों मिलते हैं।
सिलेंडर का डिज़ाइन 600 बार से अधिक विस्फोट दबाव सहने में सक्षम है, जो निर्धारित नियामक मानकों से काफी ऊपर है।
तकनीक में जंग-रोधी पॉलीमर लाइनर , CFRP लेआउट और मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम शामिल हैं।
परियोजना का उद्देश्य आयात निर्भरता घटाना और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को घरेलू स्तर पर मज़बूत करना है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने 7 मई 2025 को दिल्ली स्थित मेसर्स एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य स्वदेशी रूप से विकसित टाइप-IV कंपोजिट सीएनजी सिलेंडरों के व्यावसायीकरण के लिए एक उन्नत विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वच्छ ऊर्जा परिवहन और घरेलू विनिर्माण को मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गुरुवार को इस समझौते की जानकारी सार्वजनिक की।

परियोजना का दायरा और तकनीकी विशेषताएँ

इस परियोजना के तहत फिलामेंट वाइंडिंग, ब्लो मोल्डिंग और उच्च दबाव परीक्षण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए टाइप-IV सीएनजी सिलेंडरों के उत्पादन के लिए एक विशेष संयंत्र स्थापित किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, यह संयंत्र स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल और उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग करके एक लागत-प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार उत्पादन प्रणाली विकसित करेगा।

टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडरों की तुलना में 75 प्रतिशत तक हल्के होते हैं, जिससे वाहन की ईंधन दक्षता बेहतर होती है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है। इन सिलेंडरों में जंग-रोधी पॉलीमर लाइनर, अनुकूलित CFRP (कार्बन फाइबर रेइनफोर्स्ड पॉलीमर) लेआउट और उन्नत मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो रिसाव और कंपन की संभावना को न्यूनतम करता है।

सुरक्षा मानकों की दृष्टि से यह डिज़ाइन 600 बार से अधिक का विस्फोट दबाव सहन करने में सक्षम है, जो नियामक आवश्यकताओं से काफी अधिक है और मज़बूत परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता

यह तकनीक एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित की गई है। मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना भारत के तेज़ी से विस्तार हो रहे सीएनजी मोबिलिटी इकोसिस्टम को सहयोग देने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई है। गौरतलब है कि भारत में सीएनजी वाहनों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिससे उन्नत गैस भंडारण प्रणालियों की माँग भी बढ़ी है।

यह पहल सरकार के सतत परिवहन, स्वच्छ ईंधन और उन्नत मोबिलिटी घटकों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति के अनुरूप है।

आयात निर्भरता में कमी और आपूर्ति श्रृंखला

मंत्रालय ने बताया कि इस परियोजना से आयातित उत्पादों के घरेलू विकल्प तैयार होंगे, जिससे प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और देश में एक सुदृढ़ स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला विकसित होगी। वर्तमान में उच्च-प्रदर्शन वाले कंपोजिट सिलेंडरों के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है, और यह परियोजना उस निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आगे की राह

TDB और एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस के बीच यह समझौता भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को तकनीकी और औद्योगिक आधार देने की कोशिश है। उन्नत गैस भंडारण प्रणालियों में घरेलू क्षमता बढ़ने से न केवल परिवहन क्षेत्र को लाभ मिलेगा, बल्कि उभरते ऊर्जा अनुप्रयोगों में भी भारत की स्थिति मज़बूत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और TDB का यह समझौता उस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह संयंत्र वास्तव में उत्पादन शुरू करे और उसकी लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता आयातित उत्पादों से मापी जाए। भारत में सीएनजी वाहन तेज़ी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्नत कंपोजिट सिलेंडरों की आपूर्ति श्रृंखला अभी भी कमज़ोर है — इस परियोजना की सफलता उस कमी को भरने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाइप-IV सीएनजी सिलेंडर क्या होते हैं और ये पारंपरिक सिलेंडरों से कैसे अलग हैं?
टाइप-IV सीएनजी सिलेंडर कंपोजिट सामग्री से बने होते हैं और पारंपरिक स्टील सिलेंडरों की तुलना में 75 प्रतिशत तक हल्के होते हैं। इनमें जंग-रोधी पॉलीमर लाइनर और CFRP लेआउट का उपयोग होता है, जिससे ये अधिक टिकाऊ और सुरक्षित होते हैं।
TDB और एनटीएफ एनर्जी सॉल्यूशंस के बीच समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समझौता भारत में पहली बार स्वदेशी स्तर पर टाइप-IV सीएनजी सिलेंडरों के व्यावसायिक उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे आयात निर्भरता घटेगी और स्वच्छ ऊर्जा परिवहन के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत होगी।
इन सिलेंडरों की सुरक्षा विशेषताएँ क्या हैं?
ये सिलेंडर 600 बार से अधिक के विस्फोट दबाव को सहन कर सकते हैं, जो नियामक आवश्यकताओं से काफी अधिक है। इनमें उन्नत मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम भी है जो रिसाव और कंपन की संभावना को न्यूनतम करता है।
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत से कैसे जुड़ी है?
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करने की रणनीति का हिस्सा है। स्थानीय कच्चे माल और स्वदेशी तकनीक के उपयोग से यह परियोजना प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में योगदान देगी।
इस परियोजना से सीएनजी वाहन उपयोगकर्ताओं को क्या लाभ मिलेगा?
हल्के टाइप-IV सिलेंडरों के उपयोग से वाहन की ईंधन दक्षता बेहतर होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। घरेलू उत्पादन बढ़ने से इन सिलेंडरों की लागत भी कम होने की संभावना है, जिसका सीधा लाभ सीएनजी वाहन मालिकों को मिल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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