14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रबी सीजन में तेलंगाना ने खरीदा 60 लाख टन धान, देशभर में बना नंबर-1 राज्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रबी सीजन में तेलंगाना ने खरीदा 60 लाख टन धान, देशभर में बना नंबर-1 राज्य

सारांश

रबी सीजन में तेलंगाना ने 60 लाख टन धान खरीदकर देशभर में पहला स्थान हासिल किया — यह केंद्र की 52 लाख टन की सीमा से भी अधिक है। देश की कुल खरीद का 60% अकेले इसी राज्य से आया है। मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, लेकिन FCI कोटे में कटौती पर केंद्र से टकराव भी उजागर किया।

मुख्य बातें

तेलंगाना ने यासांगी (रबी) सीजन में 60 लाख टन धान खरीदकर देशभर में शीर्ष स्थान हासिल किया।
देश की कुल रबी धान खरीद का लगभग 60% हिस्सा अकेले तेलंगाना से; खरीद पूरी होने पर यह 75% तक पहुँच सकता है।
केंद्र ने अधिकतम 52 लाख टन खरीद की सीमा तय की थी, जिसे राज्य पहले ही पार कर चुका है।
किसानों को MSP के रूप में ₹11,050 करोड़ सीधे खातों में हस्तांतरित; KMS 2025-26 में कुल खरीद-भुगतान गतिविधियाँ ₹39,300 करोड़ तक पहुँचीं।
राज्य ने 8,575 खरीद केंद्र , 13,000 परिवहन वाहन और 2 लाख से अधिक कर्मी तैनात किए।
FCI कोटे में कटौती को लेकर तेलंगाना सरकार ने केंद्र के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है।

तेलंगाना के सिंचाई एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने 29 मई 2025 को हैदराबाद में एक प्रेस वार्ता में दावा किया कि यासांगी (रबी) सीजन में धान खरीद के मामले में तेलंगाना ने 60 लाख टन का आँकड़ा पार कर लिया है और देशभर के सभी राज्यों में शीर्ष स्थान हासिल किया है। मंत्री के अनुसार, यह उपलब्धि राज्य की किसान-हितैषी नीतियों और सुदृढ़ खरीद तंत्र का प्रमाण है।

राज्यवार तुलना: तेलंगाना सबसे आगे

उत्तम कुमार रेड्डी ने आँकड़े पेश करते हुए बताया कि जहाँ आंध्र प्रदेश में लगभग 24 लाख टन, तमिलनाडु में 11-12 लाख टन, महाराष्ट्र में 3 लाख टन और केरल में करीब 2 लाख टन धान की खरीद हुई है, वहीं तेलंगाना ने इन सभी को पीछे छोड़ते हुए 60 लाख टन से अधिक खरीद दर्ज की है। उनके अनुसार, वर्तमान यासांगी सीजन में देशभर में खरीदे गए कुल धान का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले तेलंगाना से आया है और खरीद प्रक्रिया पूरी होने तक यह अनुपात 75 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।

केंद्र की सीमा से आगे निकला तेलंगाना

मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने तेलंगाना से अधिकतम 52 लाख टन धान खरीदने पर सहमति जताई थी, लेकिन राज्य पहले ही यह सीमा पार कर 60 लाख टन तक पहुँच चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2025-26 के यासांगी सीजन में 64.36 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती हुई, जिससे लगभग 141 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। गौरतलब है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पहले खरीद प्रक्रिया को तेज़ गति से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

खरीद तंत्र और किसान भुगतान

खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए राज्य सरकार ने 8,575 खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। करीब 13,000 परिवहन वाहन तैनात किए गए हैं और दो लाख से अधिक कर्मियों को खरीद, परिवहन व लॉजिस्टिक्स कार्यों में लगाया गया है। किसानों के खातों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के रूप में अब तक ₹11,050 करोड़ सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं। खरीफ और यासांगी दोनों सीजन को मिलाकर KMS 2025-26 में खरीद और किसान भुगतान से जुड़ी गतिविधियों का कुल मूल्य लगभग ₹39,300 करोड़ तक पहुँच गया है।

बेमौसम बारिश और किसान राहत

हाल ही में हुई बेमौसम बारिश का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने किसानों को नुकसान से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए। विशेष व्यवस्था के तहत बारिश से भीगे 10,214 टन धान को उबले चावल (बॉयल्ड राइस) मिलों तक पहुँचाया गया, जिससे प्रभावित किसानों को बिना किसी परेशानी के MSP का लाभ मिल सका। उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा, 'सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि खराब मौसम के कारण किसी भी किसान को नुकसान न उठाना पड़े और खरीद प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रहे।'

केंद्र से तनाव और आगे की राह

केंद्र की खरीद नीति पर चिंता जताते हुए मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद तेलंगाना में धान उत्पादन लगातार बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से केंद्र द्वारा स्वीकार किए जाने वाले चावल की मात्रा कम की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री और उन्होंने कई बार केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य केंद्रीय पूल के लिए FCI को चावल उपलब्ध कराने में भी देशभर में अग्रणी होने का दावा कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक अनसुलझा तनाव है — केंद्र सरकार FCI के माध्यम से स्वीकृत चावल की मात्रा घटा रही है, जबकि तेलंगाना का उत्पादन बढ़ रहा है। यह विरोधाभास राज्य के किसानों के लिए दीर्घकालिक जोखिम पैदा करता है: यदि केंद्रीय खरीद सीमा नहीं बढ़ी, तो अधिशेष उत्पादन का बोझ अंततः राज्य सरकार या किसानों पर पड़ेगा। मंत्री का 'ऐतिहासिक उपलब्धि' का दावा तब तक अधूरा है जब तक केंद्र-राज्य खरीद असंतुलन का स्थायी समाधान नहीं निकलता।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना ने रबी सीजन में कितनी धान खरीद की और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
तेलंगाना ने यासांगी (रबी) सीजन 2025-26 में 60 लाख टन से अधिक धान खरीदी, जो देश के किसी भी अन्य राज्य से अधिक है। यह देश की कुल रबी धान खरीद का लगभग 60% है, जो राज्य को भारत की खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला में केंद्रीय भूमिका में रखता है।
केंद्र सरकार ने तेलंगाना के लिए कितनी धान खरीद की सीमा तय की थी?
केंद्र सरकार ने तेलंगाना से अधिकतम 52 लाख टन धान खरीदने पर सहमति जताई थी। राज्य इस सीमा को पार कर 60 लाख टन तक पहुँच चुका है, जिससे केंद्र-राज्य के बीच खरीद नीति को लेकर तनाव उत्पन्न हुआ है।
तेलंगाना के किसानों को MSP भुगतान कितना मिला है?
मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी के अनुसार, किसानों के खातों में अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के रूप में ₹11,050 करोड़ सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं। खरीफ और यासांगी दोनों सीजन मिलाकर KMS 2025-26 में कुल गतिविधियों का मूल्य लगभग ₹39,300 करोड़ है।
बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए क्या व्यवस्था की गई?
सरकार ने विशेष व्यवस्था के तहत बारिश से भीगे 10,214 टन धान को उबले चावल (बॉयल्ड राइस) मिलों तक पहुँचाया, जिससे प्रभावित किसानों को बिना नुकसान के MSP का लाभ मिल सका। मंत्री ने आश्वासन दिया कि खरीद प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
तेलंगाना की धान खरीद में अन्य दक्षिणी राज्यों से तुलना कैसी है?
मंत्री द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में लगभग 24 लाख टन, तमिलनाडु में 11-12 लाख टन, महाराष्ट्र में 3 लाख टन और केरल में करीब 2 लाख टन धान खरीद हुई — जबकि तेलंगाना 60 लाख टन के साथ इन सभी से कहीं आगे है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले