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टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग में अगले 10 वर्षों में 1.4 करोड़ कुशल कर्मचारियों की होगी ज़रूरत: रिपोर्ट

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टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग में अगले 10 वर्षों में 1.4 करोड़ कुशल कर्मचारियों की होगी ज़रूरत: रिपोर्ट

सारांश

भारत के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग में अगले 10 वर्षों में 1.4 करोड़ अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की माँग होगी। 2030 तक बाज़ार 150 अरब डॉलर और रोज़गार 6 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। भारत-यूके FTA से नए निर्यात अवसर और AI अपस्किलिंग इस विकास की धुरी बनेंगे।

मुख्य बातें

भारत के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को अगले 10 वर्षों में करीब 1.4 करोड़ अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की ज़रूरत होगी।
वर्तमान में क्षेत्र 4.6 करोड़ लोगों को रोज़गार देता है; 2030 तक यह संख्या 6 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान।
भारत का अपैरल बाज़ार 2030 तक 130–150 अरब डॉलर और 10–12% CAGR से बढ़ने की संभावना।
भारत-यूके FTA को निर्यात के नए अवसर खोलने वाला अहम कदम बताया गया।
AI और उभरती तकनीकों में अपस्किलिंग को प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए अनिवार्य बताया गया।
AMHSSC स्किल गैप स्टडी और उद्योग परामर्श के ज़रिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करेगा।

भारत के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को अगले 10 वर्षों में करीब 1.4 करोड़ अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता होगी — यह निष्कर्ष 23 जुलाई 2026 को जारी एक उद्योग रिपोर्ट में सामने आया है। घरेलू और वैश्विक बाज़ार में बढ़ते अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए यह कार्यबल विस्तार अनिवार्य बताया गया है। यह रिपोर्ट अपैरल, मेड-अप्स एंड होम फर्निशिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (AMHSSC) द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं के बीच साझा की गई।

मौजूदा स्थिति और रोज़गार का लक्ष्य

आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत का टेक्सटाइल और अपैरल क्षेत्र लगभग 4.6 करोड़ लोगों को रोज़गार देता है, जो इसे कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता क्षेत्र बनाता है। सरकार और उद्योग के संयुक्त अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में रोज़गार बढ़कर करीब 6 करोड़ तक पहुँच सकता है।

यह वृद्धि तभी संभव होगी जब कार्यबल को समय रहते कुशल बनाया जाए। गौरतलब है कि भारत वैश्विक टेक्सटाइल आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में यह स्किल गैप एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।

बाज़ार का विस्तार और विकास दर

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का अपैरल बाज़ार वर्ष 2030 तक 130 से 150 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। इस अवधि में बाज़ार में 10 से 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) रहने की संभावना है।

यह वृद्धि मुख्यतः उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, विभिन्न अवसरों के लिए नए उत्पादों की माँग, फैशन ट्रेंड और बेहतर मूल्य वाले उत्पादों की ओर बढ़ते रुझान से प्रेरित होगी। नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) — विशेषकर भारत-यूके FTA — से भी निर्यात के नए द्वार खुलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों की राय

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार मनीषा सेनसरमा ने कहा कि भारत के कार्यबल का भविष्य सरकार और उद्योग के बीच मज़बूत साझेदारी पर निर्भर करता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि उद्योग को स्किल की ज़रूरतों की पहचान करने, पाठ्यक्रम तैयार करने, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और पीएम सेतु पहल के तहत आईटीआई को उन्नत बनाने में प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए।

सेनसरमा ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती तकनीकों में लगातार अपस्किलिंग उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अनिवार्य होगी।

AMHSSC के चेयरमैन प्रेमल उदानी ने कहा कि नए FTAs से उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे कुशल कर्मचारियों की माँग तेज़ी से बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि स्किल गैप स्टडी और उद्योग परामर्श के ज़रिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वास्तविक ज़रूरतों के अनुरूप ढाला जाएगा।

AMHSSC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष श्रीवास्तव ने भारत-यूके FTA को टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, इससे भारतीय निर्माताओं को नए निर्यात अवसर मिलेंगे और वैश्विक बाज़ार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और मज़बूत होगी।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात में चीन और बांग्लादेश से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। स्किल इकोसिस्टम को लचीला और उद्योग-केंद्रित बनाना इस प्रतिस्पर्धा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। कार्यशाला में भाग लेने वाले निर्यातकों, मैन्युफैक्चरर्स और ट्रेनिंग पार्टनर्स ने मिलकर एक साझा रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि स्किल डेवलपमेंट का ढाँचा इस माँग को पूरा करने में कितना सक्षम है। भारत में ITI और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों की गुणवत्ता और उद्योग-प्रासंगिकता को लेकर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। भारत-यूके FTA एक वास्तविक अवसर है, लेकिन बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत की श्रम उत्पादकता और लीड-टाइम अभी भी चुनौती बने हुए हैं। बिना सत्यापन-योग्य प्रशिक्षण परिणामों और उद्योग-संस्थान समन्वय के, यह रिपोर्ट महज़ एक आकाँक्षी दस्तावेज़ बनकर रह सकती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग में कितनी नई नौकरियाँ आएंगी?
रिपोर्ट के अनुसार, अगले 10 वर्षों में इस क्षेत्र में करीब 1.4 करोड़ अतिरिक्त कुशल कर्मचारियों की ज़रूरत होगी। वर्तमान में 4.6 करोड़ लोग इस क्षेत्र में कार्यरत हैं और 2030 तक यह संख्या 6 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
2030 तक भारत का अपैरल बाज़ार कितना बड़ा होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का अपैरल बाज़ार 2030 तक 130 से 150 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। इस दौरान 10 से 12 प्रतिशत की CAGR रहने की संभावना है, जो उपभोक्ता माँग और फैशन ट्रेंड से प्रेरित होगी।
AMHSSC क्या है और इस रिपोर्ट में इसकी भूमिका क्या है?
AMHSSC यानी अपैरल, मेड-अप्स एंड होम फर्निशिंग सेक्टर स्किल काउंसिल एक उद्योग-संचालित संस्था है जो इस क्षेत्र में कौशल विकास की दिशा तय करती है। इसी परिषद ने वह कार्यशाला आयोजित की जिसमें यह रिपोर्ट और स्किल गैप के आँकड़े साझा किए गए।
भारत-यूके FTA का टेक्सटाइल उद्योग पर क्या असर होगा?
AMHSSC के CEO आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, भारत-यूके FTA भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल निर्माताओं के लिए नए निर्यात अवसर खोलेगा और वैश्विक बाज़ार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करेगा।
स्किल गैप को पाटने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार मनीषा सेनसरमा ने कहा कि उद्योग को पाठ्यक्रम निर्माण, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना और पीएम सेतु पहल के तहत ITI उन्नयन में भूमिका निभानी होगी। AI और उभरती तकनीकों में अपस्किलिंग को भी अनिवार्य बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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