भारत के अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 हॉवित्जर को अमेरिका का ₹4,000 करोड़ का सपोर्ट पैकेज मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका ने 22 जून 2026 को भारत के एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों और एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के लिए कुल 482.2 मिलियन डॉलर (लगभग ₹4,000 करोड़) के रखरखाव और तकनीकी सपोर्ट पैकेज को औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी और युद्धक क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करना है।
मंजूरी की प्रक्रिया और अधिसूचना
अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA), जो विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) कार्यक्रम का संचालन करती है, ने इस प्रस्तावित बिक्री की अधिसूचना फेडरल रजिस्टर में जारी की। इससे पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले महीने संभावित बिक्री की जानकारी अमेरिकी कांग्रेस को दी थी। यह कदम भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की बढ़ती गहराई का संकेत है।
दो अलग पैकेजों का विवरण
अधिसूचना के अनुसार, एम777ए2 हॉवित्जर सपोर्ट पैकेज की अनुमानित लागत 230 मिलियन डॉलर है। इसमें सहायक उपकरण, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत सेवाएँ, प्रशिक्षण, फील्ड सर्विस प्रतिनिधि, डिपो-स्तरीय क्षमता और अन्य लॉजिस्टिक सहायता शामिल हैं।
वहीं, अपाचे हेलीकॉप्टर सपोर्ट पैकेज की अनुमानित लागत 198.2 मिलियन डॉलर है। इस पैकेज में अमेरिकी सरकार और ठेकेदारों द्वारा इंजीनियरिंग, तकनीकी एवं लॉजिस्टिक सहायता सेवाएँ, तकनीकी प्रकाशन और कर्मियों का प्रशिक्षण शामिल है।
प्रमुख ठेकेदार
अपाचे हेलीकॉप्टर कार्यक्रम के प्रमुख ठेकेदार अमेरिकी कंपनियाँ बोइंग और लॉकहीड मार्टिन होंगी। एम777 हॉवित्जर सपोर्ट कार्यक्रम के लिए यूनाइटेड किंगडम स्थित बीएई सिस्टम्स प्रमुख ठेकेदार की भूमिका निभाएगी।
भारत की रणनीतिक जरूरत
भारत ने एम777ए2 तोपों को FMS कार्यक्रम के तहत शामिल किया था। ये तोपें विशेष रूप से ऊँचाई वाले और पहाड़ी क्षेत्रों में तोपखाना क्षमता बढ़ाने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं — जो उत्तरी सीमाओं पर भारत की रणनीतिक प्राथमिकता है। गौरतलब है कि यह सपोर्ट पैकेज मूल खरीद के बाद दीर्घकालिक परिचालन तैयारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
अमेरिका का रणनीतिक रुख
अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप है। विभाग के अनुसार, 'यह प्रस्तावित बिक्री भारत की मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाएगी, उसकी घरेलू सुरक्षा को मजबूत करेगी और क्षेत्रीय खतरों को रोकने में मदद करेगी।' यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रही है और भारत अपनी सैन्य आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सहयोगी देशों से तकनीकी सहायता भी सुनिश्चित कर रहा है।