US FDA ने डाबर इंडिया के दादरा प्लांट में डेटा हेराफेरी और सूक्ष्मजीवी खामियाँ पकड़ीं
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US FDA) ने दादरा और नगर हवेली स्थित डाबर इंडिया की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में गंभीर विनिर्माण, रखरखाव और डेटा इंटीग्रिटी संबंधी खामियाँ उजागर की हैं। FDA की निरीक्षण रिपोर्ट में संभावित सूक्ष्मजीवी अशुद्धि, मैन्युफैक्चरिंग मानकों की अनदेखी और कथित डेटा हेराफेरी का उल्लेख किया गया है — जो भारतीय दवा व स्वास्थ्य उत्पाद उद्योग के लिए बढ़ती अमेरिकी नियामकीय सख्ती के बीच एक गंभीर चेतावनी है।
मुख्य खामियाँ क्या पाई गईं
FDA निरीक्षकों ने डाबर के इस संयंत्र में उपकरण सफाई, रखरखाव और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं में कई कमियाँ दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार, पैकेजिंग सामग्री के निकट स्थित कच्चे माल के गोदाम में एक जीवित पक्षी और पक्षी की बीट मिली। इसके अलावा, कच्चे माल और तैयार उत्पाद भंडारण क्षेत्रों की छत की सतहों पर एक अज्ञात काला पदार्थ भी देखा गया।
डेटा इंटीग्रिटी पर गंभीर आरोप
निरीक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मैन्युफैक्चरिंग डेटा में कथित तौर पर हेराफेरी की गई, ताकि उन उपकरणों का उपयोग छिपाया जा सके जिन्हें उनके निर्धारित उत्पादों के अलावा अन्य उत्पादों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। FDA ने संयंत्र में किए गए सूक्ष्मजीवविज्ञानी परीक्षण की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए — आधिकारिक डेटा में नमूने निर्धारित सुरक्षा सीमाओं के भीतर दर्शाए गए थे, जबकि निरीक्षण के दौरान कई नमूनों में अशुद्धि पाई गई।
प्रबंधन की चूक भी रेखांकित
रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया है कि कंपनी प्रबंधन ने बाज़ार में उत्पाद आपूर्ति शुरू करने से पहले उत्पादन और गुणवत्ता संबंधी रिकॉर्ड की पर्याप्त समीक्षा नहीं की, जिससे नियामकीय अनुपालन में संभावित चूक हुई। यह निष्कर्ष FDA के फॉर्म 483 के तहत दर्ज किए गए हैं।
डाबर की प्रतिक्रिया और आगे की प्रक्रिया
भारत की सबसे पुरानी उपभोक्ता वस्तु कंपनियों में से एक और अमेरिकी बाज़ार में आयुर्वेदिक व ओवर-द-काउंटर स्वास्थ्य उत्पादों की प्रमुख आपूर्तिकर्ता डाबर इंडिया ने अब तक FDA की इन टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। FDA द्वारा फॉर्म 483 जारी होने के बाद संबंधित कंपनियों को आमतौर पर निरीक्षण में पाई गई कमियों को दूर करने के लिए एक सुधारात्मक कार्य योजना प्रस्तुत करनी होती है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय दवा और स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद निर्माता अमेरिकी नियामकों की बढ़ती जाँच का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कई भारतीय फार्मा कंपनियों को FDA की चेतावनी पत्र और आयात प्रतिबंध झेलने पड़े हैं। डाबर के इस मामले की गंभीरता इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसमें डेटा इंटीग्रिटी का उल्लंघन शामिल है — जिसे FDA सबसे गंभीर श्रेणी की खामी मानता है।