वेल्लोर का 100 साल पुराना पोइगई पशु बाजार आचार संहिता से प्रभावित, व्यापार में गिरावट
सारांश
Key Takeaways
- पैसे की सीमा के कारण व्यापार में गिरावट
- आचार संहिता की सख्ती ने कारोबार को प्रभावित किया
- व्यापारियों की संख्या में कमी
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव
- राहत उपायों की आवश्यकता
वेल्लोर, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के पास स्थित पोइगई का एक सदी पुराना साप्ताहिक पशु बाजार इस समय कठिनाइयों का सामना कर रहा है। विधानसभा चुनावों से पहले लागू हुई आचार संहिता ने इस पारंपरिक बाजार की गतिविधियों को काफी प्रभावित किया है।
यह बाजार, जो चेन्नई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट पोइगई बस स्टैंड के पास स्थित है, वेल्लोर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। यहां हर मंगलवार हजारों व्यापारी एकत्र होते हैं और बड़ी संख्या में पशुओं की खरीद-फरोख्त होती है। सामान्यतः, एक दिन में 2,000 से अधिक व्यापारी आते थे और लगभग 1,500 पशुओं की बिक्री होती थी, जिससे करोड़ों रुपए का कारोबार होता था।
हालांकि, आचार संहिता के लागू होने के बाद नकद ले जाने की सीमा 50,000 रुपए निर्धारित की गई है, जिससे इस बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ा है। हाल ही में पहले बाजार दिन पर इसका असर स्पष्ट रूप से देखा गया, जहां व्यापारियों की संख्या में कमी आई और पशुओं की आवक भी घट गई।
इस बाजार की गतिविधियां मुख्यतः नकद लेनदेन पर निर्भर हैं, इसीलिए कड़ी निगरानी और जांच ने व्यापार को और भी कठिन बना दिया है। फ्लाइंग स्क्वाड और निगरानी टीमें लगातार जांच कर रही हैं और बिना हिसाब-किताब के नकद लेनदेन पर कार्रवाई की जा रही है, जिससे व्यापारियों और खरीदारों के बीच भय का माहौल बना हुआ है।
व्यापारियों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में कारोबार में लगभग 30 प्रतिशत तक गिरावट आई है। इसके अलावा, कई लोग डिजिटल भुगतान के आदी नहीं हैं, जिससे वे नए विकल्पों को अपनाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
यह बाजार केवल वेल्लोर तक सीमित नहीं है, बल्कि तिरुपत्तूर, रानीपेट, धर्मपुरी और कृष्णागिरी जैसे आसपास के जिलों से भी व्यापारी यहां आते थे। अब अंतर-जिला और अंतरराज्यीय सीमाओं पर कड़ी जांच के कारण बाहरी व्यापारियों की संख्या भी घट गई है।
इस स्थिति ने पशु व्यापार से जुड़े व्यक्तियों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह बाजार उनकी आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है। आने वाले हफ्तों में भी चुनावी प्रतिबंधों के जारी रहने की संभावना है, जिससे व्यापार पर निरंतर प्रभाव बने रहने की आशंका है।
ऐसे में व्यापारियों और संबंधित व्यक्तियों ने मांग की है कि चुनावी नियमों का पालन करते हुए वैध व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुछ राहत उपाय किए जाएं, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव न पड़े।