22 जुलाई 2026
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विशाखापत्तनम फिर बना नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट में नंबर-1, लिंक्डइन रिपोर्ट में खुलासा

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विशाखापत्तनम फिर बना नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट में नंबर-1, लिंक्डइन रिपोर्ट में खुलासा

सारांश

लिंक्डइन की ताज़ा रिपोर्ट में विशाखापत्तनम ने भारत के नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट में फिर बाज़ी मारी। पोर्ट-फार्मा की बुनियाद पर AI और डेटा सेंटर निवेश जुड़ने से यह शहर मल्टी-सेक्टर करियर हब बन रहा है — ऐसे वक्त में जब 76% प्रोफेशनल्स नौकरी पाना पहले से कठिन मान रहे हैं।

मुख्य बातें

विशाखापत्तनम ने 22 जुलाई 2026 को जारी लिंक्डइन रिपोर्ट में भारत के नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट में फिर पहला स्थान हासिल किया।
शीर्ष पाँच में लुधियाना , सूरत , वडोदरा और प्रयागराज भी शामिल हैं।
भारत में 72% प्रोफेशनल्स इस साल नई नौकरी की तलाश में हैं; 76% का कहना है कि AI स्किल गैप के कारण नौकरी पाना कठिन हुआ है।
2022 की शुरुआत की तुलना में प्रत्येक नौकरी के लिए आवेदकों की संख्या दोगुने से अधिक हो चुकी है।
इन शहरों में पोर्ट, फार्मा, टेक्सटाइल जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ AI, डेटा सेंटर और IT में भी बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है।

विशाखापत्तनम ने एक बार फिर भारत के नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट में शीर्ष स्थान हासिल किया है — सबसे तेज़ हायरिंग गतिविधि और प्रोफेशनल माइग्रेशन के मामले में यह शहर देश के बाकी गैर-महानगरीय केंद्रों से आगे निकल गया है। 22 जुलाई 2026 को जारी लिंक्डइन की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

शीर्ष पाँच नॉन-मेट्रो शहर

रिपोर्ट के अनुसार, विशाखापत्तनम के बाद लुधियाना, सूरत, वडोदरा और प्रयागराज शीर्ष पाँच स्थानों पर काबिज़ हैं। ये शहर अब केवल एक या दो पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि मल्टी-सेक्टर जॉब हब के रूप में तेज़ी से उभर रहे हैं।

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि इन शहरों में टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज़, मैन्युफैक्चरिंग, एजुकेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश की रफ़्तार उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

नौकरी बाज़ार की मौजूदा चुनौतियाँ

रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, भारत में 72 प्रतिशत प्रोफेशनल्स इस वर्ष नई नौकरी की तलाश में हैं। वहीं 76 प्रतिशत का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते स्किल गैप और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण नौकरी पाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब 2022 की शुरुआत के मुकाबले प्रत्येक नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या दोगुने से अधिक हो चुकी है। इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच नॉन-मेट्रो शहर प्रोफेशनल्स को उनके घर के करीब ही विविध उद्योगों और बेहतर करियर विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

लिंक्डइन की करियर एक्सपर्ट और इंडिया सीनियर मैनेजिंग एडिटर नीरजिता बनर्जी ने कहा कि इन शहरों में पारंपरिक उद्योगों के साथ अब टेक्नोलॉजी, फाइनेंशियल सर्विसेज़, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्टर भी तेज़ी से जुड़ रहे हैं।

बनर्जी ने नौकरी तलाश रहे लोगों को सलाह दी कि वे यह समझें कि कंपनियाँ किन क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं, कौन-से सेक्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं और उनकी मौजूदा स्किल्स किन अन्य उद्योगों में भी उपयोगी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि केवल मेट्रो शहरों तक सीमित रहने के बजाय उभरते शहरों और उनसे जुड़े नए रोल्स पर भी ध्यान देना चाहिए।

शहर-दर-शहर तस्वीर

विशाखापत्तनम अपनी पोर्ट, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग आधारित अर्थव्यवस्था को AI, डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी निवेश के साथ और मज़बूत कर रहा है। लुधियाना अपने पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ-साथ स्टील, एविएशन और हॉस्पिटैलिटी में भी विस्तार कर रहा है।

सूरत अब टेक्सटाइल और डायमंड उद्योग से आगे बढ़कर स्टार्टअप, एक्सपोर्ट और रियल एस्टेट में तेज़ी से पाँव पसार रहा है। वडोदरा में केमिकल्स और मशीनरी उद्योगों के साथ-साथ टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और एंटरप्राइज़ निवेश भी उल्लेखनीय गति से बढ़ रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे दौर में आई है जब भारत की कार्यशील आबादी का एक बड़ा हिस्सा महानगरों की ओर पलायन की जगह अपने गृह राज्यों के नज़दीकी शहरों में अवसर तलाशने लगा है। नॉन-मेट्रो शहरों में बढ़ता निवेश और बेहतर होती कनेक्टिविटी इस बदलाव को और गति दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्वतंत्र आर्थिक केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। हालाँकि रिपोर्ट हायरिंग गतिविधि और माइग्रेशन के आँकड़े देती है, असली सवाल यह है कि इन शहरों में बन रहे रोज़गार की गुणवत्ता और वेतन स्तर मेट्रो शहरों से कितना पीछे हैं। 76% प्रोफेशनल्स का नौकरी को कठिन बताना और आवेदकों की संख्या का दोगुना होना दर्शाता है कि माँग और आपूर्ति के बीच की खाई अभी भी चौड़ी है — नॉन-मेट्रो विस्तार इसे पाट सकता है, लेकिन केवल तभी जब स्किल डेवलपमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर भी उसी रफ़्तार से बढ़े।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लिंक्डइन रिपोर्ट में विशाखापत्तनम नंबर-1 नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट क्यों बना?
विशाखापत्तनम ने सबसे तेज़ हायरिंग गतिविधि और प्रोफेशनल माइग्रेशन के आधार पर यह स्थान हासिल किया है। शहर की पोर्ट, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग आधारित अर्थव्यवस्था में अब AI, डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी निवेश भी जुड़ रहा है, जिससे यह एक मल्टी-सेक्टर जॉब हब बन गया है।
भारत के शीर्ष नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट कौन-से हैं?
22 जुलाई 2026 को जारी लिंक्डइन रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष पाँच नॉन-मेट्रो जॉब मार्केट हैं — विशाखापत्तनम, लुधियाना, सूरत, वडोदरा और प्रयागराज। ये सभी शहर पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नए सेक्टरों में भी तेज़ी से विस्तार कर रहे हैं।
भारत में नौकरी ढूँढना इतना कठिन क्यों हो गया है?
लिंक्डइन रिपोर्ट के अनुसार, 76% प्रोफेशनल्स मानते हैं कि AI से जुड़े बढ़ते स्किल गैप और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण नौकरी पाना कठिन हुआ है। 2022 की शुरुआत की तुलना में प्रत्येक नौकरी के लिए आवेदकों की संख्या दोगुने से अधिक हो चुकी है।
नॉन-मेट्रो शहरों में कौन-से सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहे हैं?
इन शहरों में पोर्ट, टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ AI, डेटा सेंटर, IT, फाइनेंशियल सर्विसेज़ और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। सूरत स्टार्टअप और रियल एस्टेट में, तो वडोदरा टेक्नोलॉजी और एंटरप्राइज़ निवेश में आगे बढ़ रहा है।
नौकरी तलाश रहे प्रोफेशनल्स को नॉन-मेट्रो शहरों में क्या करना चाहिए?
लिंक्डइन की करियर एक्सपर्ट नीरजिता बनर्जी के अनुसार, प्रोफेशनल्स को यह समझना चाहिए कि कंपनियाँ किन क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं और उनकी मौजूदा स्किल्स किन अन्य उद्योगों में उपयोगी हो सकती हैं। केवल मेट्रो शहरों तक सीमित न रहकर उभरते शहरों के नए रोल्स पर ध्यान देने से मज़बूत करियर अवसर मिल सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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