अनु मलिक का खुलासा: धर्मेंद्र को 'पल पल ना माने टिंकू जिया' था सबसे पसंदीदा गाना
सारांश
मुख्य बातें
संगीतकार और गायक अनु मलिक ने खुलासा किया है कि दिवंगत दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को उनका फिल्म 'यमला पगला दीवाना' का गाना 'पल पल ना माने टिंकू जिया' बेहद पसंद था। राष्ट्र प्रेस के साथ एक विशेष बातचीत में मलिक ने बॉलीवुड के 'ही-मैन' के साथ अपनी गहरी दोस्ती और संगीत के प्रति उनके लगाव को याद किया।
धर्मेंद्र और अनु मलिक का खास रिश्ता
अनु मलिक ने बताया कि धर्मेंद्र के साथ उनका नाता हमेशा अपनेपन से भरा रहा। उन्होंने कहा, 'धर्म जी के साथ मेरा रिश्ता हमेशा से बहुत अपनापन भरा रहा है।' मलिक के अनुसार, धर्मेंद्र उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानते थे और दोनों अक्सर मिलते रहते थे।
गौरतलब है कि अनु मलिक का देओल परिवार के साथ पुराना संगीत-संबंध रहा है। उन्होंने सनी देओल की दूसरी फिल्म 'सोहनी महिवाल' के लिए भी संगीत दिया था, जो इस जोड़ी के लंबे सहयोग की शुरुआत थी।
वह गाना जो धर्मेंद्र को भाया
अनु मलिक ने याद करते हुए कहा, 'मैंने एक बार एक मजेदार गाना बनाया था — 'पल पल ना माने टिंकू जिया' — और धर्म जी, जो खुद बहुत खुशमिजाज इंसान हैं, उन्हें वह गाना बहुत पसंद आया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि धर्मेंद्र को उनके सुरीले गाने भी उतने ही प्रिय थे।
यह ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में पुरानी पीढ़ी के कलाकारों और संगीतकारों के बीच के व्यक्तिगत संबंधों पर चर्चा फिर से जोर पकड़ रही है। मलिक का यह संस्मरण उस दौर की फिल्म-संस्कृति की झलक देता है जब संगीतकार और अभिनेता के बीच महज पेशेवर नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ते होते थे।
हेमा मालिनी के साथ भी रहा गहरा सहयोग
अनु मलिक ने अनुभवी अभिनेत्री हेमा मालिनी के साथ अपने जुड़ाव का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि पहली मुलाकात फिल्म 'मार्ग' से हुई, इसके बाद 'आवारगी' में भी साथ काम किया, जिसे हेमा मालिनी ने स्वयं प्रोड्यूस किया था।
मलिक ने कहा, 'जब मैं गाने कंपोज करता था, तो वह लगातार फीडबैक देती थीं। जब उनकी फिल्म 'एक चादर मैली सी' आई, तो उन्हें मेरा म्यूजिक बहुत पसंद आया।' उन्होंने हेमा मालिनी को 'सबसे खूबसूरत इंसान' बताते हुए उनकी सराहना की।
पुरानी यादें और श्रद्धा का भाव
अनु मलिक ने स्वीकार किया कि धर्मेंद्र की फिल्में देखते हुए वे बड़े हुए, इसलिए उनके सामने हमेशा श्रद्धा का भाव रहता था। उन्होंने बताया कि वे धर्मेंद्र से उनके किसी खास गाने की शूटिंग के बारे में पूछते थे, लेकिन धर्मेंद्र अक्सर मुस्कुराते हुए चुप रह जाते थे।
इस तरह के व्यक्तिगत संस्मरण न केवल बॉलीवुड के स्वर्णिम युग की झलक देते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि किस तरह संगीत और अभिनय के बीच का तालमेल उस दौर की फिल्मों को कालजयी बनाता था।