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नीट लाठीचार्ज पर दिलजीत दोसांझ का बड़ा बयान: 'सरकार छात्रों की मांग सुने'

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नीट लाठीचार्ज पर दिलजीत दोसांझ का बड़ा बयान: 'सरकार छात्रों की मांग सुने'

सारांश

नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद दिलजीत दोसांझ ने सरकार से छात्रों की मांग सुनने की अपील की। किसान आंदोलन के बाद एक बार फिर वे बोले — और कहा, 'देशविरोधी कहा जाएगा, तो भी बोलूंगा।'

मुख्य बातें

21 जुलाई को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम पर नोट साझा कर अधिकारियों से छात्रों की मांगें सुनने की अपील की।
दोसांझ ने स्वीकार किया कि किसान आंदोलन के समर्थन के कारण उन्हें पहले भी कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
अभिनेता सोनू सूद ने लिखा — 'छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।' अभिनेत्री आयशा अहमद ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और वहां मौजूद लोगों पर उन्हें गर्व है।

गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने 22 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक नोट साझा करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से छात्रों की मांगें सुनने की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार, 21 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित धांधली के विरोध में जुटे छात्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लिया, जिसके बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

दिलजीत दोसांझ की अपील

दोसांझ ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज में लिखा, 'जो हुआ, वह बहुत गलत था। छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे छात्रों की मांगों को सुनें। लोगों की आवाज ही भगवान की आवाज होती है।'

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह की बात रखने पर उन्हें फिर से 'देशविरोधी' कहा जा सकता है। उन्होंने लिखा, 'मुझे पहले भी देशविरोधी कहा जा चुका है और अब भी शायद ऐसा ही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं अभी बात भी नहीं कर सकता। अब आगे जो होगा, उसे भगवान ही संभालेंगे।'

यह ऐसे समय में आया है जब दोसांझ पहले भी किसान आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आए थे और उन्हें कथित तौर पर कानूनी दबाव का सामना करना पड़ा था।

अन्य कलाकारों की प्रतिक्रिया

अभिनेता सोनू सूद ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा, 'हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।'

अभिनेत्री आयशा अहमद ने इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत नोट जारी करते हुए कहा, 'प्रदर्शन के दौरान सामने आए दृश्य बहुत दुखद और दिल दहला देने वाले हैं। मेरे कुछ दोस्त वहां मौजूद थे, जिन्होंने बताया कि प्रदर्शन में लोग शांतिपूर्ण तरीके से सम्मान के साथ और अनुशासन में रहकर अपनी बात रख रहे थे। फिर भी जो कुछ हुआ, वह हो गया।'

आहमद ने आगे लिखा, 'मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि वहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति पर मुझे बहुत गर्व है। लंबे समय बाद पहली बार मुझे अपने देश के भविष्य को लेकर थोड़ी कम निराशा महसूस हो रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग खुद को 'राजनीति से दूर' रखते थे, उन्होंने भी अब अपनी आवाज उठाई है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद ने देशभर के लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों की उम्मीदों पर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों की मांग है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। कलाकारों की आवाज ने इस आंदोलन को व्यापक सामाजिक समर्थन दिलाया है।

क्या होगा आगे

छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, आंदोलन जारी रहेगा। दिलजीत दोसांझ जैसे प्रभावशाली चेहरों के समर्थन से यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसकी कीमत भी चुका रहे हैं। किसान आंदोलन के बाद कानूनी दबाव झेलने के बावजूद दोबारा बोलना यह दर्शाता है कि दांव ऊंचे हैं। असली सवाल यह है कि क्या इस तरह की सेलिब्रिटी आवाज़ें नीट सुधार की ठोस माँग को आगे बढ़ा पाएंगी, या यह सोशल मीडिया की क्षणिक लहर बनकर रह जाएगी — जबकि लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलजीत दोसांझ ने नीट लाठीचार्ज पर क्या कहा?
दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम पर नोट साझा कर कहा कि छात्रों के साथ जो हुआ वह 'बहुत गलत' था और अधिकारियों से उनकी मांगें सुनने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि बोलने पर उन्हें फिर 'देशविरोधी' कहा जा सकता है, लेकिन वे चुप नहीं रहेंगे।
जंतर-मंतर पर छात्र किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे?
छात्र नीट पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में कथित धांधली के खिलाफ 21 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
सोनू सूद और आयशा अहमद ने क्या प्रतिक्रिया दी?
अभिनेता सोनू सूद ने लिखा कि छात्रों को 'लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।' अभिनेत्री आयशा अहमद ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और उन्हें वहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति पर गर्व है।
दिलजीत दोसांझ ने किसान आंदोलन का ज़िक्र क्यों किया?
दोसांझ ने बताया कि किसान आंदोलन के समर्थन के कारण उन्हें पहले 'देशविरोधी' कहा गया और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। यह ज़िक्र उन्होंने यह बताने के लिए किया कि वे जानते हैं बोलने की कीमत क्या होती है, फिर भी वे चुप नहीं रहेंगे।
नीट प्रदर्शन को लेकर आगे क्या होने की संभावना है?
छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि सरकार द्वारा मांगें न माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रभावशाली हस्तियों के समर्थन से यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है और सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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