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सुमन कल्याणपुर की अंतिम विदाई: फिल्म-संगीत जगत रहा अनुपस्थित, सिर्फ सुरेश वाडकर पहुंचे

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सुमन कल्याणपुर की अंतिम विदाई: फिल्म-संगीत जगत रहा अनुपस्थित, सिर्फ सुरेश वाडकर पहुंचे

सारांश

पद्म भूषण सुमन कल्याणपुर को मुंबई में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, लेकिन दशकों तक जिस उद्योग को उन्होंने अपनी आवाज़ दी, वह उनके अंतिम संस्कार में लगभग अनुपस्थित रहा। सुरेश वाडकर की अकेली उपस्थिति ने एक असहज सवाल खड़ा किया — क्या बॉलीवुड अपने दिग्गजों को भुला देता है?

मुख्य बातें

पद्म भूषण पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार को लोखंडवाला, मुंबई में वृद्धावस्था के कारण हुआ।
अंतिम संस्कार पवन हंस श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ हुआ; पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटा गया।
फिल्म और संगीत उद्योग से केवल पार्श्व गायक सुरेश वाडकर श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को हुआ था; उन्होंने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़ और बंगाली सहित अनेक भाषाओं में गाया।
उनके परिवार में बेटी चारू हैं।

पद्म भूषण से सम्मानित पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का अंतिम संस्कार सोमवार, 2 जून 2025 को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया, किंतु फिल्म और संगीत उद्योग से केवल पार्श्व गायक सुरेश वाडकर ही उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे — शेष उद्योग उल्लेखनीय रूप से अनुपस्थित रहा।

अंतिम संस्कार का विवरण

रिपोर्टों के अनुसार, सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार को लोखंडवाला स्थित उनके आवास पर वृद्धावस्था के कारण हुआ। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू हैं, जो इस कठिन समय में उनके साथ थीं। सरकार की ओर से राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई उनके असाधारण योगदान की स्वीकृति थी, परंतु बॉलीवुड की अनुपस्थिति ने एक गहरी खामोशी छोड़ी।

संगीत जगत की अनुपस्थिति पर चर्चा

यह ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग अपने दिग्गजों के प्रति सम्मान प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। गायिका के अंतिम संस्कार में केवल सुरेश वाडकर की उपस्थिति ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि यह उद्योग की उन कलाकारों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है जिन्होंने दशकों तक इसकी नींव रखी।

सुमन कल्याणपुर का संगीत सफर

28 जनवरी 1937 को जन्मी सुमन कल्याणपुर ने 1950 और 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने शंकर-जयकिशन, ओ.पी. नैयर और कल्याणजी-आनंदजी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। मोहम्मद रफी के साथ उनके युगल गीत विशेष रूप से अमर हो गए।

गौरतलब है कि लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच हुए मतभेद के दौर में सुमन कल्याणपुर की माँग तेज़ी से बढ़ी, और उन्होंने उस अवसर का पूरा उपयोग अपनी प्रतिभा से किया। उनकी आवाज़ की मधुरता, स्पष्टता और भावनात्मक गहराई उन्हें समकालीनों से अलग करती थी।

बहुभाषी विरासत

सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़ और बंगाली सहित अनेक भारतीय भाषाओं में गीत गाए। उन्होंने भक्ति गीत और गज़लें भी गाईं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण हैं। प्लेबैक सिंगिंग के स्वर्णिम युग में दिग्गज समकालीनों की भीड़ में भी उन्होंने अपनी एक अलग और अमिट पहचान बनाई।

विरासत और आगे

भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित सुमन कल्याणपुर की आवाज़ आज भी लाखों संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है। उनके जाने से भारतीय शास्त्रीय और फिल्म संगीत की एक पूरी पीढ़ी का एक अमूल्य सूत्र टूट गया है। उनकी विरासत उनके गीतों में सदा जीवित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसने उन्हें विदाई देने की ज़हमत नहीं उठाई। यह पहली बार नहीं है कि किसी दिग्गज पार्श्व गायक को उद्योग ने उनके अंतिम समय में अकेला छोड़ा हो। सुरेश वाडकर की उपस्थिति सराहनीय है, पर यह सवाल भी उठाती है कि क्या फिल्म उद्योग के पास अपने स्वर्णिम युग के कलाकारों के प्रति कोई सामूहिक जिम्मेदारी बची है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुमन कल्याणपुर का निधन कब और कैसे हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार को मुंबई के लोखंडवाला स्थित उनके आवास पर वृद्धावस्था के कारण हुआ। वे 28 जनवरी 1937 को जन्मी थीं।
सुमन कल्याणपुर का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ?
उनका अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया था।
अंतिम संस्कार में फिल्म उद्योग से कौन उपस्थित रहे?
फिल्म और संगीत उद्योग से केवल पार्श्व गायक सुरेश वाडकर ही सुमन कल्याणपुर को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शेष उद्योग उल्लेखनीय रूप से अनुपस्थित रहा।
सुमन कल्याणपुर कौन थीं और उनकी संगीत विरासत क्या है?
सुमन कल्याणपुर भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित पार्श्व गायिकाओं में से एक थीं, जिन्होंने 1950 और 1960 के दशक में शंकर-जयकिशन, ओ.पी. नैयर और कल्याणजी-आनंदजी जैसे संगीतकारों के साथ काम किया। उन्होंने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़ और बंगाली सहित कई भाषाओं में गाया और उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
सुमन कल्याणपुर के परिवार में कौन हैं?
सुमन कल्याणपुर के परिवार में उनकी बेटी चारू हैं, जो उनके निधन के समय उनके साथ थीं।
राष्ट्र प्रेस
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