17 जुलाई 2026
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सुमन कल्याणपुर की अंतिम विदाई में केवल सुरेश वाडकर पहुँचे, फिल्म-संगीत जगत रहा अनुपस्थित

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सुमन कल्याणपुर की अंतिम विदाई में केवल सुरेश वाडकर पहुँचे, फिल्म-संगीत जगत रहा अनुपस्थित

सारांश

भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग की आवाज़ सुमन कल्याणपुर की अंतिम विदाई में पूरा फिल्म-संगीत जगत अनुपस्थित रहा — केवल सुरेश वाडकर पहुँचे। पद्म भूषण से सम्मानित इस दिग्गज गायिका के अंतिम संस्कार में उद्योग की यह चुप्पी एक पीड़ादायक सवाल छोड़ गई है।

मुख्य बातें

पद्म भूषण पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का सोमवार को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार हुआ।
फिल्म-संगीत उद्योग से केवल सुरेश वाडकर ही श्रद्धांजलि देने पहुँचे; बाकी उद्योग अनुपस्थित रहा।
गायिका का निधन रविवार को लोखंडवाला, मुंबई स्थित आवास पर वृद्धावस्था के कारण हुआ।
उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई; पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटा गया।
28 जनवरी 1937 को जन्मी कल्याणपुर ने 1950-60 के दशक में हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में गायन किया।
उन्होंने शंकर-जयकिशन , ओ.पी.
नैयर और कल्याणजी-आनंदजी जैसे संगीतकारों के साथ काम किया।

पद्म भूषण से सम्मानित वरिष्ठ पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का सोमवार, 2 जून 2026 को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। भारतीय फिल्म और संगीत उद्योग की इस दिग्गज हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए बड़े नामों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई — पार्श्व गायक सुरेश वाडकर ही उद्योग की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुँचे। गायिका को राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई और उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया।

निधन और अंतिम संस्कार

रिपोर्टों के अनुसार, सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार को मुंबई के लोखंडवाला स्थित उनके आवास पर वृद्धावस्था के कारण हुआ। उनके परिवार में उनकी बेटी चारू हैं। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के अलावा संगीत जगत की ओर से केवल सुरेश वाडकर की उपस्थिति दर्ज की गई।

स्वर्णिम करियर और संगीत विरासत

28 जनवरी 1937 को जन्मी सुमन कल्याणपुर ने 1950 और 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़ और बंगाली सहित कई भाषाओं में गीत गाए। उनकी आवाज़ की मधुरता, स्पष्टता और भावनात्मक गहराई उन्हें अपने समकालीनों से अलग करती थी।

उन्होंने शंकर-जयकिशन, ओ.पी. नैयर और कल्याणजी-आनंदजी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। मोहम्मद रफ़ी के साथ उनके युगल गीत विशेष रूप से लोकप्रिय हुए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हैं। भक्ति गीत और गज़लों में भी उनकी आवाज़ को सराहा गया।

उद्योग में उभार की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया जब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी के बीच रॉयल्टी विवाद के चलते उनके बीच सहयोग में अस्थायी विराम आया था। उस दौर में सुमन कल्याणपुर ने तेज़ी से प्रमुखता हासिल की और कई बड़े बैनरों की फिल्मों में पार्श्व गायन किया। गौरतलब है कि दिग्गज समकालीनों के बीच अपनी बहुमुखी प्रतिभा और त्रुटिहीन शैली के ज़रिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाए रखी।

उद्योग की अनुपस्थिति पर प्रतिक्रिया

जिस गायिका ने दशकों तक हिंदी सिनेमा को अपनी आवाज़ दी, उनकी अंतिम विदाई में फिल्म और संगीत जगत की व्यापक अनुपस्थिति ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। सुरेश वाडकर की एकल उपस्थिति को उद्योग की ओर से एकमात्र प्रतिनिधित्व माना जा रहा है। यह घटना उस पीढ़ी के कलाकारों के साथ उद्योग के व्यवहार पर सवाल उठाती है, जिन्होंने भारतीय फिल्म संगीत की नींव रखी।

विरासत और स्मरण

सुमन कल्याणपुर को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था — भारत का यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान उनके संगीत के प्रति अतुलनीय योगदान का प्रमाण है। भारतीय फिल्म संगीत के प्रशंसक आज भी उनके गीतों को जीवित रखे हुए हैं। उनके जाने से एक ऐसे युग का अंत हो गया जब गायन में तकनीक नहीं, आत्मा बोलती थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे अंतिम विदाई देने के लिए पूरा उद्योग नहीं जुटा — यह विस्मृति संस्थागत कृतघ्नता की ओर इशारा करती है। पद्म भूषण जैसे सर्वोच्च सम्मान के बावजूद यह उदासीनता बताती है कि भारतीय मनोरंजन उद्योग में विरासत का सम्मान अक्सर जीवनकाल तक ही सीमित रहता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुमन कल्याणपुर का निधन कब और कैसे हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार को मुंबई के लोखंडवाला स्थित उनके आवास पर वृद्धावस्था के कारण हुआ। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को पवन हंस श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
सुमन कल्याणपुर के अंतिम संस्कार में फिल्म उद्योग से कौन पहुँचा?
फिल्म और संगीत उद्योग से केवल पार्श्व गायक सुरेश वाडकर ही अंतिम संस्कार में श्रद्धांजलि देने पहुँचे। बाकी उद्योग की व्यापक अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई है।
सुमन कल्याणपुर कौन थीं और उनकी विरासत क्या है?
सुमन कल्याणपुर 1950-60 के दशक की प्रमुख पार्श्व गायिका थीं, जिन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़ और बंगाली सहित कई भाषाओं में गीत गाए और शंकर-जयकिशन, ओ.पी. नैयर जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया।
सुमन कल्याणपुर का जन्म कब हुआ था?
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को हुआ था। उन्होंने भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग में अपनी पहचान बनाई।
सुमन कल्याणपुर को राजकीय सम्मान क्यों दिया गया?
सुमन कल्याणपुर को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाज़ा गया था, जो भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान की मान्यता थी। इसी सम्मान के मद्देनज़र उन्हें तिरंगे में लपेटकर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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