सुमन कल्याणपुर के निधन पर सुरेश वाडकर की श्रद्धांजलि: '3,000 गीतों का भंडार पीढ़ियों को सिखाता रहेगा'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शास्त्रीय और फिल्मी संगीत की अप्रतिम आवाज़ सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई में 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि सुमन जी ने गीतों का जो विशाल भंडार छोड़ा है, वह आने वाली पीढ़ियों को गायकी की बारीकियाँ सिखाता रहेगा।
सुरेश वाडकर की भावभीनी श्रद्धांजलि
मीडिया से बात करते हुए सुरेश वाडकर ने सुमन कल्याणपुर के निधन को संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा, 'सुमन कल्याणपुर का जाना बेहद दुखद घटना है। उन्होंने अपने लंबे करियर में ऐसे हज़ारों गीत गाए हैं, जो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं और आने वाले समय में भी गूंजते रहेंगे। बचपन से ही हम उनके गीत सुनते हुए बड़े हुए हैं और उनकी गायकी से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। उनकी आवाज़ में एक अलग मिठास और सादगी थी, जो सीधे लोगों के दिलों तक पहुँचती थी।'
वाडकर ने आगे कहा, 'सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी, और गुजराती सहित कई भाषाओं में गाने गाए और हर भाषा में अपनी अलग पहचान बनाई। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहीं। उनके गीतों ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को जोड़ने का काम किया। वे बेहद विनम्र स्वभाव की थीं और हमेशा सभी से प्यार और सम्मान के साथ मिलती थीं।'
उन्होंने अपनी बात इन शब्दों में समाप्त की: 'वह अपने पीछे गीतों का एक विशाल भंडार छोड़कर गई हैं। उनके गाए हुए गीत आने वाली पीढ़ियों को गायकी की बारीकियाँ सीखने में मदद करेंगे और उन्हें प्रेरणा देंगे। मेरी भगवान से प्रार्थना है कि सुमन जी की आत्मा को शांति मिले।'
अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
सोमवार, 2 जून को मुंबई के सांताक्रुज स्थित पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में प्रशंसक, कलाकार और शुभचिंतक उपस्थित रहे, जिन्होंने नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
सुमन कल्याणपुर की संगीत विरासत
सुमन कल्याणपुर ने अपने करियर में हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती, असमी, कन्नड़ और अनेक अन्य भाषाओं में 3,000 से अधिक गीत गाए। 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'ना ना करते प्यार तुम्हीं से' और 'तुमने पुकारा और हम चले आए' जैसे उनके सदाबहार नगमे आज भी श्रोताओं की ज़ुबान पर हैं। उनकी आवाज़ की तुलना अक्सर लता मंगेशकर से की जाती थी, किंतु सुमन कल्याणपुर ने सदैव अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी।
संगीत जगत पर असर
गौरतलब है कि सुमन कल्याणपुर उस स्वर्णिम दौर की प्रतिनिधि थीं जब हिंदी फिल्मी संगीत अपनी ऊँचाइयों पर था। उनकी बहुभाषिक गायकी ने उन्हें एक ऐसा कलाकार बनाया जिसने क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर पूरे देश के संगीत प्रेमियों को एकसूत्र में पिरोया। उनके निधन के साथ भारतीय संगीत का एक युग समाप्त हो गया है, लेकिन उनकी आवाज़ रिकॉर्डिंग्स के माध्यम से हमेशा जीवित रहेगी।