20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुमन कल्याणपुर का 89 की उम्र में निधन, अंतिम संस्कार में पहुँचे सिर्फ़ सुरेश वाडकर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुमन कल्याणपुर का 89 की उम्र में निधन, अंतिम संस्कार में पहुँचे सिर्फ़ सुरेश वाडकर

सारांश

89 साल की उम्र में मुंबई में सुमन कल्याणपुर का निधन हो गया, मगर अंतिम विदाई में संगीत जगत से सिर्फ़ सुरेश वाडकर पहुँचे। लता जैसी आवाज़ होने का ‘लाभ’ उन्हें मौक़े नहीं, उपेक्षा देकर गया। 2023 में मिला पद्म भूषण भी प्रशंसकों के मुताबिक़ बहुत देर से आया सम्मान था।

मुख्य बातें

दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हुआ।
उनके अंतिम संस्कार में फ़िल्म-संगीत जगत से केवल गायक सुरेश वाडकर पहुँचे।
जन्म 28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के ढाका में हुआ; जे.जे.
स्कूल ऑफ आर्ट में पेंटिंग की छात्रा थीं।
गायक तलत महमूद ने उन्हें हिंदी फ़िल्म संगीत में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
नैय्यर से मनमुटाव और लता–रफ़ी विवाद सुलझने के बाद उनके करियर पर बड़ा असर पड़ा।
भारत सरकार ने 2023 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

दिग्गज पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया, लेकिन उनकी अंतिम विदाई में फिल्म और संगीत जगत से केवल गायक सुरेश वाडकर ही पहुँचे। दशकों तक अपनी मधुर आवाज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाली इस गायिका के अंतिम संस्कार में बड़े नामों की अनुपस्थिति ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए कि क्या सिनेमा अपने पुराने कलाकारों को बहुत जल्दी भुला देता है।

एक चुपचाप विदा हुई आवाज़

लता मंगेशकर और आशा भोसले के निधन पर जहाँ पूरी इंडस्ट्री उमड़ पड़ी थी, वहीं सुमन कल्याणपुर को वह सम्मान मरने के बाद भी नहीं मिल सका। गायकी की दुनिया से सिर्फ़ सुरेश वाडकर का पहुँचना इस बात की ओर इशारा करता है कि सुर्खियों से दूर रहने वाले कलाकारों को इंडस्ट्री कितनी जल्दी विस्मृत कर देती है।

ढाका से मुंबई तक का सफर

सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को तत्कालीन अविभाजित भारत के ढाका में हुआ था। संगीत की औपचारिक शिक्षा उन्होंने मुंबई में प्राप्त की। दिलचस्प बात यह है कि फ़िल्मी दुनिया में आना उनकी योजना में था ही नहीं — वे मुंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में पेंटिंग की पढ़ाई कर रही थीं। एक कार्यक्रम में उनकी गायकी सुनकर मशहूर गायक तलत महमूद इतने प्रभावित हुए कि उनके लिए हिंदी फ़िल्म संगीत के दरवाज़े खुल गए।

नैय्यर साहब से मनमुटाव और करियर का मोड़

रिपोर्टों के अनुसार, संगीतकार ओ.पी. नैय्यर से मनमुटाव ने सुमन के करियर को बड़ा झटका दिया। उनकी पहली ही फ़िल्म में उन्होंने अपनी मधुर आवाज़ में तीन गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें से दो नैय्यर साहब ने फ़िल्म से हटा दिए और केवल एक लोरी ‘कोई पुकारे तुझे धीरे से’ ही रखी गई। फ़िल्म ‘आर-पार’ में भी उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिसके बाद सुमन ने नैय्यर की फ़िल्मों में गाने से पूरी तरह इनकार कर दिया।

रफ़ी–लता विवाद और बंद होते दरवाज़े

जब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी के बीच मनमुटाव चल रहा था, उस दौरान सुमन कल्याणपुर के हिस्से रफ़ी साहब के साथ कई यादगार युगल गीत आए। लेकिन जैसे ही लता–रफ़ी विवाद सुलझा, सुमन को मिलने वाले मौक़े लगभग बंद हो गए और उनका करियर ढलान पर आ गया। लता जी ने एक बार कहा था कि सुमन काफ़ी प्रतिभाशाली हैं, मगर उनकी आवाज़ काफ़ी हद तक उनसे मिलती-जुलती है और उन्होंने अपनी आवाज़ को अलग पहचान देने की कोशिश नहीं की — यही वजह रही कि उन्हें कम मौक़े मिले।

देर से मिला पद्म भूषण

सुधा मल्होत्रा और आशा भोसले के उसी दौर में सुमन की आवाज़ हर किसी को पसंद आ रही थी, मगर परिस्थितियाँ बदलीं और वे पर्दे से ओझल होती चली गईं। वर्ष 2023 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया, जो उनके लंबे संगीत योगदान की देर से मिली स्वीकृति थी। उनके प्रशंसकों का मानना है कि यह सम्मान उन्हें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। उनके जाने के साथ हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग की एक और कड़ी हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सिर्फ़ ब्रांड बन चुके नामों को याद रखती है और बाक़ी को सायलेंट क्रेडिट रोल में डाल देती है। लता और आशा के निधन पर उमड़ी इंडस्ट्री और सुमन की विदाई में पसरी ख़ामोशी का फ़र्क़ कोई संयोग नहीं — यह उस सिस्टम का चरित्र है जहाँ प्रतिभा से ज़्यादा सुर्खियों में बने रहने का कौशल मायने रखता है। 2023 का पद्म भूषण भी इस संरचनात्मक उपेक्षा को ढक नहीं पाता; एक ऐसी आवाज़ जिसे कभी ‘लता जैसा’ कहकर सीमित किया गया, अब उसी तुलना के बोझ तले अनसुनी विदा हुई।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुमन कल्याणपुर कौन थीं?
सुमन कल्याणपुर हिंदी फ़िल्म संगीत की एक प्रमुख पार्श्वगायिका थीं, जिनका जन्म 28 जनवरी 1937 को ढाका में हुआ था। उन्होंने मोहम्मद रफ़ी सहित कई बड़े गायकों के साथ युगल गीत गाए और दशकों तक श्रोताओं को अपनी मधुर आवाज़ से मंत्रमुग्ध किया।
सुमन कल्याणपुर का निधन कब और कहाँ हुआ?
उनका निधन 89 वर्ष की आयु में मुंबई में हुआ। अंतिम संस्कार में फ़िल्म और संगीत जगत से केवल गायक सुरेश वाडकर ही उपस्थित रहे, जिसने इंडस्ट्री द्वारा पुराने कलाकारों को भुला दिए जाने पर बहस छेड़ दी है।
सुमन कल्याणपुर को पद्म भूषण कब मिला था?
भारत सरकार ने वर्ष 2023 में सुमन कल्याणपुर को पद्म भूषण से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके लंबे संगीत योगदान की स्वीकृति था, हालाँकि उनके प्रशंसकों का मानना है कि यह बहुत देर से मिला।
सुमन कल्याणपुर का करियर ढलान पर क्यों आ गया था?
रिपोर्टों के अनुसार, संगीतकार ओ.पी. नैय्यर से मनमुटाव और लता मंगेशकर–मोहम्मद रफ़ी विवाद सुलझने के बाद सुमन को मिलने वाले गायकी के मौक़े लगभग बंद हो गए थे। लता मंगेशकर ने स्वयं कहा था कि सुमन की आवाज़ उनसे मिलती-जुलती होने के कारण भी उन्हें अलग पहचान बनाने में कठिनाई हुई।
सुमन कल्याणपुर का फ़िल्मी सफर कैसे शुरू हुआ था?
वे मुंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में पेंटिंग की पढ़ाई कर रही थीं, तभी एक कार्यक्रम में उनकी गायकी सुनकर मशहूर गायक तलत महमूद बेहद प्रभावित हुए। इसी मुलाक़ात के बाद उनके लिए हिंदी फ़िल्म संगीत के दरवाज़े खुले।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले