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सुमन कल्याणपुर का 89 की उम्र में निधन, अंतिम संस्कार में पहुंचे सिर्फ सुरेश वाडकर

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सुमन कल्याणपुर का 89 की उम्र में निधन, अंतिम संस्कार में पहुंचे सिर्फ सुरेश वाडकर

सारांश

89 वर्षीय सुमन कल्याणपुर के निधन ने हिंदी संगीत के स्वर्ण युग का एक अध्याय बंद कर दिया, पर असली चोट उनकी विदाई पर लगी — पूरी इंडस्ट्री में से केवल सुरेश वाडकर पहुँचे। ओ.पी. नैय्यर से मनमुटाव, लता-रफ़ी विवाद के सुलझते ही गायब होते मौके और 2023 का देर से मिला पद्म भूषण — यह कहानी प्रतिभा की नहीं, याद रखे जाने की राजनीति की है।

मुख्य बातें

दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन।
अंतिम संस्कार में संगीत जगत से केवल गायक सुरेश वाडकर ही पहुँचे।
जन्म 28 जनवरी 1937 , ढाका; करियर की शुरुआत तलत महमूद की सिफ़ारिश से।
नैय्यर से मनमुटाव के बाद उनकी फ़िल्मों में गाने से इनकार कर दिया था।
लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी के विवाद सुलझते ही गाने मिलना लगभग बंद हो गए।
भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया, लेकिन उनके अंतिम संस्कार में संगीत जगत की लगभग पूरी बिरादरी अनुपस्थित रही और केवल गायक सुरेश वाडकर ही श्रद्धांजलि देने पहुँचे। दशकों तक अपनी मखमली आवाज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाली इस गायिका की विदाई ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है कि क्या फ़िल्म इंडस्ट्री अपने पुराने कलाकारों को बहुत जल्दी भुला देती है।

ढाका से मुंबई तक का सफ़र

सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को तत्कालीन अविभाजित भारत के ढाका में हुआ था। संगीत की औपचारिक शिक्षा उन्होंने मुंबई में हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि फ़िल्मी दुनिया में आने की उनकी कोई योजना नहीं थी — वे मुंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में पेंटिंग की पढ़ाई कर रही थीं।

एक कार्यक्रम में उनकी गायकी सुनकर मशहूर गायक तलत महमूद इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने हिंदी फ़िल्म संगीत के दरवाज़े सुमन के लिए खोल दिए। यहीं से एक चित्रकार बनने जा रही लड़की के सुरों का सफ़र शुरू हुआ।

नैय्यर साहब से मनमुटाव और करियर का मोड़

रिपोर्टों के अनुसार, सुमन कल्याणपुर और संगीतकार ओ.पी. नैय्यर के बीच के मनमुटाव ने उनकी गायकी को गहरा झटका दिया। उनकी पहली ही फ़िल्म में सुमन के हिस्से तीन गाने आए थे, लेकिन नैय्यर ने इनमें से दो गाने फ़िल्म से हटा दिए और केवल लोरी ‘कोई पुकारे तुझे धीरे से’ ही रखी गई।

इसके बाद फ़िल्म ‘आर-पार’ में भी उन्हें गाने का अवसर मिला, परंतु कथित तौर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इस अनुभव के बाद सुमन ने नैय्यर की फ़िल्मों में गाने से ही इनकार कर दिया — एक ऐसा फ़ैसला जिसकी क़ीमत उन्हें लंबे समय तक चुकानी पड़ी।

रफ़ी–लता विवाद और संक्षिप्त शिखर

जिस दौर में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी के बीच मनमुटाव चला, उस दौर में सुमन कल्याणपुर के हिस्से रफ़ी साहब के साथ कई यादगार युगल गीत आए। लेकिन जैसे ही लता–रफ़ी विवाद सुलझा, सुमन को गाने मिलने लगभग बंद हो गए और उनका करियर ढलान की ओर बढ़ चला।

लता मंगेशकर ने एक बार स्वयं स्वीकार किया था कि सुमन बेहद प्रतिभाशाली हैं, परंतु उनकी आवाज़ काफ़ी हद तक उनसे मिलती-जुलती है और सुमन ने अपनी आवाज़ को अलग पहचान देने का प्रयास नहीं किया — यही वजह रही कि उन्हें अपेक्षित मौके नहीं मिल पाए।

सम्मान, मगर बहुत देर से

वर्ष 2023 में भारत सरकार ने सुमन कल्याणपुर को पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उनके दीर्घ और महत्वपूर्ण संगीत-योगदान की औपचारिक स्वीकृति था। हालाँकि, उनके प्रशंसकों का मानना है कि यह सम्मान उन्हें कई दशक पहले मिल जाना चाहिए था।

एक सूनी विदाई और बड़ा सवाल

गौरतलब है कि लता मंगेशकर और हाल ही में आशा भोसले जैसे दिग्गजों के अंतिम संस्कार में जहाँ पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री उमड़ी, वहीं सुधा मल्होत्रा और आशा भोसले के समकालीन रहीं सुमन कल्याणपुर की अंतिम विदाई में संगीत जगत से केवल सुरेश वाडकर ही दिखाई दिए। आलोचकों का कहना है कि यह दृश्य भारतीय फ़िल्म संगीत की उस ‘भूलने की आदत’ का प्रतीक है, जिसमें सुर्खियों से दूर हो चुके कलाकार धीरे-धीरे सामूहिक स्मृति से ओझल कर दिए जाते हैं। उनके निधन के साथ हिंदी संगीत के स्वर्ण युग का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बंद हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही आवाज़ इसलिए दबा दी गई क्योंकि वह ‘बहुत मिलती-जुलती’ थी; और जब रफ़ी-लता विवाद सुलझा, तो विकल्प की ज़रूरत भी मिट गई। 2023 का पद्म भूषण न्याय कम, देर से दी गई माफ़ी ज़्यादा लगता है। असली सवाल यह है कि इंडस्ट्री अपने ‘बैकअप कलाकारों’ को जीते-जी क्यों नहीं, सिर्फ़ श्रद्धांजलि-कॉलम में याद करती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुमन कल्याणपुर का निधन कब और कहाँ हुआ?
दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हुआ। उनके अंतिम संस्कार में संगीत जगत से केवल गायक सुरेश वाडकर ही शामिल हुए।
सुमन कल्याणपुर ने ओ.पी. नैय्यर की फ़िल्मों में गाना क्यों बंद कर दिया था?
रिपोर्टों के अनुसार, पहली फ़िल्म के तीन में से दो गाने नैय्यर ने हटा दिए थे और बाद की फ़िल्म ‘आर-पार’ में भी कथित तौर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इन अनुभवों के बाद सुमन ने ओ.पी. नैय्यर की फ़िल्मों में गाने से इनकार कर दिया था।
सुमन कल्याणपुर के करियर पर लता-रफ़ी विवाद का क्या असर पड़ा?
लता मंगेशकर और मोहम्मद रफ़ी के बीच मनमुटाव के दौरान सुमन को रफ़ी के साथ कई यादगार युगल गीत मिले। लेकिन जैसे ही यह विवाद सुलझा, उन्हें गाने मिलना लगभग बंद हो गया और उनका करियर ढलान पर आ गया।
सुमन कल्याणपुर को पद्म भूषण कब मिला था?
भारत सरकार ने वर्ष 2023 में सुमन कल्याणपुर को पद्म भूषण से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार उनके दीर्घकालीन संगीत योगदान की औपचारिक स्वीकृति था, हालाँकि प्रशंसकों का मानना है कि यह सम्मान उन्हें बहुत पहले मिल जाना चाहिए था।
सुमन कल्याणपुर का फ़िल्मी करियर कैसे शुरू हुआ था?
सुमन कल्याणपुर मुंबई के जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में पेंटिंग की पढ़ाई कर रही थीं, फ़िल्मी दुनिया में आने की उनकी कोई योजना नहीं थी। एक कार्यक्रम में उनकी गायकी सुनकर प्रभावित हुए मशहूर गायक तलत महमूद की सिफ़ारिश से उनके लिए हिंदी फ़िल्म संगीत के दरवाज़े खुले।
राष्ट्र प्रेस
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