जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: इमरान खान ने उठाई झारखंड छात्र आंदोलन की आवाज, रांची में जारी है धरना
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान ने 5 अगस्त 2026 को झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन को अपना समर्थन दिया। अभिनेता ने इंस्टाग्राम के माध्यम से सरकार और आम नागरिकों का ध्यान रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की माँगों की ओर खींचा।
इमरान खान का संदेश
इमरान खान ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, 'झारखंड में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। चलो हम सब उन्हें इग्नोर कर दें, क्या गलत हो सकता है।' इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी को व्यापक रूप से छात्रों के पक्ष में समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी कुछ कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
झारखंड की राजधानी रांची में पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित तौर पर पेपर लीक और अन्य अनियमितताएँ हुई हैं। छात्रों ने इस आंदोलन को दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर संगठित किया है और मशाल जुलूस तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
छात्रों की मुख्य माँगें
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख माँग है कि विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए और कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जाँच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। छात्रों का कहना है कि बार-बार भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के चलते झारखंड के युवाओं का भविष्य दाँव पर लग रहा है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार छात्रों की चिंताओं से भली-भाँति अवगत है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जाँच जारी है और शीघ्र ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब माँगा है।
व्यापक समर्थन
इस आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों का भी साथ मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) सहित अन्य संगठनों ने छात्रों की माँगों का समर्थन किया है। देश के विभिन्न राज्यों से भी छात्रों को एकजुटता मिल रही है। यह आंदोलन तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते।