कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटीं मानसी पारेख: न्यालम लैंडस्लाइड में 4 घंटे बस में फंसी, मुंबई पहुंचकर बोलीं 'जंग जीत ली'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री मानसी पारेख ने अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करके 31 अगस्त को मुंबई वापसी की। सोमवार को उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ के ज़रिए अपने मुश्किल सफर का ब्यौरा साझा किया और बताया कि चीन से नेपाल बॉर्डर तक पहुँचना उनके लिए किसी जंग जीतने से कम नहीं था। यह वापसी उस आपदा के कुछ ही दिन बाद हुई, जब तिब्बत में बाढ़ आने से महज़ पाँच दिन पहले ही मानसी उसी क्षेत्र में मौजूद थीं।
न्यालम में लैंडस्लाइड, बस में 4 घंटे का इंतज़ार
मानसी पारेख ने बताया कि चीन के न्यालम शहर में एक बड़े लैंडस्लाइड के कारण उनके पूरे ग्रुप को बस के अंदर ही करीब 4 घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा। उन्होंने लिखा, 'पिछले 3-4 दिन बहुत मुश्किल भरे रहे और चीन से निकलकर नेपाल बॉर्डर तक पहुँचना किसी जंग जीतने जैसा था।' तब जाकर उनका ग्रुप सड़क मार्ग से चीन से बाहर निकलने का सफर शुरू कर सका।
नेपाल बॉर्डर पर दूसरा लैंडस्लाइड, पैदल पार करना पड़ा रास्ता
करीब 40 मील के लंबे बस सफर के बाद जब यात्री दल नेपाल बॉर्डर पहुँचा, तो वहाँ एक और लैंडस्लाइड का सामना करना पड़ा। मानसी ने बताया कि दूसरी तरफ खड़ी बसों तक पहुँचने के लिए उन्हें उस लैंडस्लाइड वाले रास्ते से पैदल गुज़रना पड़ा, क्योंकि कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं था।
काठमांडू तक उबड़-खाबड़ सफर
नेपाल बॉर्डर पार करने के बाद काठमांडू तक का करीब 4 घंटे का बस सफर अत्यंत कठिन रहा। मानसी ने इसे 'ज़िंदगी का सबसे उबड़-खाबड़ बस सफर' बताया। उन्होंने लिखा कि यह सब परेशानी इसलिए सार्थक थी क्योंकि इसका मतलब था मुंबई वापस आना और अपने परिवार व बेटी को गले लगाना।
तिब्बत बाढ़ से पाँच दिन पहले थीं उसी इलाके में
गौरतलब है कि मानसी पारेख की यह वापसी उस आपदा के ठीक बाद हुई, जब तिब्बत में बाढ़ आई। अभिनेत्री ने पहले सोशल मीडिया पर बताया था कि बाढ़ आने से सिर्फ पाँच दिन पहले वह उसी स्थान पर मौजूद थीं। वह एक ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं, तभी इस इलाके में यह प्राकृतिक आपदा आई।
परिवार से मिलन पर भावुक हुईं मानसी
अपने सफर का अनुभव साझा करते हुए मानसी पारेख ने प्रशंसकों का आभार जताया। उन्होंने लिखा, 'आप सभी के ढेरों प्यार, मैसेज, कॉल और दुआओं के लिए शुक्रिया।' मुंबई पहुँचकर अपनी बेटी और परिवार से मिलना उनके लिए इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी राहत रही। यह अनुभव न केवल एक तीर्थयात्रा की कहानी है, बल्कि एक अभिनेत्री के अदम्य साहस और परिवार के प्रति गहरे लगाव का प्रमाण भी है।