31 अगस्त 2026
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कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटीं मानसी पारेख: न्यालम लैंडस्लाइड में 4 घंटे बस में फंसी, मुंबई पहुंचकर बोलीं 'जंग जीत ली'

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कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटीं मानसी पारेख: न्यालम लैंडस्लाइड में 4 घंटे बस में फंसी, मुंबई पहुंचकर बोलीं 'जंग जीत ली'

सारांश

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई अभिनेत्री मानसी पारेख के लिए यह सफर आस्था से कहीं बढ़कर एक जीवंत संघर्ष बन गया — न्यालम में लैंडस्लाइड, नेपाल बॉर्डर पर पैदल पार, और तिब्बत में बाढ़ से महज़ पाँच दिन पहले उसी इलाके में मौजूद रहना। मुंबई पहुँचकर उन्होंने कहा — 'जंग जीत ली।'

मुख्य बातें

अभिनेत्री मानसी पारेख 31 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करके मुंबई लौटीं।
चीन के न्यालम शहर में लैंडस्लाइड के कारण उनके ग्रुप को बस में 4 घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा।
नेपाल बॉर्डर पर दूसरे लैंडस्लाइड वाले रास्ते से पैदल गुज़रना पड़ा; इसके बाद काठमांडू तक करीब 4 घंटे का कठिन बस सफर।
तिब्बत में बाढ़ आने से सिर्फ 5 दिन पहले मानसी उसी इलाके में मौजूद थीं।
मानसी ने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर लिखा — चीन से नेपाल बॉर्डर तक पहुँचना 'किसी जंग जीतने जैसा' था।

अभिनेत्री मानसी पारेख ने अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करके 31 अगस्त को मुंबई वापसी की। सोमवार को उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ के ज़रिए अपने मुश्किल सफर का ब्यौरा साझा किया और बताया कि चीन से नेपाल बॉर्डर तक पहुँचना उनके लिए किसी जंग जीतने से कम नहीं था। यह वापसी उस आपदा के कुछ ही दिन बाद हुई, जब तिब्बत में बाढ़ आने से महज़ पाँच दिन पहले ही मानसी उसी क्षेत्र में मौजूद थीं।

न्यालम में लैंडस्लाइड, बस में 4 घंटे का इंतज़ार

मानसी पारेख ने बताया कि चीन के न्यालम शहर में एक बड़े लैंडस्लाइड के कारण उनके पूरे ग्रुप को बस के अंदर ही करीब 4 घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा। उन्होंने लिखा, 'पिछले 3-4 दिन बहुत मुश्किल भरे रहे और चीन से निकलकर नेपाल बॉर्डर तक पहुँचना किसी जंग जीतने जैसा था।' तब जाकर उनका ग्रुप सड़क मार्ग से चीन से बाहर निकलने का सफर शुरू कर सका।

नेपाल बॉर्डर पर दूसरा लैंडस्लाइड, पैदल पार करना पड़ा रास्ता

करीब 40 मील के लंबे बस सफर के बाद जब यात्री दल नेपाल बॉर्डर पहुँचा, तो वहाँ एक और लैंडस्लाइड का सामना करना पड़ा। मानसी ने बताया कि दूसरी तरफ खड़ी बसों तक पहुँचने के लिए उन्हें उस लैंडस्लाइड वाले रास्ते से पैदल गुज़रना पड़ा, क्योंकि कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं था।

काठमांडू तक उबड़-खाबड़ सफर

नेपाल बॉर्डर पार करने के बाद काठमांडू तक का करीब 4 घंटे का बस सफर अत्यंत कठिन रहा। मानसी ने इसे 'ज़िंदगी का सबसे उबड़-खाबड़ बस सफर' बताया। उन्होंने लिखा कि यह सब परेशानी इसलिए सार्थक थी क्योंकि इसका मतलब था मुंबई वापस आना और अपने परिवार व बेटी को गले लगाना।

तिब्बत बाढ़ से पाँच दिन पहले थीं उसी इलाके में

गौरतलब है कि मानसी पारेख की यह वापसी उस आपदा के ठीक बाद हुई, जब तिब्बत में बाढ़ आई। अभिनेत्री ने पहले सोशल मीडिया पर बताया था कि बाढ़ आने से सिर्फ पाँच दिन पहले वह उसी स्थान पर मौजूद थीं। वह एक ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं, तभी इस इलाके में यह प्राकृतिक आपदा आई।

परिवार से मिलन पर भावुक हुईं मानसी

अपने सफर का अनुभव साझा करते हुए मानसी पारेख ने प्रशंसकों का आभार जताया। उन्होंने लिखा, 'आप सभी के ढेरों प्यार, मैसेज, कॉल और दुआओं के लिए शुक्रिया।' मुंबई पहुँचकर अपनी बेटी और परिवार से मिलना उनके लिए इस पूरी यात्रा की सबसे बड़ी राहत रही। यह अनुभव न केवल एक तीर्थयात्रा की कहानी है, बल्कि एक अभिनेत्री के अदम्य साहस और परिवार के प्रति गहरे लगाव का प्रमाण भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह उन हज़ारों गुमनाम यात्रियों की आवाज़ भी बनती है जो ऐसी परिस्थितियों में अकेले जूझते हैं।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानसी पारेख कैलाश मानसरोवर यात्रा पर क्यों गई थीं और वापसी कब हुई?
मानसी पारेख एक ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं और 31 अगस्त को मुंबई वापस लौटीं। उनकी वापसी उस समय हुई जब तिब्बत क्षेत्र में बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाएँ हो रही थीं।
न्यालम लैंडस्लाइड में मानसी पारेख के साथ क्या हुआ?
चीन के न्यालम शहर में बड़े लैंडस्लाइड के कारण मानसी पारेख और उनके ग्रुप को बस के अंदर करीब 4 घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा। इसके बाद करीब 40 मील का बस सफर तय करके वे नेपाल बॉर्डर पहुँचे।
क्या मानसी पारेख तिब्बत में आई बाढ़ से प्रभावित हुईं?
मानसी पारेख सीधे बाढ़ में नहीं फंसीं, लेकिन उन्होंने बताया कि तिब्बत में बाढ़ आने से सिर्फ 5 दिन पहले वह उसी इलाके में मौजूद थीं। यात्रा के दौरान उन्हें लैंडस्लाइड और कठिन रास्तों का सामना करना पड़ा।
नेपाल बॉर्डर पर मानसी पारेख को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?
नेपाल बॉर्डर पर एक और लैंडस्लाइड आई हुई थी, जिसके कारण मानसी और उनके ग्रुप को दूसरी तरफ खड़ी बसों तक पहुँचने के लिए उस मलबे वाले रास्ते से पैदल गुज़रना पड़ा। इसके बाद काठमांडू तक करीब 4 घंटे का उबड़-खाबड़ बस सफर करना पड़ा।
मानसी पारेख ने अपनी वापसी के बारे में क्या कहा?
मानसी पारेख ने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर लिखा कि चीन से नेपाल बॉर्डर तक पहुँचना 'किसी जंग जीतने जैसा' था। उन्होंने प्रशंसकों की दुआओं और संदेशों के लिए आभार जताया और कहा कि परिवार व बेटी के पास लौटना इन सारी मुश्किलों को सार्थक बना गया।
राष्ट्र प्रेस
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