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ईटिंग डिसऑर्डर: बार-बार खाना या भूखे रहना हो सकता है जानलेवा, NHM और NIMHANS विशेषज्ञ की चेतावनी

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ईटिंग डिसऑर्डर: बार-बार खाना या भूखे रहना हो सकता है जानलेवा, NHM और NIMHANS विशेषज्ञ की चेतावनी

सारांश

परफेक्ट बॉडी की चाह में कैलोरी गिनते-गिनते कई लोग खुद से दूर होते जाते हैं — यही है ईटिंग डिसऑर्डर की खामोश लड़ाई। NHM और NIMHANS की विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मी श्रावंती के अनुसार यह मानसिक विकार युवाओं में तेज़ी से बढ़ रहा है और समय पर पहचान न हो तो जानलेवा हो सकता है।

मुख्य बातें

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने ईटिंग डिसऑर्डर पर जागरूकता अभियान चलाते हुए इसे गंभीर मानसिक विकार बताया।
NIMHANS, बेंगलुरु की डॉ.
लक्ष्मी श्रावंती के अनुसार यह विकार किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन युवाओं में सबसे अधिक देखा जाता है।
मुख्य कारणों में सामाजिक दबाव , बुलिंग , आत्मविश्वास की कमी और अत्यधिक डाइटिंग शामिल हैं।
समय पर पहचान न होने पर कुपोषण , हृदय रोग , हड्डियों की कमज़ोरी और जीवन को खतरा हो सकता है।
NHM ने अपील की है कि पतला दिखने वाला हर व्यक्ति स्वस्थ नहीं होता — समझ और सहानुभूति ज़रूरी है।

ईटिंग डिसऑर्डर — यानी खाने से जुड़ा मानसिक विकार — आज के दौर में युवाओं के बीच तेज़ी से बढ़ रही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने हाल ही में इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाते हुए चेतावनी दी है कि परफेक्ट बॉडी की चाह में अपनाई गई गलत खानपान की आदतें धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को गहरा नुकसान पहुँचा सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह विकार समय पर न पहचाना जाए तो कुपोषण, हृदय रोग और जीवन को खतरे जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

ईटिंग डिसऑर्डर क्या है

NIMHANS, बेंगलुरु के चाइल्ड एंड एडोलिसेंट साइकियाट्री विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी श्रावंती के अनुसार, ईटिंग डिसऑर्डर मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर स्थितियाँ हैं, जिनमें व्यक्ति का भोजन और अपने शरीर की छवि यानी बॉडी इमेज के साथ संबंध अनहेल्दी हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन युवाओं में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं।

NHM ने अपने जागरूकता संदेश में कहा है कि ईटिंग डिसऑर्डर कोई साधारण खाने की आदत नहीं, बल्कि यह एक खामोश लड़ाई है जिसमें व्यक्ति खुद से ही दूर होता जाता है। कैलोरी गिनते-गिनते कई लोग अपनी मुस्कान, सुकून और आत्मविश्वास खो बैठते हैं।

मुख्य कारण और जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ईटिंग डिसऑर्डर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं — समाज का पतला या खास तरीके से दिखने का दबाव, आत्मविश्वास की कमी, मूड स्विंग्स और भावनात्मक उतार-चढ़ाव, वजन या दिखावट को लेकर बुलिंग, तथा बार-बार डाइटिंग करना या खाना छोड़ने की आदत।

यह ऐसे समय में सामने आया है जब सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट बॉडी' के मानकों का प्रचलन तेज़ी से बढ़ा है, और किशोरों व युवाओं पर इसका मनोवैज्ञानिक दबाव लगातार गहरा हो रहा है।

शारीरिक और मानसिक प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, इस विकार में व्यक्ति केवल खानपान की समस्या से नहीं, बल्कि भावनात्मक तनाव, शर्म और अपराधबोध से भी गुज़रता है। कई बार व्यक्ति खुद को दंडित करने जैसा महसूस करता है।

शारीरिक स्तर पर, ईटिंग डिसऑर्डर के कारण वजन में अत्यधिक कमी या वृद्धि हो सकती है। यदि समय पर पहचान न हो, तो कुपोषण, हृदय संबंधी समस्याएँ, हड्डियों की कमज़ोरी और जीवन को खतरे जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। गौरतलब है कि ईटिंग डिसऑर्डर मानसिक स्वास्थ्य विकारों में सबसे अधिक मृत्यु दर से जुड़े विकारों में से एक माना जाता है।

NHM की अपील और जागरूकता अभियान

नेशनल हेल्थ मिशन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम चैनल पर एक जागरूकता वीडियो साझा किया है, जिसमें डॉ. लक्ष्मी श्रावंती विस्तार से इस विकार की जानकारी देती नज़र आईं। मिशन ने लोगों से अपील की है कि हर पतला दिखने वाला व्यक्ति स्वस्थ हो, यह ज़रूरी नहीं — किसी को जज करने से पहले थोड़ी समझ और सहानुभूति दिखाएँ।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में खाने से डर, बार-बार खाने की लत, या शरीर की छवि को लेकर अत्यधिक चिंता जैसे संकेत दिखें, तो बिना देर किए किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श लेना चाहिए।

आगे क्या करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परिवार और दोस्तों की भूमिका इस विकार की पहचान और उपचार में सबसे अहम है। समय पर पहचान, खुली बातचीत और पेशेवर मदद — ये तीनों मिलकर ईटिंग डिसऑर्डर से उबरने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। NHM की यह पहल मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक ज़रूरी कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती जागरूकता से आगे की है — भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच अभी भी बेहद सीमित है, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में। सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट बॉडी' के बढ़ते दबाव और स्कूल-कॉलेज स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा की कमी इस समस्या को और गहरा बना रही है। केवल इंस्टाग्राम वीडियो से जागरूकता नहीं आएगी — स्कूल काउंसलर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित पेशेवर और किफायती उपचार विकल्प इस लड़ाई की असली ज़रूरत हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईटिंग डिसऑर्डर क्या होता है?
ईटिंग डिसऑर्डर एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य विकार है जिसमें व्यक्ति का भोजन और अपने शरीर की छवि के साथ संबंध अनहेल्दी हो जाता है। इसमें बार-बार खाना, भूखे रहना, या भोजन से डर जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। NIMHANS की डॉ. लक्ष्मी श्रावंती के अनुसार यह केवल खाने की आदत नहीं, बल्कि भावनाओं और आत्मविश्वास से गहराई से जुड़ा विकार है।
ईटिंग डिसऑर्डर के मुख्य कारण क्या हैं?
इसके प्रमुख कारणों में सामाजिक दबाव (पतला दिखने की चाह), आत्मविश्वास की कमी, भावनात्मक उतार-चढ़ाव, वजन या दिखावट को लेकर बुलिंग, और अत्यधिक डाइटिंग शामिल हैं। सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट बॉडी' के बढ़ते चलन को भी इस विकार के बढ़ने का एक बड़ा कारण माना जाता है।
ईटिंग डिसऑर्डर के क्या खतरे हो सकते हैं?
समय पर पहचान न होने पर ईटिंग डिसऑर्डर से कुपोषण, हृदय संबंधी समस्याएँ, हड्डियों की कमज़ोरी और जीवन को खतरा हो सकता है। मानसिक स्तर पर व्यक्ति भावनात्मक तनाव, शर्म और अपराधबोध से गुज़रता है।
NHM ने ईटिंग डिसऑर्डर को लेकर क्या कदम उठाया है?
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम चैनल पर एक जागरूकता वीडियो जारी किया है, जिसमें NIMHANS बेंगलुरु की डॉ. लक्ष्मी श्रावंती विस्तार से जानकारी देती हैं। मिशन ने लोगों से अपील की है कि पतला दिखने वाले हर व्यक्ति को स्वस्थ न समझें और दूसरों के प्रति सहानुभूति रखें।
ईटिंग डिसऑर्डर होने पर क्या करें?
यदि किसी में भोजन से डर, बार-बार खाने की लत, या शरीर की छवि को लेकर अत्यधिक चिंता जैसे संकेत दिखें, तो बिना देर किए किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श लेना चाहिए। परिवार और दोस्तों का सहयोग, खुली बातचीत और पेशेवर मदद मिलकर इस विकार से उबरने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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