26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अष्टांग नमस्कारासन: कंधों और पीठ की मांसपेशियों को लचीला बनाने का सही तरीका जानें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अष्टांग नमस्कारासन: कंधों और पीठ की मांसपेशियों को लचीला बनाने का सही तरीका जानें

सारांश

अष्टांग नमस्कारासन के लाभों को जानें और इस योगासन को सही तरीके से करने के तरीके का अवलोकन करें। यह आसन आपके कंधों और पीठ की मांसपेशियों को लचीला बनाने में सहायक है।

मुख्य बातें

अष्टांग नमस्कारासन कंधों और पीठ के लिए लाभकारी है।
इससे मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ता है।
यह सांसों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
यह कमर से लेकर कंधों तक आराम देता है।
योग का नियमित अभ्यास स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले, आयुष मंत्रालय लोगों को स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए जागरूक कर रहा है।

आयुष मंत्रालय ने योग के लाभों और सही तरीके से अभ्यास करने की जानकारी साझा की है। मंत्रालय ने '365 डे योगा' हैशटैग भी शुरू किया है और मई में विभिन्न राज्यों में योग कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। हाल ही में मंत्रालय ने अष्टांग नमस्कारासन के लाभों पर प्रकाश डाला है, जो शरीर को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।

मंत्रालय के अनुसार, अष्टांग नमस्कारासन संतुलन, शक्ति और समर्पण को सिखाता है, और यह आंतरिक सामंजस्य को बढ़ाता है। यह शरीर को स्थिर करने के साथ-साथ सांसों को नियंत्रित करने में भी सहायक है। इस आसन को करने के लिए पहले जमीन पर उल्टा लेटें और ठोड़ी को जमीन पर टिकाएं। पैरों को सीधा रखें और कूल्हे को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि केवल हाथ, ठोड़ी, छाती, पैर की उंगलियां और घुटने ही जमीन पर हों। कूल्हे का हिस्सा ऊपर होना चाहिए।

इस मुद्रा को कुछ समय तक होल्ड करें और गहरी सांस लें। फिर सीधे कोबरा पोज में लौटें और कमर में खिंचाव का अनुभव करें। यह आसन करने से कमर से कंधे की मांसपेशियों में आराम मिलता है और अकड़न कम होती है। यदि आप लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करते हैं, तो यह आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।

अष्टांग नमस्कारासन सूर्य नमस्कार का छठा आसन है, जिसे 'आठ अंगों वाला आसन' भी कहा जाता है। इसमें शरीर के आठ अंग—दोनों पैर के अंगूठे, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, छाती और ठोड़ी जमीन को छूते हैं। यह योग शक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अष्टांग नमस्कारासन से बाजुओं, कंधों और पीठ की मांसपेशियां मजबूत और लचीली बनती हैं और हड्डियों से चटचट की आवाज आने की समस्या में भी राहत मिलती है। यह मांसपेशियों में रक्त का संचार भी सुधारता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह शरीर के संतुलन और शक्ति का प्रतीक है। आयुष मंत्रालय द्वारा इसे प्रमोट किया जाना दर्शाता है कि इस आसन के माध्यम से हम न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी सुधार सकते हैं। यह एक ऐसा अभ्यास है, जो सभी आयु वर्ग के लिए लाभदायक है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अष्टांग नमस्कारासन क्या है?
अष्टांग नमस्कारासन सूर्य नमस्कार का छठा आसन है, जिसमें शरीर के आठ अंग जमीन को छूते हैं।
इस आसन के क्या लाभ हैं?
यह आसन कंधों और पीठ की मांसपेशियों को लचीला बनाता है और हड्डियों से चटचट की आवाज आने की समस्या में राहत देता है।
इस आसन को कैसे करना है?
पहले जमीन पर उल्टा लेटें, ठोड़ी को जमीन पर टिकाएं और कूल्हे को ऊपर उठाएं।
क्या यह आसन सभी के लिए उपयुक्त है?
हाँ, यह आसन सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी है।
क्या इससे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है?
हाँ, यह आसन मानसिक संतुलन को भी बेहतर बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले