अष्टांग नमस्कारासन: कंधों और पीठ की मांसपेशियों को लचीला बनाने का सही तरीका जानें
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 21 जून को आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले, आयुष मंत्रालय लोगों को स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए जागरूक कर रहा है।
आयुष मंत्रालय ने योग के लाभों और सही तरीके से अभ्यास करने की जानकारी साझा की है। मंत्रालय ने '365 डे योगा' हैशटैग भी शुरू किया है और मई में विभिन्न राज्यों में योग कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। हाल ही में मंत्रालय ने अष्टांग नमस्कारासन के लाभों पर प्रकाश डाला है, जो शरीर को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।
मंत्रालय के अनुसार, अष्टांग नमस्कारासन संतुलन, शक्ति और समर्पण को सिखाता है, और यह आंतरिक सामंजस्य को बढ़ाता है। यह शरीर को स्थिर करने के साथ-साथ सांसों को नियंत्रित करने में भी सहायक है। इस आसन को करने के लिए पहले जमीन पर उल्टा लेटें और ठोड़ी को जमीन पर टिकाएं। पैरों को सीधा रखें और कूल्हे को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि केवल हाथ, ठोड़ी, छाती, पैर की उंगलियां और घुटने ही जमीन पर हों। कूल्हे का हिस्सा ऊपर होना चाहिए।
इस मुद्रा को कुछ समय तक होल्ड करें और गहरी सांस लें। फिर सीधे कोबरा पोज में लौटें और कमर में खिंचाव का अनुभव करें। यह आसन करने से कमर से कंधे की मांसपेशियों में आराम मिलता है और अकड़न कम होती है। यदि आप लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करते हैं, तो यह आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
अष्टांग नमस्कारासन सूर्य नमस्कार का छठा आसन है, जिसे 'आठ अंगों वाला आसन' भी कहा जाता है। इसमें शरीर के आठ अंग—दोनों पैर के अंगूठे, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, छाती और ठोड़ी जमीन को छूते हैं। यह योग शक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अष्टांग नमस्कारासन से बाजुओं, कंधों और पीठ की मांसपेशियां मजबूत और लचीली बनती हैं और हड्डियों से चटचट की आवाज आने की समस्या में भी राहत मिलती है। यह मांसपेशियों में रक्त का संचार भी सुधारता है।