11 अगस्त 2026
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महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने केरल के हेल्थ मॉडल का अध्ययन किया, पब्लिक हेल्थकेयर सुधार की तैयारी

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महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने केरल के हेल्थ मॉडल का अध्ययन किया, पब्लिक हेल्थकेयर सुधार की तैयारी

सारांश

महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग का उच्चस्तरीय दल 6-8 अगस्त को केरल गया — लक्ष्य था केरल के सफल फैमिली हेल्थ सेंटर मॉडल और ई-हेल्थ डिजिटल प्लेटफॉर्म से सबक लेकर महाराष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली को बेहतर बनाना, न कि मॉडल को हूबहू नकलना।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग का प्रतिनिधिमंडल 6 से 8 अगस्त 2026 के बीच केरल के अध्ययन दौरे पर रहा।
दल का नेतृत्व द्वितीय सचिव ई.
रवींद्रन और मिशन डायरेक्टर संजय श्रीपतराव कटकर ने किया।
केरल के फैमिली हेल्थ सेंटर (FHC) मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया गया, जो एक ही मंच पर समेकित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ देता है।
'ई-हेल्थ केरल' डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और महाराष्ट्र में उसकी अनुकूलन-क्षमता की जाँच की गई।
अध्ययन में टीबी उन्मूलन , कैंसर देखभाल , पैलिएटिव केयर और 30+ आयु वर्ग की NCD स्क्रीनिंग सहित दस से अधिक स्वास्थ्य क्षेत्र शामिल रहे।
विभाग के अनुसार, उद्देश्य केरल मॉडल की हूबहू नकल नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की स्थानीय ज़रूरतों के अनुरूप व्यावहारिक उपायों की पहचान करना है।

महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 6 से 8 अगस्त 2026 के बीच केरल के दौरे पर रहा, जिसका उद्देश्य राज्य के सफल स्वास्थ्य मॉडल से सीख लेकर महाराष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुलभ, कुशल और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाना है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह दौरा केरल की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन और रोग-निवारण रणनीतियों को समझने के लिए आयोजित किया गया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व और संरचना

इस अध्ययन दौरे का नेतृत्व सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के द्वितीय सचिव ई. रवींद्रन और स्वास्थ्य सेवा आयुक्त एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन डायरेक्टर संजय श्रीपतराव कटकर ने किया। दल में स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल थे।

गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र सरकार अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधारों की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

केरल का फैमिली हेल्थ सेंटर मॉडल

अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र केरल का फैमिली हेल्थ सेंटर (FHC) मॉडल रहा। इस मॉडल के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक ही मंच पर रोग-निवारण, स्वास्थ्य संवर्धन, बीमारी की पहचान, उपचार और फॉलो-अप जैसी समेकित सेवाएँ प्रदान करते हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से यह समझा कि ये केंद्र गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, परामर्श, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल और नियमित फॉलो-अप को एक साथ कैसे संचालित करते हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के कामकाज और सामुदायिक स्तर पर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में उनकी भूमिका की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

ई-हेल्थ केरल: डिजिटल स्वास्थ्य का अनुभव

प्रतिनिधिमंडल ने 'ई-हेल्थ केरल' प्लेटफॉर्म का भी गहन अध्ययन किया। यह एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं को आपस में जोड़ती है और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, रेफरल प्रबंधन तथा मरीज़ों की जानकारी के कुशल संचालन में सहायक है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अनुभव से महाराष्ट्र में इलाज की निरंतरता, रेफरल प्रणाली और मरीज़ फॉलो-अप को सुदृढ़ करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अध्ययन के प्रमुख क्षेत्र

इस स्टडी विजिट में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्रों को शामिल किया गया — गैर-संचारी रोगों के लिए जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग, कैंसर की रोकथाम और देखभाल, मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, टीबी (तपेदिक) उन्मूलन, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस नियंत्रण, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला सेवाएँ, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ, पैलिएटिव केयर, एकीकृत रोग निगरानी और दवा खरीद एवं आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन।

विभाग के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों में सामान्य गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, शीघ्र पहचान, उपचार और फॉलो-अप प्रणालियों की जाँच की।

महाराष्ट्र की अपनी जरूरतों के अनुरूप अनुकूलन

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य केरल मॉडल को हूबहू अपनाना नहीं, बल्कि ऐसे व्यावहारिक और प्रभावी उपायों की पहचान करना था जिन्हें महाराष्ट्र की भौगोलिक, जनसांख्यिकीय और स्वास्थ्य सेवा संबंधी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सके। यह पहल संकेत देती है कि राज्य सरकार साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती अनुकूलन में है — केरल की सफलता का एक बड़ा कारण दशकों से चली आ रही सामुदायिक स्वास्थ्य संस्कृति और प्रशिक्षित मानव संसाधन हैं, जिसे रातोंरात नहीं दोहराया जा सकता। महाराष्ट्र की विशाल भौगोलिक विविधता — विदर्भ के सुदूर जिलों से लेकर मुंबई के घनी आबादी वाले इलाकों तक — एक समान डिजिटल और संरचनात्मक ढाँचे को लागू करना कठिन बनाती है। 'हूबहू नकल नहीं, अनुकूलन' की नीति सही दिशा है, पर इसके लिए विस्तृत कार्यान्वयन रोडमैप, बजट प्रतिबद्धता और जवाबदेही तंत्र की दरकार होगी — जिनका अभी तक कोई ब्यौरा सामने नहीं आया है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने केरल का दौरा क्यों किया?
महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग का प्रतिनिधिमंडल 6 से 8 अगस्त 2026 को केरल गया ताकि वहाँ की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन और रोग-निवारण रणनीतियों को समझा जा सके। उद्देश्य था — ऐसे व्यावहारिक उपायों की पहचान करना जिन्हें महाराष्ट्र की ज़रूरतों के अनुरूप अपनाया जा सके।
केरल का फैमिली हेल्थ सेंटर (FHC) मॉडल क्या है?
फैमिली हेल्थ सेंटर मॉडल के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक ही मंच पर रोग-निवारण, स्वास्थ्य संवर्धन, बीमारी की पहचान, उपचार और फॉलो-अप जैसी समेकित सेवाएँ देते हैं। इसमें गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और परामर्श सेवाएँ भी शामिल हैं।
'ई-हेल्थ केरल' प्लेटफॉर्म क्या है और महाराष्ट्र इससे क्या सीखेगा?
'ई-हेल्थ केरल' एक एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म है जो विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं को जोड़ता है और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, रेफरल तथा मरीज़ प्रबंधन को सुगम बनाता है। महाराष्ट्र इस अनुभव का उपयोग अपनी इलाज-निरंतरता, रेफरल प्रणाली और मरीज़ फॉलो-अप को मज़बूत करने में करना चाहता है।
इस अध्ययन दौरे में किन स्वास्थ्य क्षेत्रों को शामिल किया गया?
दौरे में गैर-संचारी रोग स्क्रीनिंग, कैंसर देखभाल, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य, टीबी उन्मूलन, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस नियंत्रण, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला, आपातकालीन चिकित्सा, पैलिएटिव केयर, एकीकृत रोग निगरानी और दवा आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल थे।
क्या महाराष्ट्र केरल के मॉडल को पूरी तरह अपनाएगा?
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, उद्देश्य केरल मॉडल की हूबहू नकल करना नहीं है। बल्कि ऐसे प्रभावी उपायों की पहचान की जाएगी जिन्हें महाराष्ट्र की भौगोलिक, जनसांख्यिकीय और स्वास्थ्य सेवा संबंधी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित किया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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