महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग ने केरल के हेल्थ मॉडल का अध्ययन किया, पब्लिक हेल्थकेयर सुधार की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 6 से 8 अगस्त 2026 के बीच केरल के दौरे पर रहा, जिसका उद्देश्य राज्य के सफल स्वास्थ्य मॉडल से सीख लेकर महाराष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुलभ, कुशल और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाना है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह दौरा केरल की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन और रोग-निवारण रणनीतियों को समझने के लिए आयोजित किया गया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व और संरचना
इस अध्ययन दौरे का नेतृत्व सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के द्वितीय सचिव ई. रवींद्रन और स्वास्थ्य सेवा आयुक्त एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन डायरेक्टर संजय श्रीपतराव कटकर ने किया। दल में स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल थे।
गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब महाराष्ट्र सरकार अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधारों की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
केरल का फैमिली हेल्थ सेंटर मॉडल
अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र केरल का फैमिली हेल्थ सेंटर (FHC) मॉडल रहा। इस मॉडल के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक ही मंच पर रोग-निवारण, स्वास्थ्य संवर्धन, बीमारी की पहचान, उपचार और फॉलो-अप जैसी समेकित सेवाएँ प्रदान करते हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से यह समझा कि ये केंद्र गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, परामर्श, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल और नियमित फॉलो-अप को एक साथ कैसे संचालित करते हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के कामकाज और सामुदायिक स्तर पर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में उनकी भूमिका की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
ई-हेल्थ केरल: डिजिटल स्वास्थ्य का अनुभव
प्रतिनिधिमंडल ने 'ई-हेल्थ केरल' प्लेटफॉर्म का भी गहन अध्ययन किया। यह एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं को आपस में जोड़ती है और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, रेफरल प्रबंधन तथा मरीज़ों की जानकारी के कुशल संचालन में सहायक है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अनुभव से महाराष्ट्र में इलाज की निरंतरता, रेफरल प्रणाली और मरीज़ फॉलो-अप को सुदृढ़ करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अध्ययन के प्रमुख क्षेत्र
इस स्टडी विजिट में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्रों को शामिल किया गया — गैर-संचारी रोगों के लिए जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग, कैंसर की रोकथाम और देखभाल, मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, टीबी (तपेदिक) उन्मूलन, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस नियंत्रण, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला सेवाएँ, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ, पैलिएटिव केयर, एकीकृत रोग निगरानी और दवा खरीद एवं आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन।
विभाग के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों में सामान्य गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, शीघ्र पहचान, उपचार और फॉलो-अप प्रणालियों की जाँच की।
महाराष्ट्र की अपनी जरूरतों के अनुरूप अनुकूलन
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य केरल मॉडल को हूबहू अपनाना नहीं, बल्कि ऐसे व्यावहारिक और प्रभावी उपायों की पहचान करना था जिन्हें महाराष्ट्र की भौगोलिक, जनसांख्यिकीय और स्वास्थ्य सेवा संबंधी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सके। यह पहल संकेत देती है कि राज्य सरकार साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।