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कूर्मासन: रोज़ाना 10 मिनट का यह योगासन रीढ़, पाचन और मानसिक तनाव तीनों को करता है दुरुस्त

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कूर्मासन: रोज़ाना 10 मिनट का यह योगासन रीढ़, पाचन और मानसिक तनाव तीनों को करता है दुरुस्त

सारांश

कूर्मासन सिर्फ एक आसन नहीं — यह कछुए की तरह भीतर सिमटकर मन और शरीर दोनों को नई ऊर्जा देने की प्राचीन विधि है। रीढ़ से लेकर पाचन और मानसिक शांति तक, इस एक आसन के नियमित अभ्यास से कई समस्याओं का समाधान संभव है।

मुख्य बातें

कूर्मासन संस्कृत शब्द 'कूर्म' (कछुआ) से बना है और इसे कछुआ मुद्रा भी कहते हैं।
आयुष मंत्रालय और प्राचीन योग ग्रंथों के अनुसार यह आसन वात विकारों , पीठ दर्द और पाचन समस्याओं में उपयोगी है।
यह आसन रीढ़ की हड्डी को सीधा करने और उसमें रक्त संचार बढ़ाने में मदद करता है।
मानसिक तनाव , चिंता और एकाग्रता की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए यह आसन प्रभावी माना जाता है।
घुटने, कमर, कंधे या रीढ़ की समस्या वाले लोग, गर्भवती महिलाएँ तथा गंभीर गठिया या सायटिका के मरीज़ बिना विशेषज्ञ सलाह के यह आसन न करें।

कूर्मासन (कछुआ मुद्रा) एक उन्नत योगासन है जो रीढ़ की हड्डी, पाचन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य तीनों पर एक साथ सकारात्मक प्रभाव डालता है। आयुष मंत्रालय और प्राचीन योग ग्रंथों के अनुसार, इस आसन का नियमित अभ्यास वात विकारों को दूर करने, पीठ दर्द घटाने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। व्यस्त और असंतुलित दिनचर्या के बीच यह आसन शरीर व मन दोनों को राहत देने का सरल उपाय है।

कूर्मासन का अर्थ और पौराणिक पृष्ठभूमि

कूर्मासन संस्कृत शब्द 'कूर्म' से बना है, जिसका अर्थ है कछुआ। इसीलिए इसे कछुआ योग भी कहा जाता है। जिस प्रकार एक कछुआ संकट के समय अपने कवच में सिमट जाता है, उसी प्रकार इस आसन का अभ्यास करने वाला साधक मानसिक उथल-पुथल से खुद को अलग कर शांत अवस्था में पहुँच जाता है। प्राचीन योग ग्रंथों में भी इस आसन का विस्तृत वर्णन मिलता है।

शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों और योग ग्रंथों के अनुसार, कूर्मासन के नियमित अभ्यास से मुड़ी हुई रीढ़ की हड्डी सीधी होती है और उसमें रक्त संचार बेहतर होता है। यह आसन पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और मूत्र व यौन विकारों में भी उपयोगी बताया गया है। पीठ दर्द से राहत और रीढ़ में लचीलापन लाना इस आसन के प्रमुख शारीरिक लाभ हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

कूर्मासन को मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद प्रभावशाली माना जाता है। जो लोग लगातार चिंता, तनाव या मानसिक दबाव महसूस करते हैं, उनके लिए यह आसन राहत देने वाला साबित हो सकता है। इसके अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, विचारों की अस्थिरता कम होती है और दिमाग शांत अवस्था में आता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब शहरी जीवनशैली में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

कूर्मासन एक उन्नत आसन है, इसलिए इसे करते समय सावधानी आवश्यक है। जिन लोगों को घुटनों, कमर, कंधे या रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या है, उन्हें किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख के बिना यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर गठिया या सायटिका से पीड़ित व्यक्तियों को भी इससे परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।

नियमित अभ्यास से क्या बदलेगा

विशेषज्ञों के अनुसार, कूर्मासन का रोज़ाना अभ्यास धीरे-धीरे शरीर की लचक बढ़ाता है और वात-जनित विकारों को नियंत्रित करता है। यह आसन न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्तर पर भी संतुलन स्थापित करता है। गौरतलब है कि योग को दिनचर्या में शामिल करने के साथ-साथ संतुलित खान-पान भी उतना ही ज़रूरी है। जो लोग इस आसन को धैर्य और निरंतरता के साथ अपनाएँगे, उन्हें कुछ ही हफ्तों में सकारात्मक बदलाव महसूस हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन्नत आसनों के लिए प्रशिक्षित मार्गदर्शन की उपलब्धता अभी भी टियर-2 और टियर-3 शहरों में सीमित है। बिना विशेषज्ञ निगरानी के ऐसे आसनों को अपनाना चोट का जोखिम बढ़ा सकता है — यह पहलू अक्सर इस तरह की स्वास्थ्य सामग्री में नज़रअंदाज़ हो जाता है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कूर्मासन क्या है और इसे कछुआ योग क्यों कहते हैं?
कूर्मासन एक उन्नत योगासन है जिसमें शरीर की आकृति कछुए जैसी हो जाती है। यह नाम संस्कृत शब्द 'कूर्म' (कछुआ) से आया है, और जिस प्रकार कछुआ संकट में अपने कवच में सिमट जाता है, उसी प्रकार यह आसन साधक को मानसिक अशांति से दूर कर शांत अवस्था में ले जाता है।
कूर्मासन के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
आयुष मंत्रालय और योग ग्रंथों के अनुसार, कूर्मासन वात विकारों को दूर करता है, रीढ़ की हड्डी को सीधा कर उसमें रक्त संचार बढ़ाता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। इसके अलावा यह पीठ दर्द, मूत्र विकारों और मानसिक तनाव में भी राहत देने वाला माना जाता है।
कूर्मासन मानसिक स्वास्थ्य के लिए कैसे फायदेमंद है?
कूर्मासन के नियमित अभ्यास से मन शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और चिंता व मानसिक दबाव कम होता है। लगातार तनाव महसूस करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से राहतकारी बताया जाता है।
कूर्मासन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
घुटनों, कमर, कंधे या रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और गंभीर गठिया या सायटिका से पीड़ित व्यक्तियों को भी इससे परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।
कूर्मासन का अभ्यास कितने समय में असर दिखाता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, धैर्य और निरंतरता के साथ नियमित अभ्यास करने पर कुछ हफ्तों में सकारात्मक बदलाव महसूस हो सकते हैं। हालाँकि परिणाम व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और अभ्यास की नियमितता पर निर्भर करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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