वाई-ब्रेक: आयुष मंत्रालय का योग फॉर्मूला जो लंबी शिफ्ट में भी रखेगा फिट और फोकस्ड
सारांश
Key Takeaways
- आयुष मंत्रालय का 'वाई-ब्रेक' कार्यालय कर्मचारियों के लिए एक सीट पर बैठे-बैठे किया जाने वाला योग ब्रेक है।
- इसमें ताड़ासन, कटिचक्रासन, ग्रीवा संचालन, नाड़ी शोधन प्राणायाम और सरल ध्यान शामिल हैं।
- दिन में 2 से 3 बार इस ब्रेक को लेने से कमरदर्द, गर्दन की जकड़न और मानसिक तनाव में उल्लेखनीय कमी आती है।
- नियमित अभ्यास से रक्त संचार, एकाग्रता और कार्यक्षमता में सुधार होता है और मोटापे की समस्या भी नियंत्रित रहती है।
- आयुष मंत्रालय ने पूरी विधि और वीडियो अपने यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराए हैं।
- भारत में 60%25 से अधिक कॉर्पोरेट कर्मचारी पीठदर्द और गर्दन दर्द से पीड़ित हैं — 'वाई-ब्रेक' इसी समस्या का समाधान है।
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया 'वाई-ब्रेक' (Y-Break) कार्यालयों में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक क्रांतिकारी योग-आधारित समाधान बनकर उभरा है। यह एक छोटा, सरल और सीट पर बैठे-बैठे किया जाने वाला योग ब्रेक है जो शारीरिक दर्द, मानसिक थकान और घटती एकाग्रता तीनों को एक साथ दूर करता है। भारत सरकार इसे हर कार्यालय कर्मचारी की दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सिफारिश कर रही है।
क्या है 'वाई-ब्रेक' और क्यों है यह जरूरी?
आधुनिक कार्यस्थल संस्कृति में घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत में कॉर्पोरेट और सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारी रोजाना औसतन 8 से 10 घंटे बैठकर काम करते हैं। इससे कमरदर्द, गर्दन की जकड़न, कंधों का दर्द, घुटनों की तकलीफ और मोटापे जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
'वाई-ब्रेक' इसी समस्या का जवाब है। इसमें योगासन, प्राणायाम और ध्यान का एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली संयोजन है जिसे कर्मचारी अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कर सकते हैं। इसके लिए न कोई विशेष स्थान चाहिए, न कोई उपकरण — बस कुछ मिनट की इच्छाशक्ति।
वाई-ब्रेक में शामिल योगाभ्यास
आयुष मंत्रालय ने 'वाई-ब्रेक' की पूरी विधि अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध कराई है। इसमें निम्नलिखित अभ्यास शामिल हैं:
ताड़ासन (बैठे-बैठे): कुर्सी पर सीधे बैठकर शरीर को ऊपर की ओर खींचना, जिससे रीढ़ की हड्डी सक्रिय होती है।
कटिचक्रासन: कमर को धीरे-धीरे दाएं-बाएं घुमाना, जिससे कमरदर्द में राहत मिलती है और पाचन भी सुधरता है।
ग्रीवा संचालन: गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग — आगे-पीछे और दाएं-बाएं झुकाना। यह गर्दन की जकड़न और सिरदर्द से राहत देता है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम: एक नाक से सांस लेकर दूसरी से छोड़ना। यह मानसिक तनाव को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
सरल ध्यान: एक-दो मिनट की आंखें बंद करके गहरी सांस लेने की प्रक्रिया, जो मन को शांत और एकाग्र करती है।
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
नियमित रूप से दिन में दो से तीन बार 'वाई-ब्रेक' लेने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और ऊर्जा का स्तर बना रहता है। लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने की प्रक्रिया तेज होती है, जो मोटापे का कारण बनती है — 'वाई-ब्रेक' इस प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह अभ्यास बेहद कारगर है। तनाव, चिंता और मानसिक थकान में उल्लेखनीय कमी आती है। कर्मचारियों की एकाग्रता और कार्यक्षमता में सुधार होता है और कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनता है।
व्यापक संदर्भ: भारत में कार्यस्थल स्वास्थ्य की चुनौती
गौरतलब है कि भारत में कार्यस्थल तनाव की समस्या लगातार गहरी होती जा रही है। हाल के वर्षों में IT, बैंकिंग और सरकारी क्षेत्रों में कर्मचारियों में हृदय रोग, डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के मामले बढ़े हैं। वर्ष 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60%25 से अधिक कॉर्पोरेट कर्मचारी पीठदर्द और गर्दन दर्द से पीड़ित हैं।
ऐसे में 'वाई-ब्रेक' जैसी पहल केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उत्पादकता को बनाए रखने की एक नीतिगत जरूरत भी है। जब कर्मचारी स्वस्थ होंगे तो संस्थान मजबूत होंगे और देश की अर्थव्यवस्था भी।
आयुष मंत्रालय की अपील
आयुष मंत्रालय ने सभी सरकारी और निजी संस्थानों से अपील की है कि वे अपने कर्मचारियों को 'वाई-ब्रेक' अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। मंत्रालय का मानना है कि यदि देशभर के कार्यालयों में यह अभ्यास नियमित रूप से अपनाया जाए तो स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च कम होगा और कर्मचारियों की जीवन गुणवत्ता में सुधार आएगा। आने वाले समय में मंत्रालय इस कार्यक्रम को और अधिक कार्यस्थलों तक पहुंचाने की योजना बना रहा है।