अलीबाबा ग्रुप ड्रग्स जांच में अमेरिका को ₹5,000 करोड़ से अधिक ($60 करोड़) देगी, नॉन-प्रॉसिक्यूशन समझौता
सारांश
मुख्य बातें
चीनी ई-कॉमर्स दिग्गज अलीबाबा ग्रुप और उसकी अमेरिकी पेमेंट प्रोसेसर इकाई एयूएस मर्चेंट सर्विसेज ने अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के साथ अलग-अलग 'नॉन-प्रॉसिक्यूशन एग्रीमेंट' के तहत कुल 60 करोड़ डॉलर (लगभग ₹5,000 करोड़) चुकाने पर सहमति जताई है। यह समझौता उन आरोपों के निपटारे के लिए किया गया है, जिनमें कहा गया था कि दोनों कंपनियाँ अलीबाबा डॉट कॉम और अलीएक्सप्रेस के ज़रिए अमेरिका में गैर-कानूनी दवाओं और संबंधित उत्पादों की बिक्री व आयात रोकने में विफल रहीं।
समझौते की वित्तीय संरचना
न्याय विभाग के अनुसार, अलीबाबा ग्रुप 12.5 करोड़ डॉलर का आपराधिक जुर्माना और 19 करोड़ डॉलर की जब्ती राशि चुकाएगी। वहीं, एयूएस मर्चेंट सर्विसेज 8.5 करोड़ डॉलर का आपराधिक जुर्माना और 19 करोड़ डॉलर की जब्ती राशि अदा करेगी। इस प्रकार कुल भुगतान 60 करोड़ डॉलर बनता है।
मुख्य आरोप और स्वीकारोक्ति
न्याय विभाग के अनुसार, अलीबाबा ने स्वीकार किया कि जनवरी 2016 से दिसंबर 2024 के बीच वह अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद व्यापारियों को अमेरिका में दवाएँ, सूचीबद्ध रासायनिक पदार्थ और नकली दवाएँ बनाने वाले उपकरण आयात करने से रोकने में नाकाम रही। विभाग ने बताया कि इन लेन-देन का कुल सकल व्यापार मूल्य 20 करोड़ डॉलर से अधिक था। जाँच के दौरान संघीय एजेंटों ने प्रतिबंधित उत्पादों की 40 से अधिक गुप्त खरीदारियाँ कीं।
गौरतलब है कि हालाँकि अलीबाबा के पास ऐसे उत्पादों पर रोक लगाने वाली नीतियाँ मौजूद थीं, कंपनी के कर्मचारियों ने स्वयं चिंता जताई थी कि अनुपालन नियंत्रण अपर्याप्त थे। कुछ व्यापारियों ने अलीबाबा की आंतरिक मैसेजिंग सेवा का उपयोग गैर-कानूनी लेन-देन को आसान बनाने के लिए किया और खरीदारों को एन्क्रिप्टेड थर्ड-पार्टी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भेजा। कंपनी ने यह भी माना कि उसने इन व्यापारियों से सदस्यता, विज्ञापन, मार्केटिंग, शिपिंग और पेमेंट-प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में कमाई की।
एयूएस मर्चेंट सर्विसेज की विफलताएँ
एयूएस मर्चेंट सर्विसेज ने स्वीकार किया कि जनवरी 2020 से दिसंबर 2023 के बीच उसका एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग अनुपालन कार्यक्रम अलीबाबा के कुछ व्यापारियों को प्रतिबंधित उत्पाद बेचने के लिए उसकी पेमेंट प्रोसेसिंग सेवाओं का उपयोग करने से रोकने में विफल रहा। कंपनी ने यह भी माना कि उसके लेन-देन निगरानी प्रणाली ने कुछ वायर-ट्रांसफर डेटा को शामिल नहीं किया, जिससे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों से जुड़े भुगतानों की पहचान नहीं हो पाई। कुछ मामलों में एयूएस द्वारा जाँच और रिपोर्टिंग के बावजूद व्यापारी प्रतिबंधित उत्पाद बेचते रहे।
न्याय विभाग की प्रतिक्रिया
न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा, 'आज का फैसला विभाग की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियाँ अपने मार्केटप्लेस से गैर-कानूनी, बिना मंजूरी वाली, गलत ब्रांडिंग वाली और खतरनाक विदेशी दवाओं को दूर रखें।'
क्रिमिनल डिवीजन के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल टाइसन डुवा ने कहा, 'अगर नियमों का ठीक से पालन न किया जाए तो अपराधी गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने और उनसे मुनाफा कमाने के लिए ई-कॉमर्स साइट्स का इस्तेमाल करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि दोनों कंपनियों ने अपनी स्क्रीनिंग और अनुपालन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के कदमों का विवरण दिया है।
आगे क्या होगा
समझौतों के तहत दोनों कंपनियाँ अनुपालन व्यवस्था को मज़बूत करने, लेन-देन की निगरानी बेहतर बनाने और अमेरिकी अधिकारियों के साथ चल रही व भविष्य की जाँचों में सहयोग जारी रखने पर सहमत हुई हैं। 1999 में चीन में स्थापित अलीबाबा ग्रुप न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज दोनों पर सूचीबद्ध है। न्याय विभाग ने स्पष्ट किया कि इस समझौते के बाद गैर-कानूनी दवाओं और संबंधित उपकरणों के लिए एक और रास्ता बंद हो गया है।