29 अक्टूबर 2026
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यूएसटीआर ने भारत की मत्स्य सब्सिडी को बताया खतरा, 'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' में उठाए सवाल

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यूएसटीआर ने भारत की मत्स्य सब्सिडी को बताया खतरा, 'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' में उठाए सवाल

सारांश

ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' में भारत की मत्स्य सब्सिडी को सीधे निशाने पर लिया गया है। अमेरिका का आरोप है कि इससे भारतीय सीफूड सस्ते में अमेरिकी बाज़ार में आ रहा है। जबकि बांग्लादेश ने प्रतिबद्धता दी, भारत अभी WTO के मंच पर अपना बचाव कर रहा है।

मुख्य बातें

यूएसटीआर ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में भारत की मत्स्य सब्सिडी को अमेरिकी मछुआरों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा का कारण बताया।
23 अक्टूबर को जारी 'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' दस्तावेज़ में भारत का नाम शामिल; व्हाइट हाउस के तथ्यपत्र में नहीं।
भारत अमेरिका को झींगा निर्यात करने वाले शीर्ष देशों में है, और हाल के वर्षों में एंटी-डंपिंग व प्रतिपूरक शुल्क झेल चुका है।
बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी प्रतिबद्धताएँ स्वीकार कीं, जबकि भारत के लिए ऐसी कोई प्रतिबद्धता दर्ज नहीं।
अमेरिका का 2025 में समुद्री खाद्य निर्यात 5.53 अरब डॉलर रहा — 2024 से 12% अधिक।
अमेरिकी कृषि विभाग के ज़रिये सीफूड प्रसंस्करण क्षेत्र को 5 अरब डॉलर से अधिक के गारंटीशुदा ऋण की घोषणा।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में भारत की मत्स्य सब्सिडी नीति को लेकर गंभीर चिंता जताई है, यह दावा करते हुए कि इससे भारतीय समुद्री खाद्य उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में बाज़ार भाव से कम कीमतों पर पहुँच रहे हैं और अमेरिकी मछुआरों की आजीविका प्रभावित हो रही है। यह उल्लेख राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' के तहत 23 अक्टूबर को जारी रणनीति दस्तावेज़ में किया गया है।

रणनीति दस्तावेज़ में क्या कहा गया

यूएसटीआर ने अपने बयान में भारत की व्यापक मत्स्य सब्सिडी और वियतनाम में अवैध, असूचित और अनियमित (आईयूयू) मछली पकड़ने की गतिविधियों का विशेष उल्लेख किया। कार्यालय का कहना है कि ये गतिविधियाँ अमेरिकी मछुआरों और आपूर्ति श्रृंखला को सीधे नुकसान पहुँचाती हैं। गौरतलब है कि उसी दिन जारी व्हाइट हाउस के तथ्यपत्र में भारत या किसी अन्य देश का नाम नहीं लिया गया था — भारत का उल्लेख केवल रणनीति दस्तावेज़ में है।

किन देशों पर उठाई आपत्ति

यूएसटीआर ने भारत और वियतनाम के अलावा जापान तथा यूरोपीय संघ की व्यापार नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। जापान में 10 प्रतिशत तक आयात शुल्क और आयात कोटा अमेरिकी निर्यातकों के लिए बाधा बताए गए हैं, जबकि यूरोपीय संघ की 'कैच स्कीम' अमेरिकी मछुआरों पर अतिरिक्त दस्तावेज़ीकरण की ज़िम्मेदारी डालती है बताई गई है। यूएसटीआर ने यह भी कहा कि जिन उत्पादों के उत्पादन में जहाज़ों पर जबरन श्रम का उपयोग होता है, वे भी अमेरिकी बाज़ार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करते हैं।

भारत के लिए क्या मायने रखता है

भारत अमेरिका को झींगा निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। हाल के वर्षों में भारतीय समुद्री खाद्य निर्यातकों को अमेरिकी बाज़ार में सामान्य शुल्कों के साथ-साथ एंटी-डंपिंग और प्रतिपूरक शुल्कों का भी सामना करना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देश बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी प्रतिबद्धताएँ स्वीकार कर ली हैं, जबकि रणनीति दस्तावेज़ में भारत के लिए ऐसी किसी प्रतिबद्धता का उल्लेख नहीं है।

भारत का पक्ष और WTO रुख

भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अपनी मत्स्य सहायता नीति का बचाव करता रहा है। भारतीय पक्ष का तर्क है कि यह सहायता लाखों छोटे और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका के लिए अपरिहार्य है और इसे वाणिज्यिक उत्पादन से जोड़कर देखना उचित नहीं है। ऐसे में अमेरिकी रणनीति दस्तावेज़ में यह उल्लेख भारत-अमेरिका समुद्री खाद्य व्यापार विवाद को एक नई परत दे सकता है।

अमेरिकी सीफूड उद्योग को नई सहायता

व्हाइट हाउस के तथ्यपत्र के अनुसार, नई रणनीति का उद्देश्य आयात प्रमाणन और नियम-अनुपालन को मज़बूत करना है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी कृषि विभाग के माध्यम से मांस और समुद्री खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए 5 अरब डॉलर से अधिक के गारंटीशुदा ऋण उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई है। यूएसटीआर के अनुसार, वर्ष 2025 में अमेरिका का समुद्री खाद्य निर्यात 5.53 अरब डॉलर रहा, जो 2024 की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। आगे यह देखना होगा कि भारत इस रणनीति का औपचारिक जवाब देता है या नहीं, और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में मत्स्य सब्सिडी का मुद्दा किस रूप लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस रणनीति दस्तावेज़ में उसका नाम आना संकेत है कि आने वाली व्यापार वार्ताओं में सीफूड एक नया मोर्चा बन सकता है। चिंताजनक पहलू यह है कि पड़ोसी बांग्लादेश ने प्रतिबद्धता देकर खुद को इस सूची से बाहर किया, जबकि भारत अभी तक प्रतीक्षारत है। अगर भारत सक्रिय रूप से द्विपक्षीय सहमति नहीं बनाता, तो झींगा निर्यातकों पर नए शुल्क या प्रतिबंधों का जोखिम बढ़ सकता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएसटीआर ने भारत की मत्स्य सब्सिडी पर क्यों आपत्ति जताई?
यूएसटीआर का आरोप है कि भारत की मत्स्य सब्सिडी के कारण भारतीय समुद्री खाद्य उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में बाज़ार भाव से कम कीमतों पर पहुँचते हैं, जिससे अमेरिकी मछुआरों और आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान होता है। यह उल्लेख 23 अक्टूबर 2026 को जारी 'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' दस्तावेज़ में किया गया है।
भारत अपनी मत्स्य सब्सिडी का बचाव कैसे करता है?
भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अपनी मत्स्य सहायता नीति का बचाव करता आया है। उसका तर्क है कि यह सहायता लाखों छोटे और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका के लिए ज़रूरी है और इसे वाणिज्यिक डंपिंग से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' क्या है?
यह ट्रंप प्रशासन की एक व्यापार नीति है जिसका उद्देश्य आयात प्रमाणन और नियम-अनुपालन को मज़बूत करके अमेरिकी मछुआरों को विदेशी अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाना है। इसके तहत अमेरिकी कृषि विभाग के माध्यम से सीफूड प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए 5 अरब डॉलर से अधिक के गारंटीशुदा ऋण की भी घोषणा की गई है।
बांग्लादेश ने अमेरिका को क्या प्रतिबद्धता दी जो भारत ने नहीं दी?
बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई है। रणनीति दस्तावेज़ में भारत के लिए ऐसी किसी प्रतिबद्धता का उल्लेख नहीं है, जो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में सीफूड को एक लंबित मुद्दा बनाता है।
भारत के झींगा निर्यातकों पर इस रणनीति का क्या असर पड़ सकता है?
भारत अमेरिका को झींगा निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में है और पहले से ही एंटी-डंपिंग व प्रतिपूरक शुल्कों का सामना कर रहा है। यूएसटीआर के रणनीति दस्तावेज़ में भारत का नाम आने से भविष्य की व्यापार वार्ताओं में नए शुल्क या प्रतिबंधों का जोखिम बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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