बांग्लादेश के 'ग्रीन' शिप-ब्रेकिंग यार्ड: 84 दुर्घटनाएँ, 15 मौतें — ग्रीनवाशिंग के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के सीताकुंडा स्थित फिरदौस स्टील शिप रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज में 14 अगस्त 2026 को एक कबाड़ हो चुके जहाज के बंद टैंक में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस के संपर्क में आने से नौ मजदूरों की मौत हो गई — और इस त्रासदी ने एक बार फिर उजागर कर दिया कि बांग्लादेश के 'ग्रीन' शिप-ब्रेकिंग यार्ड के दावे ज़मीनी हकीकत से कितने दूर हैं। बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर स्टडीज (BILS) के आँकड़ों के अनुसार, 26 जून 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच कुल 84 दुर्घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिनमें 15 मजदूरों की जान गई और 81 घायल हुए।
मुख्य घटनाक्रम
भाटियारी, सीताकुंडा में हुई इस घटना में मजदूर एमटी रासी नामक एक पुराने एलएनजी कैरियर को तोड़ने का काम कर रहे थे। विस्फोटक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जहाज के एक बंद टैंक के भीतर जमा हाइड्रोजन सल्फाइड गैस के संपर्क में आने से यह हादसा हुआ। यह जहाज जुलाई 2025 में चट्टोग्राम एंकरेज पहुँचा था और उसी महीने के अंत में तोड़ने के लिए किनारे पर लाया गया था।
डेली स्टार के आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अधिकांश दुर्घटनाएँ गर्डर और भारी वस्तुओं के गिरने, क्रेन या तार के फेल होने और गैस विस्फोट के कारण हुईं।
ग्रीन सर्टिफिकेशन और असलियत का अंतर
बांग्लादेश ने अपने कुल 31 शिप-ब्रेकिंग यार्ड में से 23 को कागजों पर 'ग्रीन' घोषित किया है। यह दर्जा हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन के अनुपालन के आधार पर दिया गया है — वह वैश्विक संधि जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने मई 2009 में अपनाया और जो 26 जून 2025 को लागू हुई। इस कन्वेंशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहाजों को तोड़ने की प्रक्रिया से मानव स्वास्थ्य, मजदूर सुरक्षा या पर्यावरण को नुकसान न हो।
गौरतलब है कि हांगकांग कन्वेंशन लागू होने के महज़ डेढ़ साल के भीतर 84 दुर्घटनाएँ दर्ज होना इन 'ग्रीन लाइसेंस' की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बांग्लादेश एनवायरनमेंटल लॉयर्स एसोसिएशन (BELA) जैसे विशेषज्ञ समूहों का तर्क है कि हांगकांग कन्वेंशन का अनुपालन पर्याप्त नहीं है और शिपयार्डों को अधिक कड़े बेसल कन्वेंशन का भी पालन करना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि इन यार्डों को दिए गए 'ग्रीन लाइसेंस' वास्तव में ग्रीनवाशिंग से अधिक कुछ नहीं — यानी पर्यावरणीय अनुपालन के भ्रामक और अतिरंजित दावे।
आम मजदूरों पर असर
शिप-ब्रेकिंग उद्योग में काम करने वाले मजदूर अक्सर अनौपचारिक क्षेत्र से आते हैं और उनके पास सुरक्षा उपकरणों तक सीमित पहुँच होती है। BILS के आँकड़े बताते हैं कि हादसों की दर लगातार ऊँची बनी हुई है — 84 दुर्घटनाओं में 15 मौतें और 81 घायल, यानी औसतन हर दो हफ्ते में एक बड़ा हादसा। यह ऐसे समय में आया है जब अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंपनियाँ अपने पुराने जहाजों को तोड़ने के लिए बांग्लादेश को प्राथमिकता दे रही हैं।
क्या होगा आगे
14 अगस्त की घटना के बाद बांग्लादेशी अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है कि वे शिपयार्डों की सुरक्षा जाँच को सख्त करें। हालाँकि, अब तक किसी ठोस नीतिगत कदम की घोषणा नहीं की गई है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संगठन और श्रम अधिकार समूह इस मामले पर नज़र बनाए हुए हैं और बेसल कन्वेंशन के अनुपालन की माँग तेज़ होने की संभावना है।