बांग्लादेश में खसरे से 545 बच्चों की मौत, 24 घंटे में 17 और मृत्यु; यूनिसेफ ने चेताया था
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का संकट गहराता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 2026 से अब तक देशभर में 545 बच्चों की मौत हो चुकी है — जिनमें 458 संदिग्ध और 87 पुष्ट खसरा जनित मौतें शामिल हैं। 25 मई को जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 17 और मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें 16 संदिग्ध और 1 पुष्ट मामला शामिल है।
मुख्य घटनाक्रम
DGHS के हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर और कंट्रोल रूम द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से अब तक देश में 64,940 संदिग्ध और 8,719 पुष्ट खसरा संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। केवल 24 मई सुबह 8 बजे से 25 मई सुबह 8 बजे के बीच 1,127 नए संदिग्ध और 97 पुष्ट मामले दर्ज किए गए।
ढाका डिवीजन सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बनकर उभरा है, जहाँ उक्त 24 घंटों में 6 संदिग्ध मौतें दर्ज हुईं। अकेले ढाका जिले में 5 मौतें हुईं।
अस्पताल में भर्ती और उपचार की स्थिति
DGHS के अनुसार, 15 मार्च से अब तक 51,585 संदिग्ध मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 47,619 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कई बच्चे जब तक बड़े अस्पतालों तक पहुँचते हैं, तब तक उनमें निमोनिया और सांस लेने की गंभीर समस्याएँ विकसित हो चुकी होती हैं, जिससे उपचार कठिन हो जाता है और रोकी जा सकने वाली मौतें बढ़ जाती हैं।
यूनिसेफ की चेतावनी और सरकार की विफलता
यूनिसेफ ने कहा है कि उसने अंतरिम सरकार के कार्यकाल में बार-बार आगाह किया था। ढाका में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बांग्लादेश में यूनिसेफ प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने कहा, '2024 से ही हम सरकार को आगाह कर रहे थे कि वैक्सीन की कमी बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। 2024 से 2026 तक हमने लगातार पत्र भेजे और कई बैठकों में यह स्पष्ट किया कि वैक्सीन की तत्काल खरीद जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।'
राणा फ्लावर्स ने बताया कि यूनिसेफ ने इस विषय पर स्वास्थ्य मंत्रालय को 5 से 6 पत्र भेजे थे और अंतरिम सरकार के दौरान 10 बैठकों में यह मुद्दा उठाया गया था। यूनिसेफ के उप कार्यकारी निदेशक ने भी पिछले वर्ष अगस्त में बांग्लादेश दौरे के दौरान विदेश मंत्रालय के साथ बैठक में वैक्सीन संकट पर गंभीर चिंता जताई थी।
आम जनता पर असर
यह संकट मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित कर रहा है। वैक्सीन की अनुपलब्धता और समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में परिवारों पर गहरा असर पड़ रहा है। गौरतलब है कि खसरा एक ऐसी बीमारी है जिसे टीकाकरण से लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है — यह प्रकोप इसलिए और भी गंभीर माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक टीकाकरण अभियान व्यापक पैमाने पर नहीं चलाया जाता, मामलों में और वृद्धि की आशंका बनी रहेगी। यूनिसेफ और अन्य अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं से अपेक्षा है कि वे बांग्लादेश सरकार के साथ मिलकर आपातकालीन वैक्सीन आपूर्ति सुनिश्चित करें।