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भारत-ईरान-आर्मेनिया त्रिपक्षीय परामर्श: क्या क्षेत्रीय सहयोग को नई गति मिलेगी?

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भारत-ईरान-आर्मेनिया त्रिपक्षीय परामर्श: क्या क्षेत्रीय सहयोग को नई गति मिलेगी?

सारांश

भारत, ईरान और आर्मेनिया के बीच त्रिपक्षीय परामर्श बैठक ने क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा दी। इस बैठक में आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई, जो सभी तीन देशों के लिए महत्वपूर्ण है। जानिए इस बैठक के प्रमुख बिंदुओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में।

मुख्य बातें

त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
आईएनएसटीसी परियोजना से व्यापार में वृद्धि की संभावना है।
जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर एकजुटता से चर्चा की गई।
अगली बैठक 2026 में आर्मेनिया में होगी।
आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग को विस्तार देने पर जोर दिया गया।

नई दिल्ली, 9 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत, ईरान और आर्मेनिया के बीच तीसरी त्रिपक्षीय परामर्श बैठक 8 सितंबर 2025 को तेहरान में संपन्न हुई। यह बैठक तीनों देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुई।

इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के संयुक्त सचिव (पीएआई) आनंद प्रकाश, ईरान के विदेश मंत्रालय के दक्षिण एशिया महानिदेशक मोहम्मद रेजा बहरामी और आर्मेनिया के विदेश मंत्रालय की एशिया-प्रशांत विभाग की प्रमुख अनाहित करापेत्यान ने की।

तीनों देशों ने त्रिपक्षीय परामर्श के नियमित आयोजन पर संतोष व्यक्त किया और येरेवन में अप्रैल 2023 में हुई पहली बैठक तथा दिसंबर 2024 में नई दिल्ली में आयोजित दूसरी बैठक के निर्णयों की समीक्षा की। इन बैठकों से प्राप्त प्रगति पर चर्चा करते हुए, प्रतिनिधियों ने आपसी हितों की रक्षा और काकेशस तथा मध्य एशिया क्षेत्र में समृद्धि व कल्याण को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

बैठक में संपर्क (कनेक्टिविटी) के मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया गया। अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) को मज़बूत करने और आर्मेनिया की महत्वाकांक्षी 'क्रॉस रोड ऑफ पीस' परियोजना में सहयोग के विस्तार पर सहमति बनी। आईएनएसटीसी, जो भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह से जोड़ता है, क्षेत्रीय व्यापार को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आर्मेनिया की 'क्रॉस रोड ऑफ पीस' परियोजना काकेशस को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने का एक नया माध्यम है, जिसमें भारत की रुचि निवेश और तकनीकी सहयोग के रूप में बढ़ रही है। दोनों पक्षों ने ऊर्जा, कृषि और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित आर्थिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में नई पहलों की समीक्षा की। ईरान ने चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत की भागीदारी का स्वागत किया, जबकि आर्मेनिया ने आईटी और पर्यटन क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा।

इसके अलावा, तीनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और ऊर्जा सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की। भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत इन देशों के साथ संबंधों को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। बैठक के अंत में, अगले त्रिपक्षीय परामर्श के आयोजन पर सहमति बनी, जो 2026 में आर्मेनिया में होगा। यह निर्णय त्रिपक्षीय ढांचे को और संस्थागत बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ईरान और आर्मेनिया ने क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यह सहयोग न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सुरक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है। इन देशों के बीच संबंधों में विकास की संभावना उज्ज्वल है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत, ईरान और आर्मेनिया के बीच त्रिपक्षीय परामर्श का उद्देश्य क्या है?
इस त्रिपक्षीय परामर्श का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और सामरिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।
इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
बैठक में संपर्क, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
अगली त्रिपक्षीय परामर्श कब होगी?
अगली त्रिपक्षीय परामर्श 2026 में आर्मेनिया में आयोजित की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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