कलात में जबरन बेदखली पर बलोच यकजेहती कमेटी का विरोध, पाकिस्तान पर 'नरसंहार नीति' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान के कलात जिले में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा जारी जबरन बेदखली के आदेश के खिलाफ मानवाधिकार संगठन बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। BYC ने इस कदम को बलोच नागरिकों के विरुद्ध 'राज्य दमन, सामूहिक सजा और नरसंहार की नीति' का हिस्सा करार दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
बेदखली आदेश का विवरण
BYC के अनुसार, कलात के सहायक आयुक्त ने 20 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी किया, जिसमें स्थानीय आबादी को 28 सितंबर 2026 तक शोर परोद, खलीली, खलख्ती और शोकी इलाकों को खाली करने का निर्देश दिया गया। संगठन ने इस आदेश को तत्काल वापस लेने की माँग की है। संगठन का कहना है कि स्थानीय निवासियों को उनकी पैतृक भूमि और घरों से बेदखल करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उनके जीवन और पहचान पर सीधा आघात है।
BYC के गंभीर आरोप
बलोच यकजेहती कमेटी ने कहा, 'पूरी आबादी को जबरन उनकी पैतृक जमीन, घरों और आजीविका से विस्थापित करना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि अपनी ही जमीन पर स्थानीय आबादी के जीवन, पहचान और अस्तित्व पर सीधा हमला है।' संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि किसी व्यक्ति या समूह की कार्रवाइयों के लिए पूरी आबादी को जिम्मेदार ठहराना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सामूहिक दंड की श्रेणी में आता है। BYC ने चेताया कि जब यह प्रथा एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान वाली आबादी को लगातार विस्थापित करने, आर्थिक संसाधनों से वंचित करने और सामाजिक ढाँचे को ध्वस्त करने का रूप लेती है, तो यह 'नरसंहार की व्यापक प्रक्रिया' से जुड़ जाती है।
व्यापक दमन का पैटर्न — संगठन का दावा
बलूचिस्तान के कई अन्य क्षेत्रों में हो चुके जबरन विस्थापन का हवाला देते हुए BYC ने कहा कि ये कदम पाकिस्तानी अधिकारियों के दमन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं। संगठन ने कहा, 'लोगों को उन बस्तियों से बेदखल करना, जहाँ उनके घर, जमीन, आजीविका और पीढ़ियों का जीवन जुड़ा है, सिर्फ उन्हें बेघर करना नहीं, बल्कि उन्हें धीमी मौत के हवाले करना है।' BYC ने यह भी कहा कि सामूहिक दंड का उद्देश्य लोगों में भय उत्पन्न करना, असहमति को दबाना और सामूहिक प्रतिरोध को खत्म करना है।
माँगें और आगे की राह
BYC ने पाकिस्तानी अधिकारियों से जबरन बेदखली का आदेश तत्काल वापस लेने, स्थानीय आबादी को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें अपने घरों व पैतृक इलाकों में 'स्वतंत्रता, गरिमा और सुरक्षा' के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित करने की माँग की है। गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बलूचिस्तान में मानवाधिकार संगठनों की गतिविधियाँ और उनके आरोप आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींच सकते हैं।