23 सितंबर 2026
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कलात में जबरन बेदखली पर बलोच यकजेहती कमेटी का विरोध, पाकिस्तान पर 'नरसंहार नीति' का आरोप

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कलात में जबरन बेदखली पर बलोच यकजेहती कमेटी का विरोध, पाकिस्तान पर 'नरसंहार नीति' का आरोप

सारांश

बलूचिस्तान के कलात में 28 सितंबर तक चार इलाके खाली करने का आदेश — BYC ने इसे 'सामूहिक सजा और नरसंहार नीति' बताया। पाकिस्तान पर यह आरोप ऐसे समय आया है जब बलूचिस्तान में विस्थापन के मामले अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन रहे हैं।

मुख्य बातें

कलात जिले के सहायक आयुक्त ने 20 सितंबर 2026 को स्थानीय आबादी को 28 सितंबर तक शोर परोद, खलीली, खलख्ती और शोकी इलाके खाली करने का आदेश जारी किया।
मानवाधिकार संगठन बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने इस आदेश को 'राज्य दमन, सामूहिक सजा और नरसंहार की नीति' का हिस्सा बताया।
BYC ने आरोप लगाया कि यह कदम बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारियों के जबरन विस्थापन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा है।
संगठन ने बेदखली आदेश को तत्काल वापस लेने और स्थानीय आबादी को सुरक्षा व गरिमा के साथ जीने का अधिकार देने की माँग की।
पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बलूचिस्तान के कलात जिले में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा जारी जबरन बेदखली के आदेश के खिलाफ मानवाधिकार संगठन बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। BYC ने इस कदम को बलोच नागरिकों के विरुद्ध 'राज्य दमन, सामूहिक सजा और नरसंहार की नीति' का हिस्सा करार दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

बेदखली आदेश का विवरण

BYC के अनुसार, कलात के सहायक आयुक्त ने 20 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी किया, जिसमें स्थानीय आबादी को 28 सितंबर 2026 तक शोर परोद, खलीली, खलख्ती और शोकी इलाकों को खाली करने का निर्देश दिया गया। संगठन ने इस आदेश को तत्काल वापस लेने की माँग की है। संगठन का कहना है कि स्थानीय निवासियों को उनकी पैतृक भूमि और घरों से बेदखल करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उनके जीवन और पहचान पर सीधा आघात है।

BYC के गंभीर आरोप

बलोच यकजेहती कमेटी ने कहा, 'पूरी आबादी को जबरन उनकी पैतृक जमीन, घरों और आजीविका से विस्थापित करना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि अपनी ही जमीन पर स्थानीय आबादी के जीवन, पहचान और अस्तित्व पर सीधा हमला है।' संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि किसी व्यक्ति या समूह की कार्रवाइयों के लिए पूरी आबादी को जिम्मेदार ठहराना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सामूहिक दंड की श्रेणी में आता है। BYC ने चेताया कि जब यह प्रथा एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान वाली आबादी को लगातार विस्थापित करने, आर्थिक संसाधनों से वंचित करने और सामाजिक ढाँचे को ध्वस्त करने का रूप लेती है, तो यह 'नरसंहार की व्यापक प्रक्रिया' से जुड़ जाती है।

व्यापक दमन का पैटर्न — संगठन का दावा

बलूचिस्तान के कई अन्य क्षेत्रों में हो चुके जबरन विस्थापन का हवाला देते हुए BYC ने कहा कि ये कदम पाकिस्तानी अधिकारियों के दमन के व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं। संगठन ने कहा, 'लोगों को उन बस्तियों से बेदखल करना, जहाँ उनके घर, जमीन, आजीविका और पीढ़ियों का जीवन जुड़ा है, सिर्फ उन्हें बेघर करना नहीं, बल्कि उन्हें धीमी मौत के हवाले करना है।' BYC ने यह भी कहा कि सामूहिक दंड का उद्देश्य लोगों में भय उत्पन्न करना, असहमति को दबाना और सामूहिक प्रतिरोध को खत्म करना है।

माँगें और आगे की राह

BYC ने पाकिस्तानी अधिकारियों से जबरन बेदखली का आदेश तत्काल वापस लेने, स्थानीय आबादी को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें अपने घरों व पैतृक इलाकों में 'स्वतंत्रता, गरिमा और सुरक्षा' के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित करने की माँग की है। गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बलूचिस्तान में मानवाधिकार संगठनों की गतिविधियाँ और उनके आरोप आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींच सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि ये दावे एकपक्षीय हैं और पाकिस्तान सरकार ने अभी तक अपना पक्ष नहीं रखा है। बलूचिस्तान में जबरन विस्थापन की शिकायतें नई नहीं हैं — पिछले दो दशकों में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इसी तरह की घटनाओं पर चिंता जताते रहे हैं, लेकिन जवाबदेही का तंत्र कभी सक्रिय नहीं हुआ। 'नरसंहार' जैसे शब्द का प्रयोग कानूनी रूप से भारी दावा है — इसके लिए अंतरराष्ट्रीय जाँच और स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है, जो अभी तक नहीं हुआ। असली सवाल यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बार केवल बयानबाजी से आगे बढ़ेगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलात जिले में जबरन बेदखली का आदेश क्या है?
बलूचिस्तान के कलात जिले के सहायक आयुक्त ने 20 सितंबर 2026 को शोर परोद, खलीली, खलख्ती और शोकी इलाकों की स्थानीय आबादी को 28 सितंबर तक इलाका खाली करने का आदेश दिया। BYC के अनुसार यह आदेश बिना पर्याप्त कारण बताए जारी किया गया।
बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) कौन है?
बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) एक मानवाधिकार संगठन है जो बलूचिस्तान में कथित राज्य दमन, जबरन विस्थापन और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाता है। यह संगठन बलोच नागरिकों के अधिकारों की वकालत करता है और पाकिस्तानी अधिकारियों की नीतियों की नियमित आलोचना करता है।
BYC ने पाकिस्तान पर 'सामूहिक सजा' का आरोप क्यों लगाया?
BYC का कहना है कि किसी व्यक्ति या समूह की कथित गतिविधियों के लिए पूरी आबादी को विस्थापित करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सामूहिक दंड की श्रेणी में आता है। संगठन का मानना है कि यह कदम बलोच समुदाय में भय फैलाने और उनके प्रतिरोध को कुचलने का प्रयास है।
पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
23 सितंबर 2026 तक पाकिस्तान सरकार की ओर से BYC के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बेदखली आदेश की आधिकारिक वजह भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है।
बलूचिस्तान में जबरन विस्थापन की यह कितनी बड़ी समस्या है?
BYC के अनुसार, कलात की यह घटना बलूचिस्तान के कई अन्य इलाकों में हो चुके जबरन विस्थापन के एक व्यापक और दीर्घकालिक पैटर्न का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पिछले दो दशकों से इस क्षेत्र में ऐसी घटनाओं पर चिंता जताते आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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