कनाडा में बिल सी-9 पारित: हिंदू संगठनों ने सराहा, खालिस्तानी नेटवर्क पर कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कनाडा की संसद ने 20 जून 2026 को बिल सी-9 (कॉम्बैटिंग हेट एक्ट) पारित किया, जिसका उद्देश्य धार्मिक घृणा, उत्पीड़न और कट्टरपंथी गतिविधियों पर कानूनी अंकुश लगाना है। इस कानून के पारित होने पर कनाडा और उत्तरी अमेरिका के प्रमुख हिंदू संगठनों ने संतोष व्यक्त किया और इसे समुदाय की सुरक्षा की दिशा में एक ठोस कदम बताया।
कानून में क्या है खास
बिल सी-9 के तहत धार्मिक और सामुदायिक स्थलों के आसपास बबल-जोन जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जो इन स्थानों तक पहुँच को अवरुद्ध करने या धमकाने की कोशिशों को कानूनी रूप से दंडनीय बनाती है। इसके अलावा, घृणा फैलाने वाले प्रतीकों से जुड़े प्रावधानों का भी विस्तार किया गया है।
एक उल्लेखनीय बदलाव यह है कि कानून में 'स्वास्तिक' शब्द को हटाकर उसके स्थान पर नाज़ी प्रतीक 'हाकेनक्रॉइज' का उपयोग किया गया है — एक ऐसा सुधार जिसे हिंदू, बौद्ध और जैन समुदायों ने लंबे समय से माँगा था, क्योंकि स्वास्तिक उनके लिए शांति और शुभ का पवित्र प्रतीक है।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (CoHNA) ने शनिवार को एक्स पर साझा किए गए बयान में कहा, "धार्मिक नफरत और भेदभाव में चिंताजनक वृद्धि का सामना करने वाले समुदायों में से एक होने के नाते, हिंदू कनाडाई इन सुरक्षा उपायों का स्वागत करते हैं। उम्मीद है कि ये कदम धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित किए बिना सुरक्षा बढ़ाएंगे।"
संगठन ने विशेष रूप से हाल के वर्षों में हिंदू समुदाय को कथित खालिस्तानी चरमपंथी धमकियों का सामना करने के मुद्दे को रेखांकित किया और कहा कि यह कानून उन धमकियों से निपटने में सहायक होगा।
हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन (HCF) ने एक्स पर लिखा, "इस कानून के जरिए कनाडा ने एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा है। लाखों हिंदुओं, बौद्धों और जैन समुदायों के लिए शांति के पवित्र प्रतीक 'स्वास्तिक' शब्द को हटाकर इसके स्थान पर सही घृणा प्रतीक 'हाकेनक्रॉइज' को रखा गया है। यह बदलाव हमारे बहुसांस्कृतिक समाज के सटीकता, सम्मान और समावेशिता जैसे मूल्यों को दर्शाता है।"
खालिस्तानी नेटवर्क पर कार्रवाई की अपील
HCF ने कनाडा सरकार और कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) से कथित खालिस्तानी चरमपंथी नेटवर्क के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने की माँग की। संगठन ने कहा, "हिंदू कनाडाई अब भी कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी समूहों की ओर से लक्षित धमकियों का सामना कर रहे हैं। इन नेटवर्कों पर उत्पीड़न, तोड़फोड़, हिंसा का महिमामंडन और संगठित दुष्प्रचार अभियानों से जुड़े होने के आरोप हैं।"
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि बिल सी-9 कनाडा को मज़बूत कानूनी उपकरण देता है, लेकिन वास्तविक सुरक्षा तभी सुनिश्चित होगी जब इन उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया जाए।
व्यापक समर्थन और आगे की राह
HCF के अनुसार, कनाडा भर के 100 से अधिक संगठनों ने स्वास्तिक-संबंधी संशोधन का समर्थन किया था, और यह परिणाम समुदायों के एकजुट प्रयास का नतीजा है। यह ऐसे समय में आया है जब कनाडा में हिंदू-विरोधी घटनाओं की रिपोर्टें बढ़ी हैं और भारत-कनाडा संबंध कूटनीतिक तनाव के दौर से गुज़र रहे हैं।
गौरतलब है कि बिल सी-9 का पारित होना केवल एक समुदाय विशेष की जीत नहीं, बल्कि कनाडा के बहुसांस्कृतिक ढाँचे को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। अब सभी की नज़रें इस बात पर होंगी कि सरकार इस कानून को ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावशीलता से लागू करती है।