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संयुक्त राष्ट्र में चीन का 65 देशों के साथ संयुक्त भाषण: AI से बाधा-मुक्त निर्माण पर जोर

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संयुक्त राष्ट्र में चीन का 65 देशों के साथ संयुक्त भाषण: AI से बाधा-मुक्त निर्माण पर जोर

सारांश

जिनेवा में UNHRC के 62वें सम्मेलन में चीन ने 65 देशों की ओर से संयुक्त भाषण देकर AI को बाधा-मुक्त निर्माण का माध्यम बताया। चार-सूत्रीय एजेंडे में मानव-केंद्रित AI, डिजिटल समानता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया गया।

मुख्य बातें

UNHRC के 62वें सम्मेलन में 2 जुलाई 2026 को जिनेवा में AI और बाधा-मुक्त निर्माण पर द्विवार्षिक संगोष्ठी आयोजित हुई।
चीनी स्थायी प्रतिनिधि च्या क्वीत ने 65 देशों की ओर से संयुक्त भाषण प्रस्तुत किया।
भाषण में चार-सूत्रीय एजेंडा रखा गया — AI से सुलभता, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण, निष्पक्षता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।
रूस, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, क्यूबा, वेनेजुएला, थाईलैंड और कंबोडिया सहित कई देशों ने संयुक्त भाषण में भागीदारी की।
विकलांगों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के लिए 'सभी के लिए सुलभता' प्रस्ताव के कार्यान्वयन पर विशेष बल दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सम्मेलन में 2 जुलाई 2026 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में तकनीकी सहायता विषय पर द्विवार्षिक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें चीन ने 65 देशों की ओर से संयुक्त भाषण देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से बाधा-मुक्त निर्माण को बढ़ावा देने की अपील की। यह संगोष्ठी 'सभी के लिए सुलभता' प्रस्ताव के कार्यान्वयन पर केंद्रित थी।

संयुक्त भाषण की पृष्ठभूमि

जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और स्विट्जरलैंड में अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में चीन के स्थायी प्रतिनिधि च्या क्वीत ने यह संयुक्त भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी पक्षों से आग्रह किया कि वे AI की क्षमताओं का उपयोग करते हुए बाधा-मुक्त वातावरण के निर्माण को गति दें, जिससे 'सभी के लिए सुलभता' पर पारित प्रस्ताव को व्यावहारिक रूप दिया जा सके।

मुख्य घटनाक्रम और चार-सूत्रीय एजेंडा

संयुक्त भाषण में स्पष्ट किया गया कि 'सभी के लिए सुलभता' विकलांगों, बुजुर्गों और अन्य कमजोर वर्गों सहित हर व्यक्ति के मानवाधिकारों तथा मूलभूत स्वतंत्रताओं के पूर्ण एवं समान उपभोग के लिए अनिवार्य है।

भाषण में चार-सूत्रीय विचार प्रस्तुत किए गए:

पहला — AI के माध्यम से सुलभता को बढ़ावा देकर उच्च गुणवत्ता वाले विकास में नई संभावनाएँ उत्पन्न करना। दूसरा — AI-सक्षम सुलभता में मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए कमजोर समूहों की सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी सुनिश्चित करना, ताकि विकास की उपलब्धियाँ सभी तक पहुँचें। तीसरा — निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों पर टिके रहना, जिससे विभिन्न समूह और देश सुलभ डिजिटल वातावरण तक पहुँच सकें। चौथा — सहिष्णुता को प्रोत्साहित करते हुए डिजिटल विभाजन और असंतुलित विकास को कम करने के लिए AI के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना।

अंतर्राष्ट्रीय समर्थन

रिपोर्टों के अनुसार, इस संयुक्त भाषण को व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। रूस, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, क्यूबा, वेनेजुएला, थाईलैंड और कंबोडिया सहित कई देशों ने इसमें सक्रिय भागीदारी की। विशेष रूप से विकासशील देशों ने इस मंच पर अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा, जो वैश्विक दक्षिण की एकजुटता को दर्शाता है।

आम जनता पर असर

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर AI के नैतिक उपयोग और डिजिटल समावेशन पर बहस तेज हो रही है। यदि इस चार-सूत्रीय एजेंडे पर ठोस कार्रवाई होती है, तो विकासशील देशों में करोड़ों विकलांग और बुजुर्ग नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक बेहतर पहुँच मिल सकती है।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि UNHRC के इस सम्मेलन में पारित सिफारिशें सदस्य देशों के लिए नीति-निर्माण का आधार बनती हैं। अब देखना होगा कि '65 देशों का गठबंधन' इस एजेंडे को आगामी बहुपक्षीय मंचों पर किस प्रकार आगे बढ़ाता है और AI-सुलभता के लिए कोई बाध्यकारी ढाँचा तैयार होता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके राजनयिक आयाम को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — 65 देशों का यह गठबंधन मुख्यतः वैश्विक दक्षिण के देशों से बना है, जो पश्चिमी-नेतृत्व वाले AI शासन ढाँचे के विकल्प के रूप में चीन की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। आलोचकों का कहना है कि चीन में स्वयं AI निगरानी और डिजिटल सेंसरशिप के व्यापक उपयोग को देखते हुए 'डिजिटल समावेशन' की यह वकालत विरोधाभासी है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह चार-सूत्रीय एजेंडा केवल संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों तक सीमित रहता है, या विकासशील देशों में जमीनी स्तर पर विकलांगों की डिजिटल पहुँच में मापनीय सुधार लाता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNHRC के 62वें सम्मेलन में चीन ने किस विषय पर संयुक्त भाषण दिया?
चीन ने 2 जुलाई 2026 को जिनेवा में आयोजित UNHRC की द्विवार्षिक संगोष्ठी में 65 देशों की ओर से AI के माध्यम से बाधा-मुक्त निर्माण को बढ़ावा देने पर संयुक्त भाषण दिया। इसका उद्देश्य 'सभी के लिए सुलभता' प्रस्ताव को व्यावहारिक रूप देना था।
संयुक्त भाषण में क्या चार-सूत्रीय एजेंडा रखा गया?
चार सूत्र थे — AI से सुलभता बढ़ाकर उच्च गुणवत्ता वाले विकास को प्रोत्साहन देना; मानव-केंद्रित AI से कमजोर समूहों की सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करना; निष्पक्षता और न्याय के साथ सभी देशों को सुलभ वातावरण उपलब्ध कराना; और डिजिटल विभाजन कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
'सभी के लिए सुलभता' प्रस्ताव किसके लिए महत्वपूर्ण है?
यह प्रस्ताव विकलांगों, बुजुर्गों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, ताकि वे मानवाधिकारों और मूलभूत स्वतंत्रताओं का पूर्ण एवं समान रूप से उपभोग कर सकें। डिजिटल युग में AI इस लक्ष्य को हासिल करने का प्रमुख माध्यम बताया गया है।
किन देशों ने इस संयुक्त भाषण का समर्थन किया?
रिपोर्टों के अनुसार, रूस, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, क्यूबा, वेनेजुएला, थाईलैंड और कंबोडिया सहित कुल 65 देशों ने इस संयुक्त भाषण में भागीदारी की। विकासशील देशों ने विशेष रूप से सक्रिय भूमिका निभाई।
यह संगोष्ठी क्यों आयोजित की गई थी?
UNHRC के 62वें सम्मेलन के तहत यह द्विवार्षिक संगोष्ठी तकनीकी सहायता के विषय पर आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि AI जैसी उभरती तकनीकें बाधा-मुक्त वातावरण निर्माण में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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