24 अगस्त 2026
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कोनाक्री में लैंडफिल ढहने से 30 की मौत, भारी बारिश में दबीं झोपड़ियाँ

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कोनाक्री में लैंडफिल ढहने से 30 की मौत, भारी बारिश में दबीं झोपड़ियाँ

सारांश

गिनी की राजधानी कोनाक्री में रविवार रात भारी बारिश के दौरान शहर का सबसे बड़ा लैंडफिल ढह गया — 30 जानें गईं, झोपड़ियाँ दबीं। जिन्हें नोटिस मिले थे वे भी वहीं थे। खनिज-संपन्न देश में गरीबी की यह तस्वीर गहरे सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

गिनी की राजधानी कोनाक्री में 24 अगस्त 2026 की रात लैंडफिल दार एस सलाम का कचरा ढेर ढहा।
हादसे में 30 लोगों की मौत और 6 लोग गंभीर रूप से घायल ; कई घर नष्ट।
भारी बारिश के कारण रात करीब दो बजे भूस्खलन जैसी स्थिति बनी, पास की झोपड़ियाँ दबीं।
लैंडफिल के निकट रहने वालों को पहले ही निकासी नोटिस दिए गए थे, फिर भी कई परिवार वहाँ मौजूद थे।
मंत्री डिएनाबू टुरे ने बचे परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का वादा किया।
विश्व बैंक के अनुसार गिनी की 43.7% आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, बावजूद इसके देश में दुनिया का सबसे बड़ा बॉक्साइट भंडार है।

गिनी की राजधानी कोनाक्री में 24 अगस्त 2026 की रात करीब दो बजे भारी बारिश के दौरान शहर के सबसे बड़े लैंडफिल दार एस सलाम में जमा कचरे का विशाल ढेर खिसक गया, जिससे भूस्खलन जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। इस हादसे में अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, रविवार की देर रात भारी वर्षा के कारण दार एस सलाम लैंडफिल का विशाल कचरा ढेर अचानक खिसक गया। इससे आसपास की कई झोपड़ियाँ पलभर में कचरे के नीचे दब गईं। बचाव दल तुरंत मौके पर पहुँचा और मलबे में दबे लोगों को निकालने का काम शुरू किया गया, जो रिपोर्ट लिखे जाने तक जारी था।

हादसे में कई घर भी पूरी तरह नष्ट हो गए। सैन्य इंजीनियरिंग बटालियन के स्वच्छता अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल बाल्डे मामादौ बाइलो ने बताया कि इस लैंडफिल को रविवार से ही बंद किए जाने की योजना पहले से बनाई गई थी।

पूर्व चेतावनी के बावजूद हुआ हादसा

अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लैंडफिल के आसपास रहने वाले निवासियों को पहले ही क्षेत्र खाली करने के नोटिस दिए गए थे। इसके बाद कई परिवार वहाँ से चले भी गए थे। हालाँकि, हादसे के समय भी बड़ी संख्या में लोग उस इलाके में मौजूद थे, जो इस त्रासदी की गंभीरता को और बढ़ा देता है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर लैंडफिल प्रबंधन और शहरी झुग्गी बस्तियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि इस तरह की घटनाएँ — जहाँ अनियोजित बस्तियाँ खतरनाक कचरा स्थलों के निकट बस जाती हैं — एशिया और अफ्रीका के कई देशों में पहले भी जानलेवा साबित हुई हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

घटनास्थल पर पहुँचीं क्षेत्रीय प्रशासन और विकेंद्रीकरण मंत्री डिएनाबू टुरे ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यहाँ बचे हुए सभी परिवारों को किसी दूसरी सुरक्षित जगह पर बसाया जाए।' सरकार ने राहत और पुनर्वास कार्य तेज़ करने का आश्वासन दिया है।

गिनी की विडंबना: संसाधन-संपन्न, फिर भी गरीब

गिनी खनिज संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध देश है। यहाँ बॉक्साइट के दुनिया के सबसे बड़े भंडार मौजूद हैं। इसके अलावा देश में लौह अयस्क, सोना, हीरे और अन्य खनिज भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। बावजूद इसके, विश्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार, देश की 43.7 प्रतिशत आबादी राष्ट्रीय गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिताती है। यही विरोधाभास इस हादसे की पृष्ठभूमि है — जहाँ खनिज संपदा के बावजूद शहर के सबसे बड़े डंप के पास झोपड़ियाँ बसाने को मजबूर परिवार काल का ग्रास बने।

क्या होगा आगे

बचाव अभियान अभी जारी है और मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकार ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का वादा किया है। दार एस सलाम लैंडफिल को अब स्थायी रूप से बंद किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि उन्हें वहाँ रहने देना किसकी जिम्मेदारी थी। बॉक्साइट के दुनिया के सबसे बड़े भंडार वाले देश में 43.7% आबादी का गरीबी रेखा के नीचे होना और शहर के कचरा स्थल के बगल में बसना — यह विरोधाभास नीतिगत प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। पुनर्वास के वादे पहले भी होते रहे हैं; असली परीक्षा अब होगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोनाक्री लैंडफिल हादसा क्या है?
गिनी की राजधानी कोनाक्री में 24 अगस्त 2026 की रात भारी बारिश के दौरान शहर के सबसे बड़े कचरा स्थल दार एस सलाम का विशाल ढेर खिसक गया, जिससे आसपास की झोपड़ियाँ दब गईं और 30 लोगों की मौत हो गई। 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और बचाव कार्य जारी है।
क्या प्रशासन को पहले से खतरे की जानकारी थी?
हाँ, अधिकारियों के अनुसार लैंडफिल के आसपास रहने वाले निवासियों को पहले ही क्षेत्र खाली करने के नोटिस दिए गए थे और लैंडफिल को रविवार से बंद करने की योजना भी बनाई गई थी। इसके बावजूद हादसे के समय कई परिवार वहाँ मौजूद थे।
गिनी सरकार ने हादसे पर क्या कदम उठाए हैं?
क्षेत्रीय प्रशासन और विकेंद्रीकरण मंत्री डिएनाबू टुरे ने घटनास्थल पर पहुँचकर बचे परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने का वादा किया है। राहत और बचाव अभियान जारी है और दार एस सलाम लैंडफिल को स्थायी रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
गिनी इतना गरीब देश क्यों है जबकि वहाँ खनिज संपदा भरपूर है?
विश्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार गिनी की 43.7% आबादी राष्ट्रीय गरीबी रेखा के नीचे है, हालाँकि देश में बॉक्साइट के दुनिया के सबसे बड़े भंडार के साथ-साथ लौह अयस्क, सोना और हीरे भी पाए जाते हैं। खनिज राजस्व का लाभ आम जनता तक न पहुँचना एक दीर्घकालिक नीतिगत समस्या मानी जाती है।
क्या इस तरह के लैंडफिल हादसे पहले भी हुए हैं?
हाँ, विकासशील देशों में अनियोजित लैंडफिल के निकट बसी बस्तियों में ऐसी त्रासदियाँ पहले भी हो चुकी हैं। 2017 में इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में भी एक लैंडफिल ढहने से 100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। यह घटनाएँ शहरी कचरा प्रबंधन और झुग्गी बस्तियों की सुरक्षा पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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