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डीआरसी में इबोला का कहर: 1,792 संक्रमित, 625 मौतें; संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल कार्रवाई की माँग की

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डीआरसी में इबोला का कहर: 1,792 संक्रमित, 625 मौतें; संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल कार्रवाई की माँग की

सारांश

कांगो में इबोला का प्रकोप महज एक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा — यह संघर्ष, विस्थापन और टूटी स्वास्थ्य व्यवस्था का घातक संगम है। 625 मौतें, 34.1% मृत्यु दर और युगांडा तक पहुँचता वायरस — संयुक्त राष्ट्र की तत्काल अपील बताती है कि दुनिया के पास वक्त बहुत कम है।

मुख्य बातें

15 मई 2026 को डीआरसी में इबोला प्रकोप घोषित होने के बाद से 1,792 मामलों की पुष्टि, 625 मौतें दर्ज।
मृत्यु दर 34.1% ; 764 मरीज अभी भी आइसोलेशन या अस्पताल में, 295 ठीक हुए।
प्रकोप का केंद्र इतुरी प्रांत की राजधानी बूनिया है, लेकिन वायरस अन्य प्रांतों में भी फैल रहा है।
पड़ोसी देश युगांडा में 20 मामलों की पुष्टि।
संयुक्त राष्ट्र के टॉम फ्लेचर ने सभी पक्षों से सीमाएँ खुली रखने और फंड तेजी से जारी करने की अपील की।
डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने माना — प्रकोप के चरम का समय बताना अभी संभव नहीं।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप खतरनाक रूप से फैल रहा है — 15 मई 2026 को प्रकोप की आधिकारिक घोषणा के बाद से अब तक 1,792 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है और 625 लोगों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल और इमरजेंसी रिलीफ कोऑर्डिनेटर टॉम फ्लेचर ने 10 जुलाई को जारी बयान में डीआरसी और पड़ोसी देशों में इस महामारी पर तत्काल नियंत्रण पाने की अपील की है।

प्रकोप की वर्तमान स्थिति

इतुरी प्रांत की राजधानी बूनिया इस प्रकोप का मुख्य केंद्र बनी हुई है, लेकिन वायरस अब अन्य प्रांतों में भी पाँव पसार रहा है। डीआरसी के संचार और मीडिया मंत्रालय द्वारा 10 जुलाई को जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 764 मरीज अभी भी आइसोलेशन या अस्पताल में हैं, जबकि 295 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। समग्र मृत्यु दर 34.1 प्रतिशत दर्ज की गई है — जो इस बीमारी की भयावहता को रेखांकित करती है। पड़ोसी देश युगांडा में भी 20 मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

फ्लेचर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हमें डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला की कमर तोड़ने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है। इतुरी प्रांत इस प्रकोप का केंद्र बना हुआ है, लेकिन वायरस दूसरे प्रांतों में भी फैल रहा है, जहाँ संघर्ष और लोगों की लगातार आवाजाही से इसके और फैलने का खतरा बढ़ जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह सिर्फ एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से कहीं ज्यादा है।' गौरतलब है कि इबोला के प्रकोप से पहले ही लाखों लोग संघर्ष, भुखमरी, विस्थापन, कमज़ोर बुनियादी सेवाओं और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं का सामना कर रहे थे।

डीआरसी सरकार की प्रतिक्रिया

डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने बूनिया में पत्रकारों से कहा कि देश में चल रहा इबोला का प्रकोप अभी भी 'बहुत सक्रिय' चरण में है। उन्होंने अधिक आबादी घनत्व, लोगों की निरंतर आवाजाही और स्थानीय सामाजिक कारकों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यह बताना अभी जल्दबाजी होगी कि प्रकोप कब अपने चरम पर पहुँचेगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान

फ्लेचर ने सभी पक्षों से आग्रह किया कि मानवीय और स्वास्थ्य कर्मियों, जरूरी सामान और राहत उपकरणों की सुरक्षित एवं निर्बाध पहुँच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि 'सीमाएँ और सप्लाई रूट खुले रहने चाहिए' और दानदाताओं से अपील की कि वादा किया गया फंड तेजी से राहत कार्यकर्ताओं तक पहुँचाया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र स्वयं अपने इबोला-रोधी प्रयासों को बढ़ा रहा है।

आगे क्या होगा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतुरी जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में वायरस पर काबू पाना अत्यंत कठिन है क्योंकि सशस्त्र समूहों की मौजूदगी स्वास्थ्यकर्मियों की पहुँच को सीमित करती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित और त्वरित प्रतिक्रिया के बिना यह प्रकोप क्षेत्रीय स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान कम है। संयुक्त राष्ट्र की अपील तब तक कागज़ी रहेगी जब तक दानदाता 'वादा किए गए फंड' को वास्तव में समय पर जारी नहीं करते — और यही वह पैटर्न है जो पिछले अफ्रीकी स्वास्थ्य संकटों में बार-बार दोहराया गया है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरसी में इबोला प्रकोप कब शुरू हुआ और अब तक कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
डीआरसी में इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई 2026 को हुई थी। तब से अब तक 1,792 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है और 625 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मृत्यु दर 34.1% दर्ज की गई है।
इबोला प्रकोप का मुख्य केंद्र कहाँ है और क्या यह अन्य देशों में भी फैल रहा है?
इबोला प्रकोप का मुख्य केंद्र डीआरसी का इतुरी प्रांत और उसकी राजधानी बूनिया है। वायरस अब डीआरसी के अन्य प्रांतों में भी फैल रहा है और पड़ोसी देश युगांडा में 20 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र ने इबोला संकट पर क्या माँग की है?
संयुक्त राष्ट्र के इमरजेंसी रिलीफ कोऑर्डिनेटर टॉम फ्लेचर ने सभी पक्षों से मानवीय और स्वास्थ्य कर्मियों की निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करने, सीमाएँ और सप्लाई रूट खुले रखने तथा दानदाताओं से वादा किया गया फंड तत्काल जारी करने की अपील की है।
डीआरसी में इबोला को नियंत्रित करना इतना कठिन क्यों है?
डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा के अनुसार, अधिक जनसंख्या घनत्व, लोगों की निरंतर आवाजाही और स्थानीय सामाजिक कारक समुदाय से जुड़ाव को कठिन बनाते हैं। इसके अलावा, इतुरी जैसे संघर्षग्रस्त इलाकों में सशस्त्र समूहों की मौजूदगी स्वास्थ्यकर्मियों की पहुँच को सीमित करती है।
इबोला प्रकोप में अभी कितने मरीज उपचाराधीन हैं और कितने ठीक हुए हैं?
10 जुलाई 2026 को जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 764 मरीज अभी भी आइसोलेशन या अस्पताल में उपचाराधीन हैं, जबकि 295 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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