30 जून 2026
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बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय पर बढ़ती हिंसा, पेरिस स्थित मानवाधिकार संगठन ने उठाई आवाज़

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बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय पर बढ़ती हिंसा, पेरिस स्थित मानवाधिकार संगठन ने उठाई आवाज़

सारांश

पेरिस में प्राइड मंथ 2026 के समापन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संवाद में JMBF ने खुलासा किया कि बांग्लादेश में 2025 के दौरान 260 मानवाधिकार उल्लंघन दर्ज हुए और 426 से अधिक LGBTQI+ व्यक्ति प्रभावित हुए — हसीना सरकार के पतन के बाद से हालात और बिगड़े हैं।

मुख्य बातें

JMBF ने 30 जून 2026 को पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई।
संगठन की वार्षिक रिपोर्ट 2025 के अनुसार 260 मानवाधिकार उल्लंघन दर्ज, कम से कम 426 LGBTQI+ व्यक्ति प्रभावित।
अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता बढ़ी, हमले और धमकियाँ तेज़ हुईं।
JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने बांग्लादेश दंड संहिता की धारा 377 को औपनिवेशिक कानून बताते हुए इसे निरस्त करने की माँग की।
संगठन ने LGBTQI+ छात्रों की सुरक्षा, नफरती बयानबाज़ी पर रोक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन मज़बूत करने की अपील की।

पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (JMBF) ने बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय के विरुद्ध तेज़ी से बढ़ रही हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से देश में कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते LGBTQI+ व्यक्तियों की सुरक्षा और अधिकारों की स्थिति और अधिक नाज़ुक हो गई है।

पेरिस में अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन

प्राइड मंथ 2026 के समापन पर 30 जून 2026 को पेरिस स्थित LGBTQI+ सेंटर में 'एपेरो-डिबेट: लेस ड्रोइट्स एलजीबीटीक्यूआई+ डान्स ले मोंडे' (दुनिया भर में LGBTQI+ अधिकार) शीर्षक से एक अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका संयुक्त आयोजन सॉलिडेराइट इंटरनेशनल LGBTQI+, एगीर एन्सेम्बल पोर लेस ड्रोइट्स ह्यूमेन्स और LGBTQI+ सेंटर ऑफ पेरिस एंड आइल-डी-फ्रांस ने मिलकर किया।

JMBF के अनुसार, इस कार्यक्रम में LGBTQI+ अधिकार कार्यकर्ता, मानवाधिकार रक्षक, राजनयिक, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि और विभिन्न देशों से आए सहयोगी शामिल हुए। कार्यक्रम में तीन राउंड टेबल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनमें वैश्विक स्तर पर LGBTQI+ समुदाय की चुनौतियों, समानता, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्गों पर विचार-विमर्श हुआ।

औपनिवेशिक कानून और अपराधीकरण पर बहस

JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने 'क्रिमिनलाइजेशन एंड कॉलोनाइजेशन: डीकंस्ट्रक्टिंग एंड रिस्पॉन्डिंग' विषयक चर्चा में भाग लिया। इस सत्र में एंटी-LGBTQI+ कानूनों की औपनिवेशिक उत्पत्ति, उनके दीर्घकालिक प्रभाव और इन कानूनों को चुनौती देने के उपायों पर बात हुई।

शाहनूर ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि बांग्लादेश दंड संहिता की धारा 377 — जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की देन है — आपसी सहमति से बने समान-लिंग संबंधों को आज भी अपराध की श्रेणी में रखती है। उन्होंने कहा, "सेक्शन 377 एक औपनिवेशिक कानून है जिसकी लोकतांत्रिक समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह डर पैदा करता है और LGBTQI+ लोगों के खिलाफ भेदभाव को सही ठहराता है। इसे रद्द किया जाना चाहिए।"

हसीना सरकार के पतन के बाद बिगड़े हालात

शाहनूर ने चेतावनी दी कि अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद से बांग्लादेश में LGBTQI+ व्यक्तियों की स्थिति में तेज़ गिरावट आई है। उनके अनुसार, कट्टरपंथी इस्लामी समूहों की बढ़ती सक्रियता के कारण क्वीर और ट्रांसजेंडर लोगों पर हमले बढ़े हैं, LGBTQI+ कार्यकर्ताओं को धमकियाँ मिल रही हैं, छात्रों को शिक्षण संस्थानों से ज़बरदस्ती निकाला जा रहा है और सोशल मीडिया पर नफरती बयानबाज़ी में भी तीव्र वृद्धि हुई है।

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुज़र रहा है और अल्पसंख्यक समुदायों पर हिंसा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है।

आँकड़े और मानवीय त्रासदी

JMBF की बांग्लादेश में LGBTQI+ अधिकारों की वार्षिक रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2025 में 260 मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए, जिनसे कम से कम 426 LGBTQI+ व्यक्ति प्रभावित हुए। शाहनूर ने कहा, "ये सिर्फ आँकड़े नहीं हैं — ये उन छात्रों की कहानियाँ हैं जिन्हें स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया गया, उन युवाओं की जिन्हें परिवारों ने ठुकरा दिया और उन लोगों की जिन्हें सिर्फ जीवित रहने के लिए अपनी पहचान छिपानी पड़ती है।"

JMBF की माँगें और आगे की राह

संगठन ने बांग्लादेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कई ठोस कदम उठाने की माँग की है — धारा 377 को निरस्त करना, LGBTQI+ व्यक्तियों पर हमलों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना, शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, नफरती बयानबाज़ी पर अंकुश, उग्रवादी हिंसा से निपटना और बांग्लादेश में LGBTQI+ अधिकारों की वकालत करने वालों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन को मज़बूत करना। गौरतलब है कि यह माँगें ऐसे वक्त में उठाई जा रही हैं जब वैश्विक मंच पर मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इन दस्तावेज़ीकृत मामलों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही। हसीना सरकार के पतन को अक्सर 'लोकतांत्रिक बदलाव' के रूप में पेश किया गया, लेकिन अल्पसंख्यक और हाशिये के समुदायों के लिए यह बदलाव और अधिक असुरक्षा लेकर आया है — यह विरोधाभास मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है। धारा 377 जैसे औपनिवेशिक कानूनों का अस्तित्व यह भी दर्शाता है कि कानूनी सुधार के मोर्चे पर बांग्लादेश अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों से भी पीछे है। अंतरराष्ट्रीय दबाव तभी असरदार होगा जब वह ठोस जवाबदेही तंत्र से जुड़े, महज़ संवाद कार्यक्रमों तक सीमित न रहे।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय की स्थिति 2025 में कैसी रही?
JMBF की वार्षिक रिपोर्ट 2025 के अनुसार बांग्लादेश में 260 मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए, जिनसे कम से कम 426 LGBTQI+ व्यक्ति प्रभावित हुए। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता बढ़ने के कारण हमले और धमकियों में वृद्धि हुई है।
बांग्लादेश दंड संहिता की धारा 377 क्या है और इसे क्यों हटाने की माँग हो रही है?
धारा 377 ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से विरासत में मिला कानून है जो आपसी सहमति से बने समान-लिंग संबंधों को अपराध मानता है। JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम का कहना है कि यह कानून LGBTQI+ व्यक्तियों में भय पैदा करता है और उनके खिलाफ भेदभाव को वैधता देता है, इसलिए इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
पेरिस में 30 जून 2026 को कौन-सा कार्यक्रम आयोजित हुआ और उसमें क्या हुआ?
प्राइड मंथ 2026 के समापन पर पेरिस स्थित LGBTQI+ सेंटर में 'एपेरो-डिबेट: दुनिया भर में LGBTQI+ अधिकार' नामक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें तीन राउंड टेबल चर्चाएँ हुईं जिनमें LGBTQI+ अधिकार कार्यकर्ता, राजनयिक और सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों ने वैश्विक चुनौतियों और समाधानों पर विचार-विमर्श किया।
JMBF ने बांग्लादेश सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
JMBF ने धारा 377 को निरस्त करने, LGBTQI+ व्यक्तियों पर हमलों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने, शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, नफरती बयानबाज़ी पर अंकुश लगाने और उग्रवादी हिंसा से निपटने की माँग की है। साथ ही संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश में LGBTQI+ अधिकारों की वकालत करने वालों के लिए समर्थन मज़बूत करने की अपील की है।
हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय पर क्या असर पड़ा?
शाहनूर इस्लाम के अनुसार अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद कट्टरपंथी इस्लामी समूह तेज़ी से सक्रिय हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप क्वीर और ट्रांसजेंडर लोगों पर हमले, कार्यकर्ताओं को धमकियाँ, छात्रों को शिक्षण संस्थानों से निकाला जाना और सोशल मीडिया पर नफरती बयानबाज़ी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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