बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय पर बढ़ती हिंसा, पेरिस स्थित मानवाधिकार संगठन ने उठाई आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस (JMBF) ने बांग्लादेश में LGBTQI+ समुदाय के विरुद्ध तेज़ी से बढ़ रही हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से देश में कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते LGBTQI+ व्यक्तियों की सुरक्षा और अधिकारों की स्थिति और अधिक नाज़ुक हो गई है।
पेरिस में अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन
प्राइड मंथ 2026 के समापन पर 30 जून 2026 को पेरिस स्थित LGBTQI+ सेंटर में 'एपेरो-डिबेट: लेस ड्रोइट्स एलजीबीटीक्यूआई+ डान्स ले मोंडे' (दुनिया भर में LGBTQI+ अधिकार) शीर्षक से एक अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका संयुक्त आयोजन सॉलिडेराइट इंटरनेशनल LGBTQI+, एगीर एन्सेम्बल पोर लेस ड्रोइट्स ह्यूमेन्स और LGBTQI+ सेंटर ऑफ पेरिस एंड आइल-डी-फ्रांस ने मिलकर किया।
JMBF के अनुसार, इस कार्यक्रम में LGBTQI+ अधिकार कार्यकर्ता, मानवाधिकार रक्षक, राजनयिक, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि और विभिन्न देशों से आए सहयोगी शामिल हुए। कार्यक्रम में तीन राउंड टेबल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनमें वैश्विक स्तर पर LGBTQI+ समुदाय की चुनौतियों, समानता, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्गों पर विचार-विमर्श हुआ।
औपनिवेशिक कानून और अपराधीकरण पर बहस
JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने 'क्रिमिनलाइजेशन एंड कॉलोनाइजेशन: डीकंस्ट्रक्टिंग एंड रिस्पॉन्डिंग' विषयक चर्चा में भाग लिया। इस सत्र में एंटी-LGBTQI+ कानूनों की औपनिवेशिक उत्पत्ति, उनके दीर्घकालिक प्रभाव और इन कानूनों को चुनौती देने के उपायों पर बात हुई।
शाहनूर ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि बांग्लादेश दंड संहिता की धारा 377 — जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की देन है — आपसी सहमति से बने समान-लिंग संबंधों को आज भी अपराध की श्रेणी में रखती है। उन्होंने कहा, "सेक्शन 377 एक औपनिवेशिक कानून है जिसकी लोकतांत्रिक समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह डर पैदा करता है और LGBTQI+ लोगों के खिलाफ भेदभाव को सही ठहराता है। इसे रद्द किया जाना चाहिए।"
हसीना सरकार के पतन के बाद बिगड़े हालात
शाहनूर ने चेतावनी दी कि अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद से बांग्लादेश में LGBTQI+ व्यक्तियों की स्थिति में तेज़ गिरावट आई है। उनके अनुसार, कट्टरपंथी इस्लामी समूहों की बढ़ती सक्रियता के कारण क्वीर और ट्रांसजेंडर लोगों पर हमले बढ़े हैं, LGBTQI+ कार्यकर्ताओं को धमकियाँ मिल रही हैं, छात्रों को शिक्षण संस्थानों से ज़बरदस्ती निकाला जा रहा है और सोशल मीडिया पर नफरती बयानबाज़ी में भी तीव्र वृद्धि हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुज़र रहा है और अल्पसंख्यक समुदायों पर हिंसा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है।
आँकड़े और मानवीय त्रासदी
JMBF की बांग्लादेश में LGBTQI+ अधिकारों की वार्षिक रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्ष 2025 में 260 मानवाधिकार उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए, जिनसे कम से कम 426 LGBTQI+ व्यक्ति प्रभावित हुए। शाहनूर ने कहा, "ये सिर्फ आँकड़े नहीं हैं — ये उन छात्रों की कहानियाँ हैं जिन्हें स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया गया, उन युवाओं की जिन्हें परिवारों ने ठुकरा दिया और उन लोगों की जिन्हें सिर्फ जीवित रहने के लिए अपनी पहचान छिपानी पड़ती है।"
JMBF की माँगें और आगे की राह
संगठन ने बांग्लादेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कई ठोस कदम उठाने की माँग की है — धारा 377 को निरस्त करना, LGBTQI+ व्यक्तियों पर हमलों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना, शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, नफरती बयानबाज़ी पर अंकुश, उग्रवादी हिंसा से निपटना और बांग्लादेश में LGBTQI+ अधिकारों की वकालत करने वालों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन को मज़बूत करना। गौरतलब है कि यह माँगें ऐसे वक्त में उठाई जा रही हैं जब वैश्विक मंच पर मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।