20 अगस्त 2026
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लेबनानी सेना को मजबूत करने के लिए फ्रांस का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 17 सितंबर को पेरिस में प्रारंभिक बैठक

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लेबनानी सेना को मजबूत करने के लिए फ्रांस का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 17 सितंबर को पेरिस में प्रारंभिक बैठक

सारांश

फ्रांस ने लेबनानी सेना को संसाधन और प्रशिक्षण दिलाने के लिए 17 सितंबर को पेरिस में प्रारंभिक बैठक बुलाई है — यह तब हो रहा है जब लेबनान-इजरायल वार्ता का आठवाँ दौर अटका है, दक्षिणी लेबनान में हमले जारी हैं, और लेबनानी संसद अध्यक्ष ने इजरायल पर दबाव के लिए सीधे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।

मुख्य बातें

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लेबनानी सेना को सहायता दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी तेज की।
राष्ट्रपति जोसेफ आऊन को 17 सितंबर को पेरिस में प्रारंभिक बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है।
लेबनान-इजरायल वार्ता के आठवें दौर की तारीख अभी तय नहीं, युद्धविराम और सैनिक वापसी पर अनिश्चितता बरकरार।
राष्ट्रपति आऊन की रोम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात; इटली बफर जोन निगरानी में संभावित भूमिका में।
संसद अध्यक्ष नबीह बेरी ने कहा — इजरायल पर प्रभावी दबाव केवल अमेरिका के पास है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लेबनानी सेना को संसाधन, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता दिलाने के उद्देश्य से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की तैयारियाँ तेज कर दी हैं। 20 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, मैक्रों ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आऊन को पत्र भेजकर 17 सितंबर को पेरिस में होने वाली प्रारंभिक बैठक के लिए आमंत्रित किया है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब लेबनान-इजरायल-अमेरिका के बीच व्यापक वार्ता प्रक्रिया गतिरोध में है और बातचीत के आठवें दौर की तारीख अभी तक तय नहीं हो पाई है।

फ्रांस की पहल का उद्देश्य

लेबनान के अखबार 'अन-नहार' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लेबनानी सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित चर्चा होगी। फ्रांस का लक्ष्य केवल सैन्य सहायता तक सीमित नहीं है — इस पहल का व्यापक उद्देश्य लेबनान की राज्य संप्रभुता को पुनर्स्थापित करना और दक्षिणी सीमा पर सरकारी नियंत्रण को सुदृढ़ करना भी है। गौरतलब है कि दक्षिणी लेबनान में इजरायल के हमले अभी भी जारी बताए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति आऊन की रोम यात्रा

रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति जोसेफ आऊन रोम पहुँचे हैं, जहाँ उनकी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात होनी है। इस बैठक में दक्षिणी लेबनान की स्थिति और लेबनान-इजरायल वार्ता प्रक्रिया प्रमुख एजेंडे पर रहने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इटली उन देशों में गिना जाता है जिन्हें दक्षिणी लेबनान में प्रस्तावित बफर जोन के तहत निरस्त्रीकरण की निगरानी में संभावित भूमिका निभाने वाले उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका पर दबाव की माँग

इस बीच, लेबनानी संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी ने अमेरिकन टास्क फोर्स फॉर लेबनान के एक प्रतिनिधिमंडल से स्पष्ट कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई रोकने और अंतरराष्ट्रीय सीमा तक उसकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी दबाव केवल अमेरिका के पास है। यह बयान दर्शाता है कि लेबनान की राजनीतिक नेतृत्व वाशिंगटन की भूमिका को अपरिहार्य मानती है।

वार्ता में गतिरोध की चुनौती

लेबनान-इजरायल के बीच बातचीत के आठवें दौर की तारीख तय न होने से युद्धविराम, इजरायली सैनिकों की वापसी और दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह ऐसे समय में है जब दक्षिणी हिस्से में तनाव का माहौल बरकरार है। आलोचकों का कहना है कि बिना वार्ता में ठोस प्रगति के, फ्रांस की सैन्य-सहायता पहल की प्रभावशीलता सीमित रह सकती है।

आगे की राह

17 सितंबर की पेरिस बैठक को इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया की पहली ठोस कड़ी माना जा रहा है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि फ्रांस की अगुवाई में कितने देश लेबनानी सेना के समर्थन में एकजुट होते हैं और क्या यह प्रयास व्यापक वार्ता प्रक्रिया को नई गति दे पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बिना वार्ता में ठोस प्रगति के, लेबनानी सेना को हथियार और प्रशिक्षण देना ज़मीनी समीकरण कितना बदल सकता है। लेबनान-इजरायल वार्ता के आठ दौर बाद भी गतिरोध बना है — यह दर्शाता है कि समस्या सैन्य क्षमता से अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति की है। नबीह बेरी का अमेरिका से सीधे दबाव की माँग करना संकेत देता है कि लेबनानी नेतृत्व यूरोपीय प्रयासों को पर्याप्त नहीं मानता। फ्रांस की भूमिका तब तक प्रतीकात्मक बनी रह सकती है जब तक वाशिंगटन इजरायल पर ठोस दबाव नहीं बनाता।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्रांस लेबनानी सेना के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन क्यों आयोजित कर रहा है?
फ्रांस का उद्देश्य लेबनानी सशस्त्र बलों के लिए संसाधन, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता जुटाना है ताकि लेबनान की राज्य संप्रभुता और दक्षिणी सीमा पर सरकारी नियंत्रण मजबूत हो सके। यह पहल ऐसे समय में है जब दक्षिणी लेबनान में तनाव और इजरायली हमले जारी बताए जा रहे हैं।
17 सितंबर की पेरिस बैठक में क्या होगा?
यह प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले की प्रारंभिक बैठक है, जिसमें लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आऊन को फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने आमंत्रित किया है। इसमें लेबनानी सेना को सहायता देने की रूपरेखा पर चर्चा होने की संभावना है।
लेबनान-इजरायल वार्ता में गतिरोध क्यों है?
बातचीत के आठवें दौर की तारीख अभी तक तय नहीं हो पाई है, जिससे युद्धविराम, इजरायली सैनिकों की वापसी और दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वार्ता में व्यापक मुद्दों पर सहमति न बन पाना प्रमुख बाधा बताई जा रही है।
इटली की इस पूरे मामले में क्या भूमिका है?
इटली को दक्षिणी लेबनान में प्रस्तावित बफर जोन के तहत निरस्त्रीकरण की निगरानी में संभावित भूमिका निभाने वाले देशों में गिना जा रहा है। राष्ट्रपति आऊन की रोम यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से इसी संदर्भ में बातचीत होनी है।
नबीह बेरी ने अमेरिका से क्या माँग की है?
लेबनानी संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी ने अमेरिकन टास्क फोर्स फॉर लेबनान के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई रोकने और अंतरराष्ट्रीय सीमा तक उसकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी दबाव केवल अमेरिका के पास है। उनका यह बयान यूरोपीय प्रयासों की सीमाओं की ओर भी इशारा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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