जी-7 शिखर सम्मेलन: यूक्रेन को अटूट समर्थन, अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते को 'ऐतिहासिक अवसर' बताया
सारांश
मुख्य बातें
जी-7 के नेताओं ने 17 जून 2026 को एवियन में जारी एक संयुक्त बयान में यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और अमेरिका व ईरान के बीच हाल ही में हुए परमाणु समझौते को एक 'ऐतिहासिक अवसर' करार दिया। बयान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी जताई गई।
यूक्रेन: सैन्य सहायता और कड़े प्रतिबंधों का संकल्प
जी-7 नेताओं ने स्पष्ट किया कि रूस के साथ जारी संघर्ष में वे कीव के साथ एकजुट खड़े हैं। बयान में कहा गया, 'हम, जी-7 के नेता, यूक्रेन की आज़ादी, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उसके साथ अटूट समर्थन के साथ खड़े हैं।' इसके तहत अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियों, इंटरसेप्टर मिसाइलों और लंबी दूरी की सैन्य क्षमताओं की आपूर्ति बढ़ाने का वादा किया गया।
नेताओं ने लाइसेंसिंग व्यवस्था के ज़रिए यूक्रेन में घरेलू सैन्य उत्पादन को प्रोत्साहित करने की भी इच्छा जताई। साथ ही, विशेष रूप से तेल और गैस क्षेत्र को निशाना बनाते हुए रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया गया। यह निर्णय ऐसे समय में आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन से हुए एक समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया।
अमेरिका-ईरान समझौता: परमाणु निरस्त्रीकरण की उम्मीद
मध्य पूर्व के मोर्चे पर जी-7 ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में घोषित समझौते का खुलकर स्वागत किया। नेताओं ने इसे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और उसकी क्षेत्रीय व बैलिस्टिक गतिविधियों से उत्पन्न खतरों से निपटने का एक ऐतिहासिक मौका बताया।
बयान में स्पष्ट किया गया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा — यह जी-7 की अटल स्थिति है। इसके साथ ही, क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक कूटनीतिक ढाँचे का समर्थन किया गया। होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा बहाल करने और वाणिज्यिक शिपिंग पुनः शुरू कराने के लिए फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के प्रयासों की भी सराहना की गई।
लेबनान, गाजा और वेस्ट बैंक पर रुख
क्षेत्रीय संघर्षों पर जी-7 ने लेबनान में तत्काल युद्धविराम की माँग की और हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करने के प्रयासों का समर्थन किया। गाजा में मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण कार्यों में तेज़ी लाने का वादा किया गया। वेस्ट बैंक में हिंसा समाप्त करने की अपील भी बयान में शामिल रही। गौरतलब है कि ये तीनों मुद्दे पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विवाद का केंद्र बने हुए हैं।
हिंद-प्रशांत और उत्तर कोरिया पर चिंता
हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर जी-7 ने पूर्वी और दक्षिण चीन सागर तथा ताइवान जलडमरूमध्य में बल या दबाव के ज़रिए यथास्थिति बदलने की किसी भी एकतरफा कोशिश का विरोध किया। बयान में कहा गया कि इन मुद्दों को केवल शांतिपूर्ण बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए।
नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर गहरी चिंता जताई और कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु-मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई — यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप है। उत्तर कोरिया द्वारा क्रिप्टोकरेंसी की चोरी और साइबर अपराध के विरुद्ध सामूहिक कार्रवाई का भी आह्वान किया गया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और चीन की भागीदारी
बयान के अंत में वैश्विक आर्थिक असंतुलन दूर करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन किया गया। इस महीने की शुरुआत में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित 'ग्लोबल कन्वर्जेंस फॉर ग्रोथ समिट' में चीन की भागीदारी का स्वागत किया गया — जो बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आगे की कूटनीतिक गतिविधियाँ इस बात पर निर्भर करेंगी कि इन प्रतिबद्धताओं को ज़मीनी स्तर पर कितनी तेज़ी से लागू किया जाता है।