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ग्रेट निकोबार और सबांग पोर्ट में तालमेल ज़रूरी: पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला, पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे से पहले बड़ा बयान

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ग्रेट निकोबार और सबांग पोर्ट में तालमेल ज़रूरी: पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला, पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे से पहले बड़ा बयान

सारांश

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे से ठीक पहले पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला ने ग्रेट निकोबार और सबांग पोर्ट को हिंद-प्रशांत के परस्पर पूरक समुद्री केंद्र बनाने की वकालत की — यह बयान भारत की इंडो-पैसिफिक महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत है।

मुख्य बातें

राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने 3 जुलाई को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और सबांग पोर्ट के बीच रणनीतिक तालमेल को अनिवार्य बताया।
ग्रेटर निकोबार से बांदा आचेह की दूरी केवल 100 मील है, जो दोनों देशों को वास्तविक समुद्री पड़ोसी बनाती है।
पीएम मोदी जुलाई में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के दौरे पर जाने वाले हैं; 2018 के बाद यह पहली इंडोनेशिया यात्रा होगी।
जापान की पीएम साने ताकाइची के भारत दौरे को श्रृंगला ने हिंद-प्रशांत में नई रणनीतिक साझेदारी का संकेत बताया।
ईरान के खामेनेई के अंतिम संस्कार में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री डॉ.
पबित्रा मार्गेरिटा को भेजा गया।

राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने 3 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी कार्यक्रम के दौरान कहा कि अब वह समय आ गया है जब ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट प्रोजेक्ट के बीच रणनीतिक तालमेल को ठोस रूप दिया जाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई की शुरुआत में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के दौरे पर रवाना होने वाले हैं।

ग्रेट निकोबार और सबांग पोर्ट: रणनीतिक तालमेल की ज़रूरत

श्रृंगला ने इंडोनेशिया में भारत के राजदूत संदीप चक्रवर्ती के हवाले से कहा कि दोनों बंदरगाहों को समुद्री व्यापार मार्गों में परस्पर पूरक केंद्र बनाया जाना चाहिए। उनके शब्दों में, 'ये जरूरी पोर्ट हैं जिन्हें विकसित किया जा रहा है और हमें एक-दूसरे के पूरक और तालमेल बनाने की जरूरत है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ग्रेटर निकोबार से बांदा आचेह की दूरी महज़ 100 मील है, जो दोनों देशों को वास्तविक समुद्री पड़ोसी बनाती है।

गौरतलब है कि भारत पहले भी सबांग पोर्ट के विकास में सहयोग की दिशा में कदम उठा चुका है। श्रृंगला के अनुसार, इस सहयोग को जारी रखना न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति को मज़बूत करने के लिहाज़ से भी अनिवार्य है।

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का रणनीतिक महत्व

श्रृंगला ने पीएम मोदी के आगामी दौरे को हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ भारत के गहरे जुड़ाव का प्रतीक बताया। उन्होंने याद दिलाया कि मोदी आखिरी बार 2018 में इंडोनेशिया गए थे और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो पिछले वर्ष गणतंत्र दिवस पर भारत के मुख्य अतिथि रहे थे। उन्होंने कहा कि इस दौरे को केवल द्विपक्षीय नज़रिए से नहीं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक पहुँच के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

जापानी प्रधानमंत्री के भारत दौरे पर प्रतिक्रिया

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के भारत दौरे को श्रृंगला ने अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि ताकाइची को 'स्थिरता और निरंतरता के लिए चुनावी जनादेश' मिला है, ठीक वैसे ही जैसे पीएम मोदी को भारत की जनता ने मज़बूत जनादेश दिया है। उनके अनुसार, दोनों नेताओं का एक साथ आना हिंद-प्रशांत क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग से आगे बढ़कर एक नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रखेगा।

ईरान के खामेनेई के अंतिम संस्कार पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की भागीदारी पर श्रृंगला ने कहा कि पीएम मोदी ने इस अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन से सीधे बात करके शोक व्यक्त किया। इसके अलावा, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री डॉ. पबित्रा मार्गेरिटा को अंतिम संस्कार समारोह में भेजा गया। श्रृंगला के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल भारत और ईरान के बीच सभ्यतागत, ऐतिहासिक और समकालीन संबंधों की गहराई को रेखांकित करता है।

आगे क्या होगा

पीएम मोदी का यह तीन-देशीय दौरा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति को नई ऊर्जा देने का अवसर माना जा रहा है। ग्रेट निकोबार और सबांग पोर्ट के बीच संभावित सहयोग ढाँचे पर आगे की बातचीत इस दौरे के दौरान या उसके तत्काल बाद होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिंद-प्रशांत की समुद्री शतरंज में एक निर्णायक मोहरे के रूप में देखा जाना चाहिए। सबांग पोर्ट के साथ तालमेल की बात पहली बार नहीं हो रही — पर अब तक यह इरादा कागज़ों से ज़मीन पर नहीं उतरा। असली परीक्षा यह है कि पीएम मोदी का यह दौरा केवल राजनयिक गर्मजोशी तक सीमित रहता है या दोनों बंदरगाहों के बीच कोई ठोस परिचालन ढाँचा सामने आता है। हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता के बीच, यह तालमेल भारत के लिए रणनीतिक रूप से अपरिहार्य है — देरी की कीमत बढ़ती जा रही है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और सबांग पोर्ट के बीच तालमेल क्यों ज़रूरी है?
ग्रेटर निकोबार से इंडोनेशिया का बांदा आचेह (सबांग पोर्ट के निकट) केवल 100 मील दूर है, जिससे दोनों बंदरगाह हिंद-प्रशांत के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर परस्पर पूरक केंद्र बन सकते हैं। पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला के अनुसार, यह तालमेल भारत और इंडोनेशिया के रणनीतिक एवं समुद्री सहयोग का अनिवार्य हिस्सा है।
पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का रणनीतिक महत्व क्या है?
पीएम मोदी जुलाई 2025 की शुरुआत में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के दौरे पर जाने वाले हैं। यह 2018 के बाद उनकी पहली इंडोनेशिया यात्रा होगी और इसे हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ भारत के गहरे जुड़ाव की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के भारत दौरे का क्या महत्व है?
श्रृंगला के अनुसार, ताकाइची को स्थिरता और निरंतरता का जनादेश मिला है और पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात हिंद-प्रशांत में द्विपक्षीय सहयोग से परे एक नई रणनीतिक साझेदारी की पहचान बनेगी।
ईरान के खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत ने किसे भेजा?
भारत ने बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री डॉ. पबित्रा मार्गेरिटा को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भेजा। पीएम मोदी ने इस अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन से सीधे बात करके शोक व्यक्त किया।
हर्षवर्धन श्रृंगला कौन हैं और उनका यह बयान क्यों अहम है?
हर्षवर्धन श्रृंगला भारत के पूर्व विदेश सचिव और वर्तमान राज्यसभा सांसद हैं। पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे से ठीक पहले भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी कार्यक्रम में उनका यह बयान भारत की हिंद-प्रशांत नीति की दिशा का स्पष्ट संकेत देता है।
राष्ट्र प्रेस
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