प्रशांत महासागर भारत के लिए अहम, न्यूजीलैंड समान विचारधारा वाला साझेदार: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने 11 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र का देश होने के नाते अपने आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर पैनी नजर रखता है। उन्होंने कहा कि प्रशांत महासागर भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और न्यूजीलैंड को भारत हमेशा से इस क्षेत्र की एक प्रमुख, समान सोच वाली शक्ति के रूप में देखता आया है।
रणनीतिक साझेदारी का आधार
टंडन ने कहा, 'भारत हिंद महासागर का देश है। हम आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह सतर्क रहते हैं। प्रशांत महासागर हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है और हमने हमेशा न्यूजीलैंड को इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तथा समान सोच वाली शक्ति के रूप में देखा है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के रूप में दोनों राष्ट्रों के बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंध होना समय की माँग है।
क्रिस्टोफर लक्सन के प्रयासों से मिली नई ऊर्जा
टंडन ने बताया कि न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध अब औपचारिक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुँच चुके हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
आर्थिक सहयोग की संभावनाएँ
विदेश मंत्रालय के सचिव ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के संबंध केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। भारत एक तेजी से विकसित होता विशाल बाजार है जहाँ निवेश और व्यापार के अपार अवसर मौजूद हैं, जबकि न्यूजीलैंड एक उन्नत अर्थव्यवस्था है जिसके पास आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का भंडार है। टंडन ने कहा कि भारत ऐसी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वीजा नीति पर स्पष्ट रुख
वीजा नियमों में लचीलेपन से जुड़े सवाल पर टंडन ने कहा कि वीजा नीति किसी भी देश का संप्रभु निर्णय होती है। उन्होंने कहा, 'जब तक हमारे व्यवसाय सुचारु रूप से काम कर रहे हैं, हमारे छात्रों को पढ़ाई का अवसर मिल रहा है और दोनों देशों द्वारा तय किए गए आदान-प्रदान कार्यक्रम नियोजित रूप से जारी हैं, तब तक किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।' यह बयान उन चिंताओं के संदर्भ में आया जो भारतीय छात्रों और व्यापारियों के बीच न्यूजीलैंड के वीजा प्रावधानों को लेकर समय-समय पर उठती रही हैं।
आगे की राह
टंडन ने संकेत दिया कि भारत और न्यूजीलैंड रणनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक और जन-से-जन संपर्क — सभी मोर्चों पर द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के लिए दृढ़संकल्पित हैं। समुद्री पड़ोसी होने के नाते दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को विस्तार देने की प्रक्रिया जारी रहेगी।