इंडो-पैसिफिक नीति में भारत अमेरिका का आधारस्तंभ: रुबियो का नई दिल्ली में बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने 23 मई 2025 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत के साथ संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर वाशिंगटन की रणनीति की आधारशिला हैं। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले महीनों में दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के संदर्भ में कई नई और महत्वपूर्ण घोषणाएँ करेंगे।
उद्घाटन समारोह में रुबियो का संबोधन
नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के सपोर्ट एनेक्स भवन के उद्घाटन से पूर्व आयोजित समारोह में रुबियो ने इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "यह भारत और अमेरिका के बीच इस महत्वपूर्ण रिश्ते के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। दोनों देशों के बीच संबंध इंडो-पैसिफिक को लेकर हमारी रणनीति की आधारशिला हैं।"
क्वाड बैठक और भारत को प्राथमिकता
रुबियो ने स्मरण कराया कि जनवरी 2025 में विदेश सचिव पद की शपथ लेने के तत्काल बाद उनकी पहली आधिकारिक बैठक वाशिंगटन डीसी में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी, जिसमें भारत भी सहभागी था। इस बैठक के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रुबियो के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। उल्लेखनीय है कि यह ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की भी पहली प्रमुख विदेश नीति बैठक थी।
रुबियो ने कहा, "बहुत से लोग यह नहीं जानते कि शपथ लेने के तुरंत बाद मैं विदेश विभाग पहुँचा और मेरी पहली आधिकारिक बैठक क्वाड की थी। हम ऐसा सिर्फ क्वाड ढाँचे के प्रति प्रतिबद्धता के कारण नहीं कर रहे, बल्कि इसलिए भी कि यह अमेरिका की इंडो-पैसिफिक नीति में भारत की अहम भूमिका का ठोस संकेत है।"
मोदी-ट्रंप व्यक्तिगत संबंध: रिश्तों की नई ऊर्जा
रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों को भारत-अमेरिका साझेदारी की मज़बूती का एक अहम कारक बताया। उन्होंने कहा, "दोनों नेताओं के बीच संबंध पहले कार्यकाल से ही मजबूत रहे हैं। यह रिश्ता अब दूसरे कार्यकाल में भी जारी है और दोनों नेताओं के बीच गहरा जुड़ाव साफ दिखाई देता है। ये दोनों गंभीर नेता हैं, जो केवल अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर काम कर रहे हैं।"
व्यापार, सुरक्षा और वीज़ा: साझेदारी के नए आयाम
रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी कई ऐसे क्षेत्रों में गहरी हुई है जो अक्सर सुर्खियों में नहीं आते। उनके अनुसार, भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से सुरक्षा सहयोग भी सुदृढ़ हुआ है।
इसके साथ ही रुबियो ने 'अमेरिका फर्स्ट' वीज़ा शेड्यूलिंग टूल की शुरुआत का उल्लेख किया, जो व्यापारिक पेशेवरों को प्राथमिकता देगा और कांसुलर व्यवस्था को और सुव्यवस्थित बनाएगा। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यावसायिक आवाजाही को सहज बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक पहल मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
रुबियो की यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई गति देने के संकेत के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच संबंधों के विकास को लेकर और भी घोषणाएँ अपेक्षित हैं, हालाँकि उनके विवरण का अभी खुलासा नहीं किया गया। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी जारी है।