डांगोटे रिफाइनरी: भारत-चीन की मदद से नाइजीरिया बना पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यातक
सारांश
मुख्य बातें
नाइजीरिया मार्च में पहली बार परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बन गया है — और इस ऐतिहासिक बदलाव में भारत और चीन की अहम भूमिका रही है। बिजनेस इनसाइडर अफ्रीका की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह उपलब्धि लागोस स्थित डांगोटे रिफाइनरी की वजह से संभव हुई है, जो अब प्रतिदिन 6,50,000 बैरल की पूरी क्षमता पर काम कर रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखलाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
रिफाइनरी का विस्तार और बाज़ार में पहुँच
अफ्रीका के सबसे धनी व्यक्ति अलीको डांगोटे के स्वामित्व वाली यह रिफाइनरी पश्चिम, मध्य और पूर्वी अफ्रीका में ईंधन की आपूर्ति कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके उत्पाद सेनेगल से मोजाम्बिक तक के बाज़ारों में पहुँच चुके हैं। इसके अलावा, अतिरिक्त खेप नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम सहित यूरोप तथा एशिया के कुछ हिस्सों तक भी पहुँच रही है, जो नाइजीरिया की दशकों पुरानी आयात निर्भरता को पूरी तरह पलट देता है।
भारत और चीन की भूमिका
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस रिफाइनरी के निर्माण में चीनी औद्योगिक क्षमता और भारतीय इंजीनियरिंग विशेषज्ञता का अनूठा संयोजन रहा, जिसने पश्चिमी ठेकेदारों की तुलना में डिलीवरी की गति और परियोजना के पैमाने दोनों में बढ़त दिलाई। परियोजना की शुरुआत से ही आठ से अधिक चीनी कंपनियाँ इसमें शामिल रही हैं। भारत की भूमिका मुख्यतः इंजीनियरिंग प्रबंधन और परियोजना की निरंतरता पर केंद्रित रही। जनवरी 2026 में डांगोटे समूह ने रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स के विस्तार में सहयोग के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) के साथ 35 करोड़ डॉलर का अनुबंध नवीनीकृत किया है।
श्रमिक और प्रशिक्षण कार्यक्रम
निर्माण के चरम पर इस परियोजना में 30,000 से अधिक नाइजीरियाई श्रमिकों के साथ-साथ 6,400 भारतीय और 3,250 चीनी श्रमिक कार्यरत थे। इसके अतिरिक्त, लगभग 11,000 प्रशिक्षित भारतीय श्रमिकों को भी तैनात किया गया था, जिस पर क्षेत्रीय हितधारकों ने सवाल उठाए थे। कंपनी का कहना था कि रिफाइनरी की जटिलता के लिए वैश्विक विशेषज्ञता अनिवार्य थी।
2016 और 2018 के बीच, डांगोटे समूह ने नाइजीरियाई स्नातकों को मुंबई स्थित भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में रिफाइनरी संचालन, रखरखाव और उत्पादन में प्रशिक्षण के लिए भेजा। इस कार्यक्रम में लगभग 800 नाइजीरियाई नागरिकों को 24 महीनों की अवधि में 50-50 के बैचों में प्रशिक्षित किया गया। गौरतलब है कि इस प्रशिक्षण से उन्हें जामनगर रिफाइनरी — जो विश्व का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है — जैसे बड़े पैमाने की रिफाइनिंग प्रणालियों का व्यावहारिक अनुभव मिला।
भारतीय इंजीनियर की केंद्रीय भूमिका
रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि भारतीय इंजीनियर देवकुमार वी. जी. एडविन, जिन्होंने डांगोटे इंडस्ट्रीज में तेल और गैस के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, ने रिफाइनरी के तकनीकी विकास और परिचालन की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। EIL परियोजना प्रबंधन सलाहकार और इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण प्रबंधन सलाहकार के रूप में कार्य करती रहेगी — जो 2024 में शुरू हुए प्रारंभिक चरण में उसकी भूमिका के समान है।
वैश्विक संदर्भ और आगे की राह
यह उपलब्धि ऐसे वैश्विक परिदृश्य में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब हॉर्मुज स्ट्रेट की बाधा ने तेल बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। नाइजीरिया का शुद्ध निर्यातक बनना न केवल उसकी ऊर्जा संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह दक्षिण-दक्षिण सहयोग — विशेषकर भारत-अफ्रीका साझेदारी — का एक सशक्त उदाहरण भी बन गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह मॉडल अन्य अफ्रीकी देशों में दोहराया जा सकता है।