भारत-रूस वर्किंग ग्रुप बैठक: सशस्त्र बलों में सहयोग और 2027 की संयुक्त कार्ययोजना पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 20-21 अगस्त 2026 को आयोजित रूस-भारत अंतर-सरकारी सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग आयोग (IRIGC-M और MTC) के योजना कार्य समूह की बैठक में दोनों देशों ने अपने सशस्त्र बलों के बीच आपसी सहयोग को और गहरा करने के ठोस उपायों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में वर्तमान वर्ष की संयुक्त गतिविधि योजना की समीक्षा की गई और 2027 के लिए नए कदम तय किए गए।
बैठक का मुख्य एजेंडा
दोनों पक्षों ने चालू वर्ष की संयुक्त गतिविधि योजना के परिणामों का आकलन किया और आगामी वर्ष के लिए रणनीतिक प्राथमिकताएँ निर्धारित कीं। भारत में रूसी दूतावास ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर इसकी जानकारी साझा की। बैठक का केंद्रबिंदु दोनों देशों की सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग के नए रास्ते तलाशना था।
अगस्त में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की श्रृंखला
यह बैठक अगस्त में आयोजित रक्षा-केंद्रित वार्ताओं की एक कड़ी है। इससे पहले 4-7 अगस्त तक नई दिल्ली में पाँचवीं भारत-रूस आर्मी लैंड सिस्टम सब-ग्रुप (ALSSG) की बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों ने आपसी विश्वास बढ़ाने और रक्षा औद्योगिक व तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को दोहराया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डीसीओएएस (सीडी और एस) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने किया, जबकि रूसी पक्ष का नेतृत्व रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय के मुख्य बख्तरबंद निदेशालय के उप प्रमुख मेजर जनरल तुफेकची अलेक्जेंडर ने किया।
औद्योगिक और तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्र
7 अगस्त को आयोजित आधुनिकीकरण और औद्योगिक सहयोग पर भारत-रूस कार्य समूह के 12वें सत्र में दोनों देश कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर सहमत हुए। इनमें रेलवे परिवहन, मानवरहित हवाई वाहन (UAV), एसजे-100 रीजनल विमान और महत्वपूर्ण खनिज प्रमुख रहे।
रेलवे के क्षेत्र में बुनियादी ढाँचा सुविधाओं, वंदे भारत ट्रेन परियोजना और सिग्नलिंग उपकरणों पर सहयोग के नए आयामों पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, UAV, 3-डी प्रिंटिंग, 103 यात्री क्षमता वाले नैरो-बॉडी जेट एसजे-100 के उत्पादन और एयरो-इंजन निर्माण में द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाएँ भी तलाशी गईं।
व्यापक रणनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में तेज़ी से बदलाव आ रहा है। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति के तहत रूस के साथ दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ भी संबंध सुदृढ़ कर रहा है। IRIGC-M और MTC का यह ढाँचा दशकों पुरानी उस द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी की संस्थागत रीढ़ है, जिसके तहत भारत को अपने सशस्त्र बलों के लिए बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरण और तकनीक प्राप्त होती रही है।
आगे की राह
दोनों पक्षों द्वारा 2027 के लिए तय किए गए उपाय भारत-रूस रक्षा सहयोग को और अधिक संरचित रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम माने जा रहे हैं। UAV, महत्वपूर्ण खनिज और रीजनल एविएशन जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की बातचीत यह संकेत देती है कि दोनों देश पारंपरिक हथियार आपूर्ति से आगे बढ़कर तकनीकी साझेदारी की नई परतें जोड़ रहे हैं।