खान क्वेस्ट 2025: मंगोलिया में भारतीय सेना ने UN शांति अभियानों की तैयारी की परखी
सारांश
मुख्य बातें
मंगोलिया की राजधानी उलानबतार में 20 जून से 3 जुलाई तक आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'खान क्वेस्ट' के 23वें संस्करण में भारतीय सेना की 40 सदस्यीय टुकड़ी ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों से जुड़े संयुक्त अभ्यासों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इस अभ्यास में गश्त, घेराबंदी एवं तलाशी अभियान तथा मानवीय सहायता कार्यों के ज़रिये बहुराष्ट्रीय सैन्य समन्वय और संचार क्षमता को परखा और मज़बूत किया गया।
भारतीय दल की संरचना और भूमिका
भारतीय सेना की टुकड़ी में जाट रेजिमेंट की एक बटालियन के सैनिकों के साथ-साथ सेना की अन्य शाखाओं और सेवाओं के जवान शामिल हैं। यह दल संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय-7 के तहत शांति समर्थन अभियानों में सहयोग बढ़ाने और आपसी संचालन क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इस अभ्यास में सम्मिलित हुआ।
भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (एडीजीपीआई) ने 25 जून को एक्स पर अभ्यास का वीडियो साझा करते हुए कहा, 'संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में अपने व्यापक अनुभव का लाभ उठाते हुए भारतीय सेना बहुराष्ट्रीय साझेदारियों को मज़बूत करने और बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम मिशन-तैयार टुकड़ियों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।'
अभ्यास में शामिल प्रमुख गतिविधियाँ
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास के दौरान स्थायी और मोबाइल चेक पोस्ट की स्थापना, घेराबंदी एवं तलाशी अभियान, गश्त, शत्रुतापूर्ण क्षेत्रों से नागरिकों की निकासी, आईईडी रोधी अभ्यास, युद्धक्षेत्र प्राथमिक उपचार और घायलों की निकासी जैसे प्रशिक्षण शामिल रहे। इन सभी गतिविधियों का ध्यान संयुक्त योजना निर्माण और सामरिक क्रियान्वयन पर केंद्रित रहा।
मंत्रालय ने कहा कि यह अभ्यास सहभागी देशों को संयुक्त अभियानों से जुड़ी रणनीतियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं के सर्वोत्तम अनुभव साझा करने का अवसर देता है। इससे विभिन्न देशों के सैनिकों के बीच परिचालन तैयारी, आपसी विश्वास और सौहार्द को भी बढ़ावा मिलता है।
खान क्वेस्ट की पृष्ठभूमि
'खान क्वेस्ट' अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2003 में अमेरिका और मंगोलिया की रक्षा सेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के रूप में हुई थी। कालांतर में इसे बहुपक्षीय शांति स्थापना अभ्यास का स्वरूप दिया गया और इस वर्ष इसका 23वाँ संस्करण आयोजित हो रहा है। गौरतलब है कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सर्वाधिक सैनिक भेजने वाले देशों में से एक रहा है, जो इस अभ्यास में उसकी भागीदारी को विशेष महत्त्व देता है।
रणनीतिक महत्त्व
भारतीय सैन्य दल की इस अभ्यास में भागीदारी वैश्विक शांति स्थापना के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और मंगोलिया के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सैन्य कूटनीति को व्यापक बहुपक्षीय ढाँचे में और अधिक सक्रिय रूप से स्थापित कर रहा है। आगामी दिनों में इस अभ्यास के शेष चरण 3 जुलाई तक जारी रहेंगे।