खान क्वेस्ट 2026: उलानबटार में भारतीय सेना की 'कल्चरल ईवनिंग' ने 18 देशों के सैनिकों का दिल जीता
सारांश
मुख्य बातें
मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में जारी बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'खान क्वेस्ट 2026' के दौरान 2 जुलाई 2026 की शाम युद्ध-कौशल से परे भारत की संस्कृति, संगीत और स्वाद की बारी थी। भारतीय सेना ने एक भव्य 'इंडिया कल्चरल ईवनिंग' का आयोजन किया, जिसमें 18 देशों के सैनिकों को भारत की विविध परंपराओं से सीधे रूबरू कराया गया।
देशभक्ति गीत से हुई भव्य शुरुआत
कार्यक्रम का आगाज़ भारतीय दल के देशभक्ति गीत से हुआ, जिसने पूरे हॉल को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया। भारतीय सैनिकों की सामूहिक प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि भारतीय सेना अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कितनी गहराई से जुड़ी है। इसके बाद मंच पर पारंपरिक भारतीय युद्ध कलाओं का प्रदर्शन हुआ — तेज गति, अनुशासन और कौशल से भरपूर इस प्रस्तुति ने विदेशी सैनिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कई सैन्य अधिकारियों ने भारतीय योद्धा परंपराओं की समृद्ध विरासत की सराहना की और कहा कि यह प्रदर्शन भारत की ऐतिहासिक सैन्य संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।
भांगड़े की धुन पर थिरके विदेशी सैनिक
शाम का सबसे जोशीला पल तब आया जब मंच पर पंजाब की पहचान माने जाने वाले भांगड़ा की प्रस्तुति शुरू हुई। ढोल की थाप और उत्साहवर्धक संगीत ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। भारतीय सैनिकों का जोश देखकर कई विदेशी सैनिक भी खुद को रोक नहीं पाए और भांगड़े की धुन पर थिरकने लगे। भाषा और सीमाओं की दीवारें पल भर में गायब हो गईं और पूरा आयोजन एक वैश्विक परिवार की तरह नज़र आया।
गोलगप्पे से ठंडाई तक — भारतीय व्यंजनों की धूम
शाम का सबसे चर्चित हिस्सा रहा भारतीय व्यंजनों का विशेष आयोजन। भारतीय सेना ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लोकप्रिय व्यंजन परोसे। जैसे ही गोलगप्पे सामने आए, विदेशी सैनिकों की उत्सुकता बढ़ गई — किसी ने पहली बार तीखा-खट्टा स्वाद चखा तो किसी ने बार-बार माँग की। पापड़ी चाट, भेलपुरी, चूरमा, ठंडाई और आम पन्ना भी प्रतिभागियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कई विदेशी सैनिकों ने भारतीय भोजन को स्वाद और विविधता का अद्भुत मिश्रण बताया।
सांस्कृतिक कूटनीति का जीवंत उदाहरण
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न देशों के सैनिकों ने भारतीय दल के साथ बातचीत की, तस्वीरें खिंचवाईं और भारत के बारे में अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन सैन्य अभ्यासों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखते, बल्कि देशों के बीच दोस्ती और विश्वास को भी मज़बूत बनाते हैं।
गौरतलब है कि 'खान क्वेस्ट 2026' का उद्देश्य केवल संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए सैन्य सहयोग बढ़ाना नहीं है, बल्कि विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच मानवीय संबंधों को भी सशक्त बनाना है। उलानबटार की इस शाम ने एक बार फिर साबित किया कि भारत अपनी सैन्य क्षमता के साथ-साथ संस्कृति, संगीत, नृत्य, भोजन और मेहमाननवाज़ी के लिए भी वैश्विक पहचान रखता है।
आगे की राह
यह सांस्कृतिक संध्या खान क्वेस्ट 2026 के व्यापक ढाँचे का हिस्सा है, जो बहुपक्षीय सैन्य सहयोग को सॉफ्ट पावर से जोड़ने की भारत की रणनीति को दर्शाती है। आने वाले दिनों में अभ्यास के तहत संयुक्त सामरिक प्रशिक्षण जारी रहेगा, लेकिन उलानबटार की यह शाम सैनिकों के स्मृति में लंबे समय तक बनी रहेगी।