दोहा में अमेरिका-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ता जारी, कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता में 17 जून के एमओयू पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
दोहा में 1 जुलाई 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष वार्ता जारी रही। दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं मिले — बैठकें बंद कमरों में हुईं और मध्यस्थ देशों ने संदेश आगे-पीछे पहुँचाए। वार्ता का केंद्रीय एजेंडा 17 जून को इस्लामाबाद में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अमल में लाना है।
बातचीत का स्वरूप और मुख्य मुद्दे
सूत्रों के अनुसार, वार्ता पूरी तरह अप्रत्यक्ष है — मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। एमओयू में शामिल प्रमुख विषयों में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियाँ, होर्मुज स्ट्रेट की समुद्री सुरक्षा, लेबनान में शांति बहाली और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल हैं।
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरान से सीधे बात करने के बजाय मध्यस्थों से मुलाकात कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की करीब छह अरब अमेरिकी डॉलर की फ्रीज संपत्ति अभी तक तेहरान को नहीं सौंपी गई है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल दोहा में
मंगलवार को कतर ने पुष्टि की कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर दोहा पहुँच चुके हैं। हालाँकि, दोनों ईरानी अधिकारियों से सीधे नहीं मिलेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान की ओर से इस वार्ता को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं — अमेरिका इसे एमओयू क्रियान्वयन प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सीधी बातचीत की कोई योजना नहीं है।
ईरान की शर्तें और कालीबाफ का बयान
ईरानी संसद के अध्यक्ष और वार्ता दल के प्रमुख मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब तक एमओयू की प्रारंभिक शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक ईरान किसी अंतिम समझौते पर बातचीत नहीं करेगा।
कालीबाफ के अनुसार, ईरान के हालिया स्विट्जरलैंड दौरे का उद्देश्य एमओयू की उन शर्तों को लागू कराना था जिनमें शामिल हैं: सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, लेबनान में शांति बहाल करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलना, ईरानी कच्चे तेल के निर्यात पर अमेरिकी छूट जारी रखना और फ्रीज संपत्तियाँ वापस दिलाना।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान, अमेरिका और लेबनान ने एक संयुक्त समिति बनाने पर सहमति जताई है, जिसका काम युद्धविराम लागू कराना, लेबनान में युद्ध पूरी तरह खत्म कराना और उसकी संप्रभुता की रक्षा करना होगा। ईरान और अमेरिका दोनों अपने-अपने प्रतिनिधियों के नाम पहले ही तय कर चुके हैं।
वार्ता की पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब मध्य-पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम रास्ता है और इसकी सुरक्षा दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। कालीबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत का रास्ता अपनाता है, लेकिन जहाँ जरूरत पड़े, वह ताकत से जवाब देने से भी नहीं हिचकेगा।
आगे क्या होगा
वार्ता की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या एमओयू की प्रारंभिक शर्तें — विशेष रूप से फ्रीज संपत्तियों की वापसी और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति — तय समय में पूरी होती हैं। संयुक्त समिति के गठन की दिशा में हुई सहमति को एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच परस्पर विरोधी बयान बातचीत की नाजुकता को उजागर करते हैं।