ईरान-अमेरिका परमाणु समझौते के मसौदे पर बातचीत जारी, कतर के माजिद अल अंसारी ने की पुष्टि
सारांश
मुख्य बातें
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और प्रधानमंत्री के सलाहकार माजिद अल अंसारी ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को दोहा में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पुष्टि की कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के मसौदे पर बातचीत सक्रिय रूप से जारी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय मध्यस्थ देश तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए ठोस कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं।
मध्यस्थता की स्थिति
अल अंसारी ने स्पष्ट किया कि कूटनीतिक प्रक्रिया एक उन्नत और सकारात्मक चरण में पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा, 'हम पुष्टि कर सकते हैं कि सभी पक्षों के साथ प्रयास अभी भी जारी हैं। बातचीत काफी सकारात्मक और आगे के चरण में पहुँच चुकी है।' हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच किसी सीधी वार्ता का कार्यक्रम तय नहीं है।
कतर और ओमान की भूमिका
कतर और ओमान, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखने के लिए आपस में करीबी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। अल अंसारी ने कहा कि मध्यस्थ एक अल्पकालिक कूटनीतिक समाधान पर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच वार्ता फिर से शुरू हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा, 'हम इस समय अपने क्षेत्र में किसी बड़े तनाव या संघर्ष को नहीं देखना चाहते।'
होर्मुज जलडमरूमध्य पर कतर की प्राथमिकता
होर्मुज स्ट्रेट के बारे में पूछे जाने पर अल अंसारी ने कहा कि कतर की सबसे बड़ी प्राथमिकता तनाव को कम करना, इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलना और दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक संवाद का रास्ता दोबारा बहाल करना है। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत अत्यंत अधिक है।
ट्रंप का बयान — 'आखिरी मौका'
इससे पहले उसी दिन व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत 'इस समय भी जारी है' और इसे 'आखिरी मौका' बताया। ट्रंप ने कहा, 'हम बातचीत कर रहे हैं, और यह बातचीत ईरान के अनुरोध पर हो रही है। इसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और खास तौर पर कतर का समर्थन प्राप्त है।' यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव अपने उच्च स्तर पर बना हुआ है।
आगे की राह
अल अंसारी ने संभावित समझौते के लिए कोई निश्चित समयसीमा देने से इनकार किया, लेकिन उम्मीद जताई कि यदि बातचीत जल्द फिर शुरू होती है तो एक बड़े समझौते की दिशा में प्रगति संभव है। विश्लेषकों के अनुसार, कतर और ओमान की सक्रिय मध्यस्थ भूमिका इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष अभी भी कूटनीतिक विकल्प को जीवित रखना चाहते हैं।