ईरान-अमेरिका पीस डील के बीच इराकी पीएम अल-जैदी को व्हाइट हाउस का न्योता, 19 जून को जिनेवा में मुहर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ पीस डील की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, व्हाइट हाउस ने इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी को वाशिंगटन आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। अमेरिका और इराक की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि ट्रंप इराकी पीएम का स्वागत करने को उत्सुक हैं। 19 जून को जिनेवा में इस शांति समझौते पर आधिकारिक मुहर लगाई जाएगी, जिस पर ई-हस्ताक्षर पहले ही हो चुके हैं।
इराक को न्योता क्यों — भूगोल और राजनीति का संगम
इराक की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति उसे मध्य पूर्व के सबसे संवेदनशील देशों में से एक बनाती है। एशिया, अफ्रीका और यूरोप के चौराहे पर स्थित होने के कारण इराक को अक्सर 'बीच का देश' कहा जाता है। यह ईरान और अमेरिका — दो परस्पर विरोधी प्रभाव क्षेत्रों — के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाता है।
एक तरफ ईरान है, जिसका इराक के अंदर राजनीतिक, धार्मिक और सुरक्षा ढाँचे पर कथित तौर पर गहरा प्रभाव है — खासकर कुछ सशस्त्र समूहों और राजनीतिक गुटों के ज़रिए। दूसरी तरफ अमेरिका है, जो लंबे समय से इराक की सरकार, सुरक्षा व्यवस्था और आर्थिक पुनर्निर्माण में साझेदार रहा है और जिसकी वहाँ सैन्य उपस्थिति भी रही है।
इराक का 'बैलेंसिंग ज़ोन' — दो ताकतों के बीच संतुलन
इस दोहरे प्रभाव की वजह से इराक एक ऐसा देश बन जाता है जहाँ दो विपरीत ताकतें एक साथ सक्रिय रहती हैं। जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है, तो इराक अप्रत्यक्ष रूप से उस संघर्ष का मैदान बन जाता है — राजनीतिक दबाव, सुरक्षा घटनाएँ और मिलिशिया गतिविधियाँ बढ़ जाती हैं। वहीं जब दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है, तो इराक को भी उस नए संतुलन में ढलना पड़ता है।
गौरतलब है कि इराक के भीतर कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं जो अलग-अलग बाहरी प्रभावों से जुड़े माने जाते हैं। कुछ समूह ईरान के करीब माने जाते हैं, जबकि इराक सरकार अमेरिका के साथ सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बनाए रखती है। इसीलिए इराक की नीति हमेशा संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है।
शांति प्रक्रिया में इराक की भूमिका
जब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव घटता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह अपेक्षा बनती है कि इराक अपनी संप्रभुता को मज़बूत करे और हथियारों पर केवल राज्य का नियंत्रण स्थापित करे। इसका अर्थ यह है कि शांति की प्रक्रिया में इराक को केवल दर्शक नहीं, बल्कि एक सक्रिय भागीदार बनना पड़ता है।
इराक की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र भी इस संतुलन से जुड़े हैं। अमेरिकी और पश्चिमी कंपनियों के निवेश, तेल-गैस परियोजनाएँ और बुनियादी ढाँचे के विकास की योजनाएँ इराक को एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार बनाती हैं।
संयुक्त बयान में क्या कहा गया
15 जून को प्रधानमंत्री अल-जैदी और अमेरिका के विशेष राष्ट्रपति दूत टॉम बैरेक की बैठक में दोनों पक्षों ने एक मज़बूत और पारस्परिक रूप से लाभकारी अमेरिका-इराक साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान में इराक के एक संप्रभु, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की आकांक्षाओं का उल्लेख किया गया।
बयान में इराक में सक्रिय सभी गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को पूरी तरह हथियारमुक्त करने और भंग करने की बात भी शामिल थी। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया कि इराक का क्षेत्र किसी भी पक्ष द्वारा क्षेत्रीय शांति को खतरे में डालने के लिए इस्तेमाल न हो।
राजदूत टॉम बैरेक ने एक्स पर यह बयान साझा करते हुए लिखा कि यह राष्ट्रपति ट्रंप की मध्य पूर्व रणनीति में जुड़ा एक और ऐतिहासिक अध्याय है।
आगे क्या होगा
इराकी पीएम अल-जैदी की वाशिंगटन यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन संयुक्त बयान में इसे 'जल्द' बताया गया है। 19 जून को जिनेवा में ईरान-अमेरिका समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद मध्य पूर्व का क्षेत्रीय समीकरण नए सिरे से तय होगा — और इराक उस नए ढाँचे में केंद्रीय भूमिका में होगा।