आईआरजीसी का दावा: दुश्मनों ने ईरान की ताकत को कम आंका, अब अमेरिका को चुनना होगा रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामिक रेवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के पॉलिटिकल अफेयर्स के डिप्टी यादोल्लाह जावानी ने दावा किया है कि ईरान के विरोधियों ने तेहरान की सैन्य शक्ति और राजनीतिक संकल्प का गलत आकलन किया। उनके अनुसार, तमाम दबावों और सैन्य चुनौतियों के बावजूद ईरान पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है, जबकि अमेरिका गिरावट और असफलताओं का सामना कर रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी को दिए एक बयान में जावानी ने कहा कि दुश्मनों ने यह गलत अनुमान लगाया था कि वे ईरान पर जंग थोपकर त्वरित जीत हासिल कर सकते हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी को हवाई हमलों के साथ आरंभ हुई।
इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य कमांडरों की कथित तौर पर हत्या की गई, जिनमें इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई भी शामिल बताए गए हैं। इसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने इजरायली कब्जे वाले क्षेत्रों के साथ-साथ अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाते हुए प्रतिदिन मिसाइल और ड्रोन अभियान शुरू किए।
ईरान के दावे और रणनीतिक स्थिति
जावानी ने कहा कि दुश्मनों की तीन प्रमुख योजनाएँ थीं — ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट करना, उसकी मिसाइल रक्षा प्रणाली को ध्वस्त करना और अंततः इस्लामिक गणराज्य को उखाड़ फेंकना। उनके अनुसार, ये तीनों लक्ष्य विफल हो गए हैं और क्षेत्रीय समीकरण ईरान के पक्ष में बदल गए हैं।
गौरतलब है कि जावानी ने यह भी दावा किया कि ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर एक निर्णायक स्थान रखता है और 500 वर्षों बाद उसे वह दर्जा प्राप्त हुआ है जिसे उन्होंने 'ईरानी लोगों का कानूनी हक' बताया।
अमेरिका को दो विकल्पों की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में बात करते हुए जावानी ने कहा कि वॉशिंगटन के सामने केवल दो रास्ते हैं — 'बुरा रास्ता' और 'सबसे बुरा रास्ता।' उनका कहना था कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह ईरानी जनता के अधिकारों और शर्तों को स्वीकार करेगा या संघर्ष जारी रखेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान मौजूदा स्थिति को समाप्त करने की अपनी शर्तें पहले ही रख चुका है और अब निर्णय अमेरिका को लेना है।
सशस्त्र बलों की तैयारी पर जोर
जावानी ने दुश्मनों को किसी भी नई गलती से बचने की कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं। उनके अनुसार, यदि कोई नई भूल की गई तो इस्लामी गणराज्य की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक मजबूत, निर्णायक और 'लोगों की कल्पना से भी परे' होगी।
क्या होगा आगे
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान वार्ता की संभावनाओं को और जटिल बनाते हैं। क्षेत्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला के लिए दीर्घकालिक निहितार्थ रखता है।