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ईरानी सांसद अजीजी की अमेरिका को पाँच शर्तें: संघर्षविराम से तेल प्रतिबंध हटाने तक

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ईरानी सांसद अजीजी की अमेरिका को पाँच शर्तें: संघर्षविराम से तेल प्रतिबंध हटाने तक

सारांश

होर्मुज में अमेरिकी हमले और ड्रोन मार गिराने के दावे के बीच ईरानी संसद ने अमेरिका को पाँच गैर-समझौता योग्य शर्तें दीं। बातचीत का दरवाज़ा खुला है — लेकिन शर्तें तेहरान की हैं।

मुख्य बातें

इब्राहिम अजीजी ने 26 मई 2026 को अमेरिका के सामने पाँच शर्तें रखीं — संघर्षविराम, दोबारा हमला न करने की गारंटी, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज पर ईरानी सिस्टम की स्वीकृति, तेल प्रतिबंध हटाना और जब्त संपत्ति वापसी।
अमेरिका ने मंगलवार सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नौकाओं पर हमला किया; IRGC ने जवाब में एक अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा किया।
अजीजी के अनुसार, शर्तें मानने पर 30 और 60 दिनों की वार्ता के ज़रिए शेष मुद्दे सुलझाए जा सकते हैं।
संसद प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने एक्स पर लिखा कि कूटनीति में भी ईरान की नीति 'आंख के बदले आंख' रहेगी।
अजीजी ने माना कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं और दोनों के बीच मतभेद गहरे ढाँचागत हैं।

ईरानी मजलिस की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने 26 मई 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिका को ईरान का विश्वास अर्जित करने के लिए पाँच ठोस शर्तें माननी होंगी। सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी के हवाले से सामने आए इस बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य में ताज़ा सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक मार्ग की रूपरेखा पेश की गई।

अजीजी की पाँच प्रमुख शर्तें

अजीजी ने कहा, 'ईरान की मुख्य मांगों में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म करना, दोबारा हमला न करने की गारंटी, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज पर ईरानी सिस्टम को स्वीकार करना, ऑयल प्रतिबंध हटाना और ईरान की जब्त की गई संपत्ति वापस करना शामिल है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि अमेरिका ये पाँचों शर्तें स्वीकार करता है, तो आगे 30 और 60 दिनों की बातचीत के ज़रिए शेष मुद्दों पर चर्चा संभव है।

होर्मुज में टकराव की पृष्ठभूमि

अजीजी का यह बयान ऐसे समय में आया जब अमेरिका ने मंगलवार सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नौकाओं पर हमला किया। मेहर न्यूज़ एजेंसी ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हवाले से बताया कि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया। यह ऐसे समय में है जब दोनों देशों के बीच परमाणु और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक वार्ता की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।

ईरान की कूटनीतिक स्थिति

अजीजी ने दावा किया कि अमेरिका और इज़रायल संघर्ष जल्दी समाप्त करना चाहते थे, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद उन्हें संघर्षविराम और बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है और दोनों देशों के बीच मतभेद केवल अस्थायी नहीं, बल्कि गहरे ढाँचागत हैं।

संसद की दोहरी आवाज़

एक दिन पहले ही मजलिस की उसी समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, 'मिलिट्री वॉर में हमारी पॉलिसी आंख के बदले आंख थी और डिप्लोमेसी की लड़ाई में भी जवाब उसी तरह दिया जाएगा।' रेजाई ने स्पष्ट किया कि ईरान दबाव और धमकियों के आगे कभी नहीं झुकेगा। गौरतलब है कि संसद के भीतर से एक साथ कूटनीतिक शर्तें और कठोर चेतावनी आना ईरान की दोहरी रणनीति को दर्शाता है।

आगे क्या

अजीजी के अनुसार, पाँच शर्तें मानने के बाद ही दीर्घकालिक वार्ता की संरचना तय होगी। फिलहाल होर्मुज में तनाव और जब्त संपत्ति का मुद्दा किसी भी कूटनीतिक प्रगति के लिए सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनमें से हर एक अमेरिका और इज़रायल के लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत कठिन है — विशेषकर होर्मुज पर ईरानी सिस्टम की स्वीकृति और जब्त संपत्ति की वापसी। यह बयान उसी दिन आया जब होर्मुज में सैन्य टकराव हुआ, जो संकेत देता है कि तेहरान बातचीत की मेज़ पर दबाव बनाए रखना चाहता है। गौरतलब है कि संसद के भीतर से एक साथ शर्तें और 'आंख के बदले आंख' की चेतावनी आना ईरान की उस परंपरागत दोहरी रणनीति का हिस्सा है जिसमें वार्ता और टकराव साथ-साथ चलते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि ये शर्तें नई नहीं हैं — ईरान यही माँगें वर्षों से दोहराता आया है; असली सवाल यह है कि इस बार वार्ता की ज़मीन कितनी अलग है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने अमेरिका के सामने कौन-सी पाँच शर्तें रखी हैं?
ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी के अनुसार पाँच शर्तें हैं — लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करना, दोबारा हमला न करने की गारंटी, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, होर्मुज पर ईरानी सिस्टम की स्वीकृति, तेल प्रतिबंध हटाना और जब्त संपत्ति वापस करना। इन शर्तों के बाद ही 30 और 60 दिनों की आगे की बातचीत संभव बताई गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में ताज़ा क्या हुआ?
अमेरिका ने मंगलवार सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नौकाओं पर हमला किया। IRGC ने मेहर न्यूज़ एजेंसी के हवाले से दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई में एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया।
क्या ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है?
अजीजी के बयान के अनुसार ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन केवल तभी जब अमेरिका पाँच बुनियादी शर्तें पहले माने। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है और दोनों के बीच मतभेद गहरे हैं।
इब्राहिम रेजाई ने एक्स पर क्या लिखा?
मजलिस की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने एक्स पर लिखा कि 'मिलिट्री वॉर में हमारी पॉलिसी आंख के बदले आंख थी और डिप्लोमेसी की लड़ाई में भी जवाब उसी तरह दिया जाएगा।' उन्होंने कहा कि ईरान दबाव और धमकियों के आगे नहीं झुकेगा।
ईरान-अमेरिका तनाव का मौजूदा दौर कितना गंभीर है?
होर्मुज में सैन्य टकराव और ड्रोन मार गिराने के दावे के साथ यह तनाव सीधे सैन्य आमना-सामना तक पहुँच चुका है। अजीजी के अनुसार दोनों देशों के बीच मतभेद अस्थायी नहीं बल्कि ढाँचागत रूप से गहरे हैं, जो किसी भी त्वरित कूटनीतिक समाधान को कठिन बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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